बोर्ड बैठक में फेंकी कुर्सियां

2019-01-22T06:00:37Z

भारी हंगामे के बाद स्थगित हुई निगम बोर्ड बैठक

निगम अधिकारियों को बनाया बंधक, प्रस्ताव नहीं हुए पारित

पार्षद और कर्मचारियों ने जमकर किया प्रदर्शन, चुपचाप निकले नगरायुक्त

Meerut। नगर निगम की बोर्ड बैठक में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। इस बीच जहां पार्षदों के बीच जमकर कुर्सियां चली, वहीं कर्मचारियों ने भी अपनी मांगों को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। अपनी मांगे मनवाने के लिए सफाई कर्मचारियों ने टाउन हॉल के दोनों गेट घेर लिए। बढ़ते हंगामे को देख मौजूद जहां पुलिस को अंदर से गेट बंद करना पड़ा। वहीं, पार्षदों के एक दल के बीच में ही उठकर चले जाने के बाद निगम प्रशासन को बोर्ड बैठक स्थगित करनी पड़ी।

भिड़ गए पार्षद

सोमवार को नगर निगम स्थित टाउन हॉल में बोर्ड बैठक की शुरुआत वंदे मातरम से हुई। इसके तुरंत बाद ही भाजपा के ललित नागदेव और बसपा पार्षद अब्दुल गफ्फार के बीच पहले शुरुआत करने को लेकर झगड़ा होने लगा। देखते ही देखते हंगामा बढ़ता चला गया और बसपा-भाजपा पार्षदों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पार्षदों के इस हंगामे से महापौर सुनीता वर्मा नाराज हो गई और दो बार सदन छोड़कर भी चली गई। दोनों बार किसी तरह से उन्हें वापस बुलाया गया, लेकिन बैठक शुरु होने से पहले ही बसपा पार्षद जुबैर ने एक शेर सुनाकर भाजपा पार्षदों पर टिप्पणी कर दी। जिसके बाद भाजपा पार्षद बिफर गए और एक बार फिर हंगामा बढ़ गया और दोनो पक्षों में हाथापाई की नौबत आ गई। भाजपा और बसपा पार्षदों की गरमागरमी के चलते काफी देर तक ऐसा ही माहौल बना रहा।

पुलिस ने संभाली स्थिति

मामला बढ़ता देख सदन में थाना देहली गेट पुलिस ने पहुंचकर जैसे-तैसे स्थिति संभाली, लेकिन दोनों ही तरफ के पार्षद एक दूसरे पर तंज कसने से बाज नहीं आएं। इस बीच प्रस्ताव पास कराने को लेकर भी खूब धक्का-मुक्की हुई। हंगामे के बीच अचानक ही बसपा पार्षद बैठक से उठकर चले गए जबकि भाजपा पार्षदों ने बोर्ड बैठक का बहिष्कार कर दिया। जिसके बाद महापौर सुनीता वर्मा ने बोर्ड बैठक स्थगित कर दी।

सफाई कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

वेतन बढ़ाए जाने और संविदा बहाल करने की मांग को लेकर 2215 आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों ने भी सदन के बाहर जमकर हंगामा काटा। इस बीच सफाई कर्मचारियों ने टाउन हॉल के सभी गेट बंद कर दिए और किसी को न बाहर आने दिया न ही किसी को अंदर से बाहर जाने दिया। जिसके बाद बैठक स्थगित होने के बाद भी नगरायुक्त और पार्षद बाहर नहीं निकल पाए। इसके बाद सफाई कर्मचारियों ने अंदर घुसकर खूब हंगामा किया। इस दौरान कर्मचारी बेंच पर चढ़ गए और नगरायुक्त मनोज चौहान के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कुर्सी-मेज इधर-उधर फेंकनी शुरु कर दी। कर्मचारियों का हंगामा देख नगरायुक्त जैसे-तैसे पीछे के दरवाजे से खिसक लिए। जबकि महापौर सुनीता वर्मा ने कर्मचारियों को काफी समझाने का प्रयास किया। लेकिन कर्मचारी नेताओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सोमवार को पास हुए 12 हजार वेतन दिये जाने का प्रस्ताव मार्च 2018, मे पास हो गया था, लेकिन प्रस्ताव के विपरीत 7500 वेतन दिया जा रहा है। ऐसे में सोमवार को इसे पास करने का दिखावा क्यों किया जा रहा है। इसके अलावा 1 मई मजदूर दिवस पर भी नगर आयुक्त साहब ने 12 हजार दिये जाने की घोषणा की थी, लेकिन अब उन्हें 12 हजार नहीं बल्कि, 18 हजार वेतन चाहिए। जिसे वह पारित कराकर ही मानेंगे। इसके अलावा उन्होंने हटाए गए 196 व 17 आउटसोर्स सफाई कर्मियों को भी को 2215 में शामिल करने की मांग भी उठाई।


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