झांसी रानी जो काशी की बेटी थीं उन्हें भी यहां वह सम्मान मिलता नजर नहीं आ रहा जिसकी वह हकदार हैं. चंद्रशेखर आजाद व नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाएं धूल फांक रही हैं. तो आईए क्रांति दिवस 10 मई के बहाने सिटी में आजादी के समय की विभूतियों को मिलने वाले सम्मान पर डालते हैं एक नजर...

वाराणसी (ब्यूरो)आजादी की लड़ाई में काशी के वीरों का भी अहम रोल रहा। लेकिन समय बीतने के साथ यहां के लोग आजादी के दीवानों को लगभग भूल गए हैं। झांसी रानी जो काशी की बेटी थीं, उन्हें भी यहां वह सम्मान मिलता नजर नहीं आ रहा, जिसकी वह हकदार हैं। चंद्रशेखर आजाद व नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाएं धूल फांक रही हैं। तो आईए क्रांति दिवस (10 मई) के बहाने सिटी में आजादी के समय की विभूतियों को मिलने वाले सम्मान पर डालते हैं एक नजर

उखड़ रही तस्वीर

'बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थीÓ, लेकिन आज हमें यह कहने में बहुत दुख हो रहा है कि वह काशी की बेटी भी थी, कारण कि लक्ष्मीबाई को उसके मायके वाले ही वह सम्मान नहीं दे रहे जिसकी वह हकदार है तो अन्यों से इसकी क्या उम्मीद रखी जाए। महारानी लक्ष्मी बाई का जन्म वाराणसी के भदैनी मोहल्ले में 19 नवंबर 1835 को हुआ था। उन्होंने काशी का मान पूरे विश्व में फैलाया और स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में अपने प्राणों की बलि देकर देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज इसी रानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली अनाथ नजर आ रही है.

कोई देखने वाला नहीं

प्रदेश सरकार की ओर से भदैनी में रानी लक्ष्मीबाई स्मृति स्थल बनाया गया है, लेकिन यहां उनकी जन्मस्थली की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। यहां लगी वीरांगना की तस्वीर रखरखाव के अभाव में खराब हो रही है और उसकी पेंटिंग जगह-जगह से उखड़ रही है। आजाद पार्क में लगी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर धुल की परत चढ़ी हुई है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की भी सफाई सिर्फ उसी दिन होती है, जिस दिन उनका जन्म दिन होता है.

निगम भूला दायित्व

नगर निगम के पास विरांगना की जन्मस्थली के साथ ही सिटी में विभूतियों की प्रतिमाओं को सजाने संवारने का दायित्व है, लेकिन वह अपने दायित्व के प्रति कितना गंभीर है, इसका नजारा विरांगना की जन्मस्थली और विभूतियों की प्रतिमाओं पर नजर डालने पर नजर आता है। जन्मस्थली की ओर जहां कोई ध्यान नहीं दे रहा तो वहीं सिटी में चौराहों पर लगी प्रतिमाएं भी धुल फांकती नजर आ रही हैं.

पर डे हजारों टूरिस्ट

शहर में पर डे हजारों पर्यटक आते हंै और चौराहों से ही गुजरते हैं। ये विरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली भदैनी भी जाते हैैं और वहां कोई व्यवस्था न देखकर प्रशासन को कोसते हुए लौटते हैं.

साफ-सफाई की जिम्मेदारी उद्यान विभाग की है। इसे क्यों नहीं किया जा रहा, इसकी जांच कराई जाएगी। जहां-जहां चौराहे पर प्रतिमा लगी है वहां जल्द से जल्द सफाई कराई जाएगी.

संदीप श्रीवास्तव, पीआरओ, नगर निगम

शहर के चौराहे पर प्रतिमाएं लगी हैं। प्रशासन को कोई न कोई कार्यक्रम कराना चाहिए, जिससे लोग उनके बारे में जान सके.

विजेन्द्र कुमार मिश्र, समाजसेवी

इन विभूतियों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था, तभी आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। इनके बारे में आज के यूथ को बताना चाहिए.

रेखा पाल, समाजसेवी

विभूतियों की प्रतिमाओं का मेंटीनेंस कराना नगर निगम भूल गया है। सिर्फ जयंती पर याद किए जाते हंै। इसके बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है.

मुन्ना लाल, लंका

शहर के चौराहों पर विभूतियों की जो प्रतिमाएं लगायी गयी हैं, उनकी देखभाल प्रतिदिन होनी चाहिए। क्योंकि वे थे, इसीलिए आज हम आजाद हैं.

सुनील कुमार, छित्तूपुर

Posted By: Inextlive