Trump India Visit : उम्मीदों के धागों से बंधी ट्रंप की ये भारत यात्रा

Trump India Visit इस बार ट्रंप के दौरे से उम्मीद है कि भारतीय नौसेना के लिए 2.6 बिलियन डॉलर की लागत से खरीदे जाने वाले 24 सी हॉक हेलिकॉप्टर और 1.8 बिलियन डॉलर की लागत से एयर डिफेंस वेपन सिस्टम की खरीद पर मुहर लग जाए।

Updated Date: Mon, 24 Feb 2020 05:37 PM (IST)

कानपुर (संजीव पांडेय) Trump India Visit अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इंतजार भारत बेसब्री से कर रहा है। ट्रंप भारत आ रहे हैं। हालांकि ट्रंप से पहले डेमोक्रेट राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत की यात्रा पर दो बार आए। ओबामा एक बार यूपीए के कार्यकाल में भारत आए, फिर एक बार एनडीए के कार्यकाल में भारत आए। दरअसल बदलती हुई जियोपॉलिटिक्स में अमेरिका भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकता है, लेकिन यह भी ध्यान रखने वाली बात है अमेरिकी कूटनीति चालाकी से पाकिस्तान को भी नाराज नहीं कर रही है, क्योंकि अफगानिस्तान में शांति वार्ता अंतिम दौर में है। तालिबान और अमेरिका के बीच किसी भी वक्त समझौता की घोषणा हो सकती है। ऐसे में यह भी देखना होगा कि ट्रंप अपने भारत दौरे के दौरान अफगानिस्तान में भारतीय हितों की सुरक्षा को लेकर क्या बात करते हैं? क्योंकि अभी तक अफगान तालिबान की शांति वार्ता से भारत को पूरी तरह से बाहर रखा गया है, जबकि भारत ने अफगानिस्तान के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। वहीं अमेरिकी प्रशासन और तालिबान के बीच हो रही बातचीत को लेकर पाकिस्तान लगातार एक्टिव है।

भारत आने वाले अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ से ट्रंप नाराज

डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा ऐसे वक्त में हो रही है, जब कुछ महीने बाद ही अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं। ट्रंप खुद फिलहाल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में वे अमेरिकी मतदाताओं को यह दिखाना चाहते हैं कि वह अमेरिकी हितों को लाभ पहुंचाने के लिए पूरी दुनिया में संघर्ष कर रहे हैं। ट्रंप नीति का पहला उद्देश्य अमेरिकी फार्मा इंडस्ट्री और अमेरिकी रक्षा उद्योग को लाभ पहुंचाना है। वहीं अमेरिका फर्स्ट की ट्रंप नीति में गरीब, मजदूर और निम्न मध्यवर्गीय अमेरिकियों को लाभ पहुंचाना भी शामिल है। अमेरिका में गरीब, मजदूर सामान्य रूप से डेमोक्रेट पार्टी के समर्थक रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने व्यापार के क्षेत्र में संरक्षणवादी नीति अपनाकर डेमोक्रेट पार्टी के वोटरों में सेंध लगा दी है। ऐसे में ट्रंप अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई ट्रेड डील जल्दीबाजी में भारत के साथ नहीं करेंगे। ट्रंप अमेरिकी हितों को लाभ पहुंचाने के लिए भारतीय हितों का बलिदान चाहते हैं, लेकिन भारत फिलहाल इसके लिए तैयार नहीं है। भारत की अपनी मजबूरी है। ट्रंप अमेरिकी डेयरी और कृषि उद्योग के लिए भारतीय बाजार में छूट चाहते हैं, जबकि भारत ने डेयरी और कृषि क्षेत्र में भारतीय हितों का ख्याल रखते हुए रीजनल कॉम्प्रीहेंसिव इकॉनमिक पार्टनरशीप में शामिल होने से इंकार कर दिया। ट्रंप भारत में आने वाले अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ दरों से नाराज हैं। दरअसल डोनाल्ड ट्रंप भारत से ट्रेड के क्षेत्र में जो छूट चाहते हैं, वही छूट वे यूरोपीय यूनियन, चीन और जापान से मांग रहे हैं।

अमेरिकी व्यापार घाटा जल्द से जल्द खत्म करना ट्रंप की कोशिश

अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी की मार झेलने के बाद चीन 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त अमेरिकी उत्पाद आयात करने को राजी हो गया है। अभी हाल ही में ट्रंप ने हवाई जहाज बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग को लाभ पहुंचाने के लिए यूरोपीय एयर बस के अमेरिका में आयात पर शुल्क बढ़ा दिया है। ट्रंप की पूरी कोशिश है कि भारत के साथ होने वाले अमेरिका का व्यापार घाटा जल्द से जल्द खत्म हो। इसके लिए वे अमेरिकी उत्पादों को ज्यादा से ज्यादा भारत में बेचना चाहते हैं। अमेरिकी फार्मा, तेल और डिफेंस इंडस्ट्री लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति पर भारतीय बाजार में अपने सामान ज्यादा से ज्यादा बेचने के लिए दबाव बना रहा है।

आखिर में सबसे बड़ा सवाल, भारत दौरे में ट्रंप भारत को क्या देंगे

आखिर में सवाल यही उठता है कि ट्रंप अपने भारत दौरे के दौरान भारत को क्या देंगे? भारत और अमेरिका के बीच कुछ रक्षा खरीद पर अंतिम मुहर लग सकती है। भारत और अमेरिका के बीच हेलिकॉप्टर, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन की खरीद को लेकर बातचीत चल रही है। इन रक्षा खरीदों पर ट्रंप की यात्रा के दौरान मुहर लग सकती है। इस खरीद से भारतीय सेना को लाभ पहुंचेगा, इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन इसका आर्थिक लाभ अमेरिकी रक्षा उद्योग को भी पहुंचेगा। पाकिस्तान अमेरिकी हथियारों की भारत को बिक्री रोकने को लेकर लगातार कोशिश करता रहा है। बराक ओबामा के कार्यकाल में कुछ हथियार जिसे भारत खरीदना चाहता है, उसे भारत को बेचने की अनुमति नहीं मिली थी, लेकिन ट्रंप के वक्त परिस्थितियां बदली हैं। दरअसल 2000 के बाद अमेरिका ने अपनी एशियाई डिप्लोमेसी में बदलाव किया था। चीन के बढ़ते प्रभाव और इस्लामिक आतंकवाद के मद्देनजर अमेरिका ने भारत से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी थीं। इसके बाद अमेरिकी रक्षा उद्योगों ने भी भारतीय बाजार की तरफ रुख किया। 2007 से अब तक भारत ने 17 अरब डॉलर के हथियार अमेरिका से खरीदे हैं। अमेरिकी रक्षा उद्योग ट्रंप के कार्यकाल में भारत के साथ बड़ा सौदा करना चाहता है। उम्मीद की जा रही है कि ट्रंप के दौरे के दौरान भारतीय नौसेना के लिए 2.6 बिलियन डॉलर की लागत से खरीदे जाने वाले 24 सी हॉक हेलिकॉप्टर और 1.8 बिलियन डॉलर की लागत से एयर डिफेंस वेपन सिस्टम की खरीद पर मुहर लग जाए।

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Posted By: Satyendra Kumar Singh
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