यूनाइटेड पब्लिक स्कूल सिविल लाइंस में वेडनसडे को कवि प्रो. राम स्वरूप सिंदूर की जन्म जयंती पर गीत सिंदूरी-सृजन स्मरण गीत विमर्श संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

कानपुर(ब्यूरो)। यूनाइटेड पब्लिक स्कूल सिविल लाइंस में वेडनसडे को कवि प्रो। राम स्वरूप सिंदूर की जन्म जयंती पर गीत सिंदूरी-सृजन स्मरण (गीत विमर्श) संगोष्ठी का आयोजन किया गया। लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी के तत्वावधान में साहित्य जागरण मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम का शुभारम्भ, चीफ गेस्ट दैनिक जागरण के डायरेक्टर सुनील गुप्त, इन्द्रमोहन रोहतगी, संगीत जागरण मंच के प्रभारी राजेन्द्र राव और अनिल सिंदूर ने दीप प्रज्जवलन और सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण से किया।


मंझे हुए पत्रकार भी थे
चीफ गेस्ट सुनील गुप्त ने अपने संबोधन में कहा कि गीत संरचना में कवि प्रो। रामस्वरूप &सिंदूर&य अपने समकालीनों में सबसे अलग थे। यह भी कह सकते हैं कि वे अपना जवाब खुद ही थे। उनके जैसा शब्द शिल्पी आज के समय में दुर्लभ है। सिंदूर केवल कवि ही नहीं थे, वे कुशल फोटोग्राफर, मंझे हुए पत्रकार और संपादक भी थे। उन्होंने &समारोह&य साप्ताहिक पत्र भी निकाला था। इस मौके पर डॉ। साधना सिंह, योगेश श्रीवास्तव, लोकेश शुक्ल, देवेन्द्र सफल, डॉ। रामनरेश, रोमी राजेश अरोड़ा, ओम प्रकाश पाठक, त्रिभुवन श्रीवास्तव और गणेश तिवारी आदि मौजूद रहे।

गीतों से याद किए कवि सिंदूर
प्रोग्राम के शुभारंभ के बाद कविता सिंह ने वाणी वंदना और सिंदूर जी के गीत &आज रात बीती तेरी तस्वीर बनाने में, तस्वीर बनाने में कि एक जंजीर बनाने में&य को प्रस्तुत किया। कवि दिनेश प्रियमन ने कहा कि प्रेम की अरुणिमा से सिंदूरी होने तक की यात्रा हैं सिंदूर के गीत जो हमारे जीवन को व्यापक परिप्रेक्ष्य में प्रेममय बनाती है। डॉ। राकेश शुक्ल ने कहा कि सिन्दूर जी के गीत हमारे अंतरतम में अमृत-आलोक जाग्रत करते हैं। डॉ। सोनम सिंह ने सिंदूर के गीत पर कहा कि इनके गीत सप्राण हैं सरस हैं। गीतों का शिल्प और भाषिक सौन्दर्य अद्भुत है। युवा कवि हरिओम द्विवेदी ने सिन्दूर के गीत &मैं अकथ्य को कहने का अभ्यास कर रहा हूँ&य का पाठ करते हुए कहा कि इस गीत में स्वयं से मिलने की आकांक्षा व्यक्त हुई है। उनका लेखन स्वान्त: सुखाय होते हुए भी बहुजन हिताय है।

बिताए हुए दिनों को किया याद
प्रोग्राम के अध्यक्ष इंद्र मोहन रोहतगी ने सिंदूर के साथ डीएवी कालेज में बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके गीत पाठ की शैली अद्भुत थी। वह बहुत जीवंत व्यक्ति थे। उनके पुत्र अनिल सिंदूर द्वारा प्रोग्राम की परिकल्पना की गई। धन्यवाद ज्ञापन और संचालन विनोद श्रीवास्तव ने किया।

Posted By: Inextlive