रक्षाबंधन करीब है. ऐसे में मिठाइयों की डिमांड बढ़ गई है लेकिन मिलावटी मिठाई के खाने से गंभीर बीमारी जहां होती है. वहीं इसकी पहचान भी होनी जरूरी है. मिलावटी मिठाइयों पर नजर रखने के लिए शासन के आदेश पर फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने अभियान शुरू कर दिया गया है. फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम उन इलाकों में सैैंपल लेने का काम कर रही है. जहां पर ज्यादा मिलावटखोरी होती है.


गोरखपुर (अमरेंद्र पांडेय)। रक्षाबंधन के लिए मिठाई की एडवांस बुकिंग हो रही है। इस बीच मिलावटखोरी को रोकने के लिए फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट 5 से 15 अगस्त तक स्पेशल अभियान चलाकर सैैंपलिंग कर रहा है। अब तक 75 से ज्यादा सैैंपल कलेक्ट किए जा चुके हैैंदूध से बनने वाले आईट्म्स में होती है मिलावट


फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट के सहायक आयुक्त खाद्य-द्वितीय गुंजन कुमार ने बताया, सैैंपलिंग के लिए लगातार टीम विभिन्न एरिया में सरप्राइज विजिट कर रही है। आजकल मिठाइयों में मिलावट की आशंका के चलते ड्राई फ्रूट चलन में हैं, लेकिन फिर भी घर में मिठाई तो आती ही है और परहेज करते करते भी लोग खाते ही हैैं। ऐसे में मिठाइयों में मिलावट भी होने की गुंजाइश बढ़ जाती है। वह मिलावट कैसे होती है और हम उसे कैसे पहचानें। यह भी ग्राहकों को जानना जरूरी है। मिलावट डायरेक्ट मिठाई में नहीं, बल्कि जिस चीज में मिठाई बनती है। उसमें की जाती है। जैसे दूध, शहद, दालें, मेवे, चीनी वगैरह आदि। कैसे होती है मिलावट 1 - वर्क में एल्यूमीनियम मिलाया जाता है।2 - दूध में पानी-यूरिया-वांशिग पाउडर मिलाया जाता है।3 - घी में चर्बी मिलाई जाती है। 4 - मेवे में आरारोट, चीनी मिलाई जाती है।

5 - दालों में टेलकॅम पाउडर और एस्बेस्टॉस पाउडर मिलाया जाता है। मिलावटी मिठाई का कैसे करें पता1- मिठाई हाथ में लेने पर, हाथ में रंग लग जाता है। मिठाई में रंग लाने के लिए सबसे ज्यादा मेटानिल येलो और टारट्राजाइन मिलाया जाता है। इससे किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है।2 - मेवे में मिलावट की पहचान के लिए फिल्टर पर आयोडीन की दो बूंद डालें। इसका काला पडऩा बताता है कि इसमें मिलावट है। खोया दानेदार हो तो भी मिलावटी हो सकती है।3- मिठाई पर लगे वर्क में मिलावटी होने का पता उसे जलाकर कर सकते हैं। वर्क असली होगा तो जलने पर छोटी गोलीनुमा आकृति में बन जाएगा। नकली होगा तो स्लेटी रंग का जला हुआ कागज का दिखेगा।4- मिठाई चख कर भी उसके बासी होने या फिर गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकते हैं।5 - नकली केसर पानी में डालने के बाद रंग छोडऩे लगता है। असली केसर को पानी में घंटों रख देने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता।मिठाई बनने वाले सामान में मिलावट कैसे जानें- मावा में स्टार्च जांचने के लिए थोड़ा मावा अलग लें। - उसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर इस मिश्रण को उबालें।

- फिर इसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। - यदि नीले रंग की परत दिखे, तो साफ है कि उसमें स्टार्च मौजूद है। - चावल में मिलावट की जांच के लिए दोनों हाथों से चावल को रगड़ें।- इसमें पीला रंग होगा, तो हाथों में लग जाएगा। दूसरा तरीका ये भी है कि चावल को पानी में भिगोएं और उसमें सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कुछ बूंदें डालें। पानी का रंग बैंगनी हो जाए, तो उसमें पीला रंग मिला हुआ है।

Posted By: Inextlive