जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट में कानपुराइट्स के घरों में 24 घंटे नलों से पानी के फौव्वारे छूटने के दावे किए गए जिससे लोगों को ग्र्राउंड वाटर का यूज न करना पड़ा लेकिन 12 साल बीतने के बाद भी कानपुराइट्स के घरों से नहीं बल्कि लीकेज वाटर लाइनों के कारण रोड्स से फौव्वारे छूट रहे हैं. करप्शन के कारण अरबों रुपए से तैयार किए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अपनी कैपेसिटी का 15 परसेंट भी ड्रिकिंग वाटर सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं. 400 एमएलडी के प्लांट्स से केवल 50 एमएलडी पानी सप्लाई हो पा रहा हैं.

कानपुर (ब्यूरो)। जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट में कानपुराइट्स के घरों में 24 घंटे नलों से पानी के फौव्वारे छूटने के दावे किए गए, जिससे लोगों को ग्र्राउंड वाटर का यूज न करना पड़ा लेकिन, 12 साल बीतने के बाद भी कानपुराइट्स के घरों से नहीं बल्कि लीकेज वाटर लाइनों के कारण रोड्स से फौव्वारे छूट रहे हैं। करप्शन के कारण अरबों रुपए से तैयार किए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अपनी कैपेसिटी का 15 परसेंट भी ड्रिकिंग वाटर सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। 400 एमएलडी के प्लांट्स से केवल 50 एमएलडी पानी सप्लाई हो पा रहा हैं। आए दिन लाइन में लीकेज और फिर मेंटिनेंस के कारण वाटर सप्लाई ठप रहती है। लाखों कानपुराइट्स को वाटर क्राइसिस का सामना करना पड़ता है।

अरबों के प्रोजेक्ट पर पानी
दरअसल जेएनएनयूआरएम के अन्र्तगत कानपुराइट्स के घरों में 24 घंटे फुल प्रेशर में वाटर सप्लाई के दावे किए किए गए थे। इसके लिए बैराज के पास गंगा से रॉ वाटर लेने के लिए एक और इंटेक प्वाइंट बनाया गया था। इसके 200-200 एमएलडी के दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए थे। साथ ही एक पम्प हाउस भी बनाया गया था। जहां 12 पम्प लगे हुए हैं। जिससे गंगा से 400 एमएलडी रॉ वाटर लेकर ट्रीटमेंट प्लांट्स तक पहुंचाना था। ऑफिसर्स के मुताबिक इनमें से हर एक पम्प की कैपेसिटी 50 एमएलएडी है। स्टैंडबाई के तौर चार पम्प रखे गए थे। ताकि पम्प खराब होने पर वाटर सप्लाई की समस्या न खड़ी हो सके। कानपुराइट्स को हर समय पानी मिल सके।

दो फीडर लाइनें बिछाई
इन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स के जरिए वाटर सप्लाई से छूटे हुए एरिया के साथ 40 लाख कानपुराइट्स के के घरों तक भरपूर ड्रिकिंग वाटर पहुंचाना था। इसीलिए इस प्रोजेक्ट में जलकल के पुराने वाटर सप्लाई नेटवर्क को भी जोड़ा गया था। इसके लिए गंगा बैराज स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स से 2100, 1800 व 1600 एमएम डायमीटर साइज की पीएसी फीडरमेन पाइप कम्पनी बाग होते हुए एक साइड फूलबाग और दूसरी तरफ रावतपुर, गोविन्द नगर होते हुए बारादेवी (किदवई नगर साइट नम्बर वन) जेएडपीएस तक बिछाई गई थी।

इन इलाकों में होनी थी सप्लाई
इन लाइनों के जरिए आजाद नगर, विष्णुपुरी, शारदा नगर, शास्त्री नगर, गोविन्द नगर, साकेत नगर, किदवई नगर, आर्य नगर, स्वरूप नगर, सिविल लाइंस, हरवंशमोहाल आदि मोहल्लों तक ड्रिकिंग वाटर भरपूर पानी पहुंचाया जा सके। जिससे कानपुराइट्स के नल खोलते ही उन्हें फुल प्रेशर में पानी मिल सके। लेकिन प्लांट, पम्प हाउस, वाटर लाइनें आदि कार्य होने के 12 वर्ष बाद भी कानपुराइट्स के घरों में नलों से फौव्वारे नहीं छूट रहे।

प्रेशर पड़ते ही फट जाती लाइनें
अलबत्ता वाटर ट्रीट प्लांट से जरा सा तेज प्रेशर में पानी छोड़ते ही वाटर लाइनें लीकेज हो जाती हैं और रोड्स से पानी के फौव्वारे छूटने लगते हैं। इसी वजह से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स के 8 पम्प एक साथ नहीं चलाए जाते हैं। आल्टरनेट दो-दो, चार-चार पम्प चलाए जाते हैं। वह भी 24 घंटों की बजाए कुछ देर के लिए। इसमें पूरा ख्याल रखा जाता है कि फीडरमेन लाइनों पर पानी का प्रेशर न पड़े। जिससे वह लीकेज न हो।


इन इलाकों में वाटर सप्लाई
नवाबगंज, विष्णुपुरी, स्वरूप नगर, आर्य नगर, सिविल लाइंस, ग्वालटोली , फूलबाग, परेड, हरवंशमोहाल, कर्नलगंज, पी रोड, जवाहर नगर, रावतपुर, शारदा नगर, काकादेव, विजय नगर, गोविन्द नगर, साकेत नगर, जूही कालोनी, किदवई नगर,अजीतगंज आदि मोहल्लों में ड्रिकिंग वाटर पहुंचाना था।

Posted By: Inextlive