भारतीय रेल की स्थिती कुछ खास अच्‍छी नहीं है। रेलवे का मेंटीनेंस भी उस स्‍तर का नही है। रेलवे में यात्रा करने वाले लोग उसके बारे में बहुत कुछ कहते हैं पर पैंट्री कार की स्थिती अच्‍छी ना होना उनमे से एक है। केन्‍द्र सरकार हर बजट में रेलवे की स्थिती को सुधारने की बात कहती है पर वो सिर्फ कागजों तक ही सीमित होता है।

रेलवे कैटरिंग स्कैम से होंगे अंजान
स्टेशन हो या ट्रेनों के डिब्बे कूडा हर जगह नजर आता है। हाल ही में एक रिटायर्ड आईएएस ऑफीसर को जरिये कलकत्ता के एक यात्री ने एफबी पोस्ट के जरिये रेलवे का भांडा फोड़ दिया। प्रोतप्पा दास नाम के एक फेसबुक यूजर ने रेलवे में पेंट्री कार में कैटरिंग स्कैम का खुलासा किया है। ये पोस्ट यशवंतपुर हावड़ा एक्सप्रेस पेंट्री कार की है। आईआरसीटीसी की साइट में लेटेस्ट मेन्यू रेट्स सर्च करेंगे तो उसमें और रेलवे के मिलने वाले खाने में बहुत अंतर होता है। 50 रुपये के खाने को 90 रुपये में पेंट्री कार वाले बेचते हैं। वेज मील जिसकी असल कीमत मात्र 50 रुपये है उसे 90 रुपये में बेचा जाता है। नॉनवेज मील जिसकी कीमत 55 रुपये है उसे 100 रुपये में बेचा जाता है।

ऐसे होता है हर थाली के साथ करोड़ों का खेल
रेलवे की बेवाइट पर इनकी कीमतों का कच्चा चिठ्ठा खुलता है। स्टेंडर्ड थाली मील की बात करें तो वो 35 रुपय और 40 रुपये का है। जब एक वेज मील आर्डर किया और उसके बदले वेटर को 50 रुपये दिये तो उसने पूरे 90 रुपये मांगे। जब मैंने उस से रेट कार्ड के बारे में पूछा तो उसने ऐसी किसी भी बात की जानकारी से ही इंकार कर दिया। जब मैने उसे रेलवे की साइट पर दिखाया कि वेज मील उस पर तो सिर्फ 50 रुपये का है तो उसने कहा कि किसी को बताना मत ये आप 50 रुपये में ही ले लो। मैं पूरे रास्ते पेंट्री कार और रास्ते में पड़ने वाले 13 कोच के बारे में सोचता रहा। कोच में बैठे सैकड़ो यात्री खाने का कितना ज्यादा रुपये देते हैं।

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Posted By: Prabha Punj Mishra