'ताकत नहीं रह गई, सिर्फबच्चों के लिए कमा रहा हूं'

2020-05-16T05:30:48Z

- गोरखपुर पहुंचे कामगारों ने बयां किया दर्द

GORAKHPUR: पुणे से शुक्रवार दोपहर गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे मिर्जापुर जिले के चुनाव स्थित सिहोरा निवासी कम्प्यूटर धूप में खड़े होकर मिर्जापुर जाने वाली बस का इंतजार कर रहे थे। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर से बातचीत में उन्होंने अपनी दुखभरी दास्तां बयां की। 20 साल पहले पुणे कमाने गए कम्प्यूटर एक प्राइवेट लॉन्ड्री में काम करते थे। डेली 300 रुपए दिहाड़ी मिलती थी। लॉकडाउन की वजह से कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया। जो पैसे पास में थे वह कुछ ही दिनों में खत्म हो गए। खाने तक केलिए भी पैसे नहीं बचे। घर-परिवार की याद सताने लगी। यूपी गवर्नमेंट की ओर से जब श्रमिक स्पेशल ट्रेंस चलाए जाने की खबर मिली तो परिवार से मिलने की आस जगी। तमाम दुश्वारियां झेलने के बाद ट्रेन से गोरखपुर पहुंचे।

अब कैसे चलेगा खर्चा

कम्प्यूटर ने बताया कि कुछ पैसे हर महीने घर भेज देते थे जिससे बच्चों की पढ़ाई केअलावा अन्य घरेलू काम निपट जाते थे। जब कभी छुट्टी मिलती गांव आते-जाते रहे। उनके दो बेटी बबली, बेबी और दो बेटे संतोष, विवेक हैं। सबसे बड़ी बेटी बबली की शादी हो चुकी है। वे कहते हैं कि इस कोरोना ने सबकुछ खत्म कर दिया है। रोजी-रोटी छिन गई और कामगार पलायन के लिए मजबूर हैं। अब घर परिवार का खर्च कैसे चलेगा इसकी चिंता सता रही है।

नहीं आते तो निकल जाती जान

वहीं, अंबेडकर नगर जिले के रहने वाले रोहित सिंह अपने तीन भाईयों के साथ मुंबई स्थित रेडिमेड सिलाई फैक्ट्री में काम करते थे। सात माह तक सबकुछ ठीक चला। लॉकडाउन में फैक्ट्रियां बंद होनी शुरू हुईं तो लगा कि कुछ ही दिन की बात है। लेकिन लगातार लॉकडाउन बढ़ने की वजह से स्थिति पूरी तरह खराब हो गई। पैसे भी खत्म हो गए। फैक्ट्री मालिक ने भी हाथ खड़े कर दिए तो उधर मकान मालिक ने भी कमरा खाली करने के लिए कह दिया। घर की याद आने लगी। मन बनाया गया कि चाहे जो हो अपने गांव चलना है। भाई जय सिंह, रामजीत सिंह ने ठान लिया तो सब घर के लिए पैदल ही निकल पड़े। रास्ते में ट्रक मिला तो उससे कुछ दूर पहुंचे। इसके बाद फिर एक ट्रक चालक ने थोड़ी दूर लिफ्ट दी। इस तरह मुश्किलें झेलते हुए वह शुक्रवार दोपहर रोडवेज बस स्टेशन पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि गोरखपुर पहुंचने में दस हजार रुपए खर्च हो गए हैं। दर-दर की ठोकर खा रहे थे। किसी तरह से भूख मिटा रहे थे। बहुत बुरा हाल था। कुछ दिन और न आ पाते तो जान निकल जाती।

Posted By: Inextlive

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