सेंट्रल एचआरडी मिनिस्टर डॉ एमएम पल्लम राजू पहुंचे एक्सएलआरआई

2013-12-08T12:41:00Z

Jamshedpur झारखंड गवर्नमेंट से कह दिया है कि स्टेट के यूनिवर्सिटीज और कॉलेजेज में टीचर्स के वैकेंट पड़े पोस्ट पर टीचर्स का एप्वॉइंटमेंट जल्दी करें बच्चों में वैल्यूज और एथिक्स की कमी को देखते हुए एनसीईआरटी इसपर काम कर रहा है एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस को इनकम का सोर्स बनाने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा ये बातें कहीं सेंट्रल एचआरडी मिनिस्टर डॉ एमएम पल्लम राजू ने एक्सएलआरआई में ऑर्गेनाइज हुए 22वें एनुअल जेआरडी एथिक्स ओरेशन ऑन ‘बिजनेस एथिक्स’ में शामिल होने सिटी आए थे

Education में expansion पर बोले मिनिस्टर
एचआरडी मिनिस्टर ने अपनी बात एजुकेशन, बिजनेस और पॉलिटिक्स पर रखी. वे एजुकेशन में एक्सपेंशन, इक्विटी और एक्सीलेंस पर बोले. उन्होंने कहा कि आरटीई के इंप्लीमेंटेशन होने के बाद एजुकेशन का दायरा काफी बढ़ गया है. इसके अलावा इक्विटी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सभी को इक्वल अपॉच्र्युनिटी प्रोवाइड करने की कोशिश की गई है. उन्होंने महिलाओं को प्रोवाइड कराई जा रही शिक्षा पर जोर दिया. एक्सीलेंस पर बोलते हुए डॉ राजू ने कहा कि हायर एजुकेशन में इंफ्रास्ट्रक्चर को सही करने और स्टूडेंट-टीचर रेशियो ठीक करने को लेकर गवर्नमेंट ने काम किया है.

अगली बार टाटा स्टील में जॉब मांगने आऊंगा
सेंट्रल एचआरडी मिनिस्टर डॉ एमएम पल्लम राजू ने कहा कि वे जमशेदपुर पहली बार आए हैं. उन्होंने कहा कि एचआरडी मिनिस्टर के तौर पर उन्होंने अपनी स्पीच दे दी, अगली बार वे फुटबॉल या दूसरे गेम्स का कोच बनने या फिर टाटा स्टील में जॉब मांगने आएंगे. उनकी इस बात पर टाटा स्टील के एक्स एमडी एचएम नेरूरकर हंस पड़े और पूरा टाटा ऑडिटोरियम हंसी और तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा. उन्होंने ‘मैनेजेरियल एथिक्स’ का कोर्स स्टार्ट करने के लिए एक्सएलआरआई को बधाई दी. सेंट्रल मिनिस्टर ने कहा कि एक्सएलआरआई कंट्री का टॉप प्राइवेट बिजनेस स्कूल तो है ही, इसमें कोई शक नहीं. आने वाले कुछ सालों के अंदर यह पूरे वल्र्ड का टॉप बिजनेस स्कूल भी बन सकता है.

जेआरडी का जवाब नहीं
प्रोग्राम में एक्सएलआरआई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन और टाटा स्टील के एक्स एमडी एचएम नेरूरकर ने कहा कि जेआरडी टाटा गांधी जी के ट्रस्टीशिप में विश्वास करते थे और बिना एथिक्स के बिजनेस को वे सही नहीं मानते थे. उन्होंने कहा कि जेआरडी हमेशा कॉमन मैन और कंपनी के इंप्लॉई के बारे में सोचते थे. उनका कहना था कि वल्र्ड में स्लो इकोनॉमिक ग्रोथ की वजह अनएथिकल ट्रांजेक्शन रहा है. वेलकम एडरेस में एक्सएलआरआई के डायरेक्टर फादर ई अब्राहम ने कहा कि बिजनेस और वर्कप्लेस में सीरियस एथिकल प्रॉŽलम देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि इस प्रॉŽलम को देखते हुए बी स्कूल्स में बिजनेस एथिक्स कोर्स की शुरुआत होनी चाहिए. वोट ऑफ थैंक्स दिया डीन एकेडमिक्स प्रो प्रणबेश रे ने. इस मौके पर टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन और उनकी वाइफ रुचि नरेंद्रन समेत अन्य प्रेजेंट थे.

केयू में टीचर्स का एप्वॉइंटमेंट कब होगा?
2009 में रांची यूनिवर्सिटी से अलग होने के बाद केयू लगातार टीचर्स की कमी से जूझ रहा है.  केयू में टीचर्स के 750 सैंक्शंड पोस्ट्स हैं. फिलहाल वर्किंग टीचर्स की संख्या है 384. यानी यूनिवर्सिटी और कॉलेज लेवल पर टीचर्स के 366 पोस्ट्स वैकेंट हैं. 2007-2008 में अपॉइंट हुए टीचर्स की संख्या 99 है. इन 99 में से सिर्फ 40 ही पीएचडी किए हुए टीचर्स हैं. 96 में एप्वॉइंट हुए 285 टीचर्स में से 115 ने पीएचडी नहीं किया है. यानी कुल 384 टीचर्स में से सिर्फ 209 ही ऐसे ही ऐसे टीचर्स हैं जिन्होंने पीएचडी कर रखा है यानी 175 ने अभी तक इसकी जरूरत नहीं समझी.


