चारधाम ऑल वेदर प्रोजेक्ट के तहत ऋषिकेश-गंगोत्री मार्ग पर नरेंद्रनगर लैंडस्लाइड जोन परेशानियों का सबब बन रहा है। यहां पर पहाड़ी से लगातार बोल्डर-पत्थर आ रहे हैं। पिछले दिनों इस डेंजर से आवाजाही बंद रही। इसके अलावा गंगोत्री-यमुनोत्री मार्ग पर भी कई डेंजर जोन चिन्हित किए गए हैं। चिन्यालीसौड़ के पास नलूणा धरासवू रतूड़ीसेरा बंदरकोट नेताला मनेरी डेम के समीप हेलगूगाड सुनगर गंगनानी से डबराणी के बीच संकरी सड़क पकोड़ागाड खीरगंगा आदि जगहों पर लैंडस्लइड जानलेवा साबित हो रहा है। वहीं यमुनोत्री हाईवे पर धरासू कल्याणी राड़ी टॉप खरादी किसालाखड्ड जर्जरगाड डामटा ओजरी डाबरकोट और हनुमानचट्टी व राणाचट्टी के बीच करीब नौ स्थानों पर डेंजर जोन रोजाना ट्रैफिक को बाधित कर रहे हैं।

- 160 लैंडस्लाइड जोन रखे गए हैं संवेदनशील श्रेणी में, ट्रैफिक हो रहा लगातार बाधित
- चारधाम यात्रा मार्ग पर 58 नए भूस्खलन और भूधंसाव के एरिया किए गए आइडेंटीफाई
देहरादून, 5 सितम्बर (ब्यूरो)।
इस मानसून सीजन में ऑल वेदर रोड परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश से ऑलवेदर रोड के बुरा हाल है। अतिवृष्टि के चलते जहां करीब 250 लैंडस्लाइड जोन सक्रिय हैं वहीं इसमें से फिलहाल 160 जोन को को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। भूस्खलन के चलते सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त हुई है, जबकि कुछ स्थानों भूधंसाव के चलते सड़कों को क्षति पहुंची है। ऑलवेदर रोड प्रोजेक्ट कई भागों में बंटा है। इस पर एनएचएआई के अलावा पीडब्लयूडी और बीआरओ काम कर रहे हैं। इस दौरान सभी अपने-अपने हिस्से की सड़क को खुला रखने की जद्दोजहद में लगे हैं, लेकिन कई नई जगह पर लैंडस्लाइड जोन के सक्रिय होने से परेशानी और बढ़ गई है। इन स्थानों के सुधारीकरण का प्रस्ताव विभाग ने शासन को भेज दिया है। इसमें से कुछ डेंजर जोन पर सुधारीकरण कार्य को स्वीकृति मिल चुकी है। कौडिय़ाला, अटाली गंगा, सिंगटाली, शिवपुरी, तोताघाटी, तीनधारा, मूल्यागांव इसमें शामिल हैं।

18 नए एरिया आइडेंटीफाइड
गौचर से लेकर बदरीनाथ तक हाईवे पर 58 नए लैंडस्लाइड और भूधंसाव एरिया आइडेंटीफाई किए गए हैं। इसमें 40 लैडस्लाइड और 18 भूधंसाव एरिया शामिल है। पहाड़ी से हुए भूस्खलन से हाईवे पर कहीं मलबे के ढेर लगे हैं, तो कहीं हाईवे पूरी तरह ध्वस्त हो गया हैै। सबसे बुरी स्थिति मैठाणा, छिनका, मायापुर, पीपलकोटी, भनेरपाणी, पागलनाला, बेलाकूची, जोगीधारