सिटी के सबसे बड़े एलएलआर अस्पताल में दलालों ने सभी जगह पैठ बना ली है. दवा का खेल हो या फिर जांच और खून की जरूरत हर जगह पर दलाल मौजूद है. जो कमीशनखोरी के खेल में बकायदा कुछ डॉक्टर्स और अस्पताल के ही कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैंं. इसका खुलासा पिछले दिनों हो भी चुका है. जब इमरजेंसी में दलाल की इंट्री कराने के लिए एक जेआर सिक्योरिटी से ही भिड़ गया था. बाद में इस जेआर को सस्पेंड कर दिया गया था. दलालों के खेल में फंस कर मरीजों और इनके तीमारदारों को जरूर मोटी चपत लग जाती है. जो सुविधाएं अस्पताल में पहले से मौजूद हैं. दलालों के चक्कर में फंस कर उन्हें ज्यादा पैसे खर्च कर बाहर से खरीदनी पड़ती है.

कानपुर (ब्यूरो) पिछले एक महीने में एलएलआर अस्पताल में कई एजेंट पकड़े गए हैं। अभी हाल ही में ब्लड बैंक में खून की दलाली के मामले में कुछ लोगों को पकड़ा गया था। जिसकी जांच के लिए प्रिंसिपल की ओर से तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इससे पहले हैलट इमरजेंसी में एक दवा के एजेंट को अंदर ले जाने के मामले में जेआर को सस्पेंड किया जा चुका है। इसके अलावा दो बार वार्ड और इमरजेंसी दो एजेंट पकड़े जा चुके हैं। जिनकी पैरवी करने खुद जेआर ही आगे आए। वहीं कई एजेंट तो ऐसे हैं जोकि सीधे सीनियर डॉक्टर्स से ही सांठगांठ किए रहते हैं और उनकी ओपीडी के समय ओपीडी के अंदर की बैठते हैं और बकायदा पर्चे में लिखी डॉक्टर की दवा प्राइवेट मेडिकल स्टोर से खरीद कर आ रही है या नहीं यह भी सुनिश्चित करते हैं। अस्पताल प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि कर्मचारियों और कुछ डॉक्टर्स की मिलीभगत इन एजेंट्स से रहती है। इसी वजह से वह इतनी बेफिक्री से अस्पताल के अंदर सक्रिय रहते हैं। अब इन पर लगाम लगाने के लिए अस्पताल में प्राइवेट सिक्योरिटी के साथ ही पूर्व सैनिकों की तैनाती को भी बढ़ाया जा रहा है।


कमीशनखोरी के कितने खेल-
- वार्ड- जांच और दवा की कमीशनखोरी
- मरीज को प्राइवेट अस्पताल में भेजने का खेल
- आईसीयू- मंहगे इंजेक्शन और कंज्यूमेबल आइटम्स के लिए कमीशनबाजी
- एनआईसीयू- बच्चों को लगाई जाने वाली सिरिंज का खेल
- ओपीडी- दवाओं में कमीशनखोरी का खेल
- इमरजेंसी- मरीजों के लिए कैथेटर से लेकर सिरिंज और दवाओं की बिक्री का खेल
- ब्लड बैंक- ब्लड दिलाने के लिए कमीशनखोरी का खेल

दलालों को रोकने के लिए बनाया मास्टर प्लान
एलएलआर अस्पताल में दलालों की इंट्री को रोकने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से कई दावे किए गए हैं। इसके लिए एक पूरा एक्शन प्लान तैयार किया गया है। जिसके तहत पूरे अस्पताल कैंपस को सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में रखा जाएगा। इसके लिए नेत्ररोग विभाग के पास ही एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। अस्पताल में इमरजेंसी,ओपीडी से लेकर बाहर आने जाने के सभी प्वाइंट्स पर यह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा रिटायर्ड सैनिकों की सुरक्षा के लिए नियुक्ति की जा रही है। ओपीडी, इमरजेंसी, इनडोर, न्यूरो साइंस भवन, बालरोग अस्पताल में इनकी तैनाती की गई है।
प्राइवेट एंबुलेंसों के लिए बैरियर
एलएलआर अस्पताल में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में कमीशन लेकर भेजने के भी काफी मामले सामने आए हैं। इसके लिए प्राइवेट एंबुलेंस वालों का रोल सामने आता है। ऐसे में इन पर नियंत्रण के लिए भी अब अस्पताल प्रशासन की ओर से इमरजेंसी और ओपीडी के पास दो बैरियर भी लगाए जाएंगे। जहां पर सिक्योरिटी गार्ड की तैनाती की जाएगी।

'' दलालों की इंट्री को लेकर निगरानी के लिए बैरियर बनाए जाएंगे। अस्पताल में भर्ती मरीजों को प्राइवेट अस्पताल भेजने की कई बार शिकायतें मिली है। जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
प्रो। आरके मौर्या, एसआईसी एलएलआर अस्पताल

Posted By: Inextlive