महंगाई की मार ने किचन के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. वैसे तो महंगाई का असर हर वर्ग पर पड़ा है लेकिन सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ा है. इस समय किचन की अनके खाद्य सामग्रियों के भाव दोगुने हो गए हैं.


गोरखपुर (ब्यूरो)।हरी सब्जियों से लेकर मसाले के भाव अधिक बढऩे से बजट बिगड़ गया है। फिक्स सैलरी में घर को चलाने के लिए महिलाओं को किचन सामग्री में कटौती करनी पड़ रही है। टमाटर अब दोहरा शतक बनाने के करीब है। ऐसे में दाल फ्राई और सलाद से टमाटर गायब होने लगा है। पिछले एक साल में किचन के खर्च में 30 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। यदि किसी परिवार के किचन का खर्च 8 हजार रुपए था, तो वह अब बढ़कर 10,500 रुपए तक हो गया है। खत्म हुई बचत, किचन चलाना मुश्किल
महिलाओं का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले मसाले और हरी सब्जियों में भाव में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें किचन खर्च में से कुछ बचत हो जाती थी, लेकिन अब उनकी बचत राशि भी किचन पर खर्च हो रही है। बढ़ती महंगाई से किचन में दूसरा कोई विकल्प भी नजर नहीं आ रहा है। टमाटर, हरी मिर्च और मसाले की कीमतें बढऩे से दाल में तड़का नहीं लग पा रहा है। महिलाएं कह रही है कि अब तो सब कुछ महंगा हो गया है। हरी सब्जियां और मसाले सब महंगे हैं। कैसे काम चलाएं समझ नहीं आ रहा है। रेस्टोरेंट वालों की भी मुश्किलें बढ़ी


टमाटर के बाद प्याज की महंगाई से रेस्टोरेंट वाले मुश्किल में हैं। रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि टमाटर, प्याज, मसाले की महंगाई से रोज के खर्च पर 15 परसेंट तक की बढ़ोतरी हो गई है। मुनाफा काफी कम हो गया है। होटल संचालक का कहना है कि ग्राहक सलाद के नाम पर अतिरिक्त कुछ देना नहीं चाहते हैं। ऐसे में डेली नुकसान हो रहा है। सब्जियों के फुटकर रेट टमाटर-150 से 160 रुपए प्याज-28 से 30 रुपए हरी मिर्च-160 रुपए आलू-22 से 25 रुपए परवल-50 से 60 रुपए भिंडी-50 से 60 रुपए करैला-50 से 60 रुपए नेनुआ-50 से 60 रुपए लौकी-50 से 60 रुपए कुदरु-50 रुपए मूली-60 रुपए सरपुतिया-70 रुपए मसालों के फुटकर रेट जीरा-690 रुपए सौफ-320 रुपए अजवाइन-210 रुपए मंगरैल-220 रुपए (नोट: रेट रुपए प्रति किलोग्राम में हैं.) महंगाई से किचन का बजट गड़बड़ा गया है। इसलिए अब कम सामाग्री में ही काम चलाया जा रहा है। जहां पहले हर वेराइटी की सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता था। कम आइटम में ही काम चलाना पड़ रहा है। वंदना श्रीवास्तव, गृहिणी

किचन में अब तो सब्जी बनाना भी आसान नहीं रहा। टमाटर जहां एक किलो मंगवाया जाता था। अब जरूरत के हिसाब से पाव में ही काम चलाया जा रहा है। दाल में सिर्फ छौंक लगाकर काम चला रहे हैं। खाने में सलाद भी काफी दूर हो गया है। नूतन रंजन, गृहिणी टमाटर तो किचन से बिल्कुल गायब है। राजमा, चना दाल और चने से ही काम चलाना पड़ रहा है। इसलिए किसी तरह किचन को मैनेज करना पड़ता है। मंजूला पांडेय, गृहिणी महंगाई ने ऐसा हाल कर दिया बस पूछो मत। किसी तरह से किचन के बजट को मैनेज करना पड़ रहा है। कभी आलू डालकर चना की सब्जी या भी राजमा और दाल से काम चलाना पड़ रहा है। प्रियंका पांडेय, गृहिणी

Posted By: Inextlive