State की यूनिवर्सिटीज में student-teacher ratio का है बुरा हाल
स्टूडेंट-टीचर रेशियो की बात की जाए तो वल्र्ड वाइड यह रेशियो 15:1 का है जबकि इंडियन यूनिवर्सिटीज में एवरेज रेशियो 26:1 का है. झारखंड में स्थित 5 स्टेट यूनिवर्सिटीज, रांची यूनिवर्सिटी, कोल्हान यूनिवर्सिटी, सिद्धो कान्हो यूनिवर्सिटी, विनोबा भावे और नीलांबर पितांबर यूनिवर्सिटीज में स्टूडेंट्स की  संख्या 3 लाख से ज्यादा है जबकि टीचर्स की संख्या लगभग 2200 है. इस तरह से पूरे स्टेट में स्टूडेंट-टीचर का रेशियो लगभग 136:1 है. अगर हम बात कोल्हान यूनिवर्सिटी की करें तो यहां स्टूडेंट्स की संख्या लगभग 78000 है. फिलहाल वर्किंग टीचर्स की संख्या है 384. यानी स्टूडेंट-टीचर का रेशियो होता है 203:1 का. अगर केयू में सभी सैंक्शन पोस्ट के अगैंस्ट में टीचर्स एप्वॉइंट हो भी जाएं तो स्टूडेंट-टीचर का रेशियो 104.1 होगा जो एक आईडल रेशियो से काफी पीछे है.


... और international centre का inauguration स्टेज पर ही हो गया
सैटरडे को सेंट्रल एचआरडी मिनिस्टर को एक्सएलआरआई के नई बिल्डिंग इंटरनेशनल सेंटर का इनॉगरेशन भी करना था. लेकिन पहले से ही इसको लेकर हंगामे की खबर को लेकर ऑरिजिनल बिल्डिंग की जगह उसकी रेप्लिका का इनॉगरेशन स्टेज पर ही कर दिया गया. हालांकि इस बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन का काम भी पूरा नहीं हो पाना एक कारण हो सकता है. मिनिस्टर के आने पर किसी तरह का हंगामा न हो इसके लिए सुबह से ही काफी संख्या में लोकल पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान को तैनात कर दिया गया था. एक्सएलआरआई के गेट के पास वज्र वाहन भी तैनात किया गया था.


नहीं दिखा काला झंडा, सुबह ही हो गई अरेस्टिंग
एक्सएलआरआई और को-ऑपरेटिव कॉलेज के बीच दीवार मामले को लेकर को-ऑपरेटिव कॉलेज बचाव संघर्ष समिति द्वारा सैटरडे को सेंट्रल एचआरडी मिनिस्टर को काला झंडा दिखाए जाने की प्लानिंग थी. पुलिस को इसकी भनक पहले से थी और सैटरडे को सुबह ही समिति के मेंबर्स को उनके घर से अरेस्ट कर लिया गया. मानगो थाना द्वारा वर्कर्स कॉलेज से पवन सिंह, सुरा बिरुली, मो. सरफराज, दिनेश साहू, राजा सिंह, हेमंत पाठक, राकेश चौधरी, शशि सिंह, जाकिर अली को अरेस्ट किया गया. बिस्टुपुर थाना द्वारा राकेश पांडे को, जुगसलाई थाना द्वारा राजीव दूबे को और सोनारी थाना द्वारा सोनू ठाकुर, क्षितिज किरण, सुखदेव सिंह को अरेस्ट किया गया. इन सभी को शाम 4 से 5 बजे के अंदर पीआर बांड भरने के बाद छोड़ दिया गया.

जवाब कई सवालों के
सेंट्रल एचआरडी मिनिस्टर ने लगभग 20 मिनट के स्पीच के बाद टाटा ऑडिटोरियम में उनको सुनने आए ऑडियंस के साथ ही आई नेक्स्ट द्वारा पूछे गए कई सवालों के जवाब दिया. आरटीई से जुड़े सवालों के अलावा पॉलिटिकल सिस्टम पर पूछे गए सवालों को उन्होंने खुलकर जवाब दिया. आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा...
सवाल - गवर्नमेंट का ऑर्डर है कि स्कूल में 8वीं क्लास तक बच्चों को फेल नहीं करना है, ऐसा करने से बच्चे 10वीं में फेल कर जाते हैं क्योंकि वे 8वीं तक ठीक से पढ़ते नहीं. क्या ये उचित है?
जवाब - जरा सोचिए, कोई गरीब व्यक्ति अपने बच्चे को स्कूल पढऩे भेजता है. अगर उसका बच्चा दो साल फेल कर जाए तो वह उसे पढ़ाना ही बंद कर देगा. वैसे ही पेरेंट्स को ध्यान में रखकर ऐसा किया गया है ताकि वे कम से कम 10वीं तक अपने बच्चे को जरूर पढ़ाएं.
सवाल - आरटीई के तहत स्कूल मैनेजमेंट और टीचर्स किसी स्टूडेंट के खिलाफ एक्शन नहीं ले सकते. ऐसा करना बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकता है?
जवाब - ऐसा नहीं है. आरटीई के तहत बच्चों को कॉरपोरल पनिशमेंट देने पर रोक लगाई गई है. टीचर्स बच्चों को पनिश कर सकते हैं पर उनका तरीका अलग होना चाहिए.
सवाल -  आप एजुकेशन में ट्रांस्पेरेंसी की बात कर रहे हैं, लेकिन पॉलिटिकल फंडिंग में ट्रांस्पेरेंसी क्यों नहीं?
जवाब - एक्चुअली प्रजेंट सिस्टम इतना कंविनिएंट है कि इसे चेंज करने की जरूरत ही नहीं (हंसते हुए). वैसे यह सवाल तो वाजिब है. पॉलिटिकल सिस्टम में ट्रांस्पेंरेंसी तो होनी ही चाहिए.
सवाल - बच्चों में वैल्यूज और एथिक्स के लिए गवर्नमेंट क्या कर रही है?
जवाब - यह बात सही है कि बच्चों में वैल्यूज और एथिक्स की कमी देखी जा रही है. इसको लेकर गवर्नमेंट सीरियस है और एनसीईआरटी इसपर काम भी कर रही है.
सवाल - टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस में एथिकल कोर्सेज क्यों नहीं शुरू की जा रही जबकि वहां इसकी जरूरत है?
जवाब - हम जेंडर सेंसिटाइजेशन पर भी काम कर रहे हैं. यह बात सही है कि ये चीजें स्कूल और कॉलेजेज के अलावा प्रोफेशनल कोर्सेज में भी अपीयर होनी चाहिए. इसपर हम विचार कर रहे हैं.
सवाल - आप ट्रांस्पेरेंसी लाने और करप्शन को खत्म करने की बात कर रहे हैैं. आपको नहीं लगता कि पॉलिटिसियंस और इंड्रस्टीयलिस्ट का नेक्सस करप्शन को बढ़ावा देता है?
जवाब - नेक्सस दो तरह के होते हैं. एक तो सोसायटी के फायदे के लिए बना नेक्सस और दूसरा खुद के फायदे के लिए. खुद के फायदे के लिए बना नेक्सस ठीक नहीं. जहां तक इन दोनों के बीच नेक्सस का सवाल है तो यह इलेक्शन के समय जरूर देखने को मिलता है. नेक्सस हेल्दी होना चाहिए.
सवाल - स्टूडेंट-टीचर्स रेशियो को सही करने की बात तो कर रहे हैं पर टीचर्स की क्वालिटी को लेकर कुछ नहीं होता. टीचर्स 5वीं और 6ठी के बच्चों को भी नहीं पढ़ा पा रहे?
जवाब - नहीं ऐसा तो नहीं होना चाहिए. टीचर्स के लिए टीईटी पास करना जरूरी कर दिया गया है. अगर कहीं टीचर्स को बिना किसी टेस्ट के एप्वॉइंट भी कर दिया गया है तो उन्हें एक निश्चित समय में इसे पास करना जरूरी होता है.
सवाल - आपने स्टूडेंट-टीचर्स रेशियो को सही करने की बात कही पर झारखंड में स्थिति ठीक नहीं. यहां स्टूडेंट्स-टीचर्स का रेशियो 136:1 का है?
जवाब - यह बात सही है झारखंड के कॉलेजेज में टीचर्स की कमी है. हमने झारखंड गवर्नमेंट से टीचर्स का एप्वॉइंटमेंट जल्दी करने को कहा है. ऐसी स्थिति झारखंड के अलावा यूपी और बिहार में भी है.
सवाल - डीम्ड यूनिवर्सिटीज तो बच्चों और पेरेंट्स को एक्सप्लॉइट करते हैं. कोर्स फीस और कैपिटेशन फीस आदि के रूप में वे लाखों वसूलते हैं, इसको रोकने के लिए क्या हो रहा है?
जवाब - हम एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस को प्रॉफिट मेकिंग इंस्टीट्यूट नहीं बनने देंगे. हमने इन्हें तीन केटेगरी ए, बी और सी में बांटा है. अच्छा काम करने वालों को ए केटेगरी में, बी केटेगरी वालों को एक्सपेंशन से रोका गया है और सी केटेगरी वालों को इंस्टीट्यूशंस बंद करने को कहा गया है.


हायर एजुकेशन में काफी सुधार हुआ है. इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जा रहा है और स्टूडेंट-टीचर रेशियो के डिफरेंस को कम किया गया है. हमने झारखंड गवर्नमेंट से कहा है कि वे स्टेट के सभी यूनिवर्सिटीज में टीचर्स का एप्वॉइंटमेंट जल्दी करें.
- डॉ एमएम पल्लम राजू,एचआरडी मिनिस्टर, गर्वनमेंट ऑफ इंडिया


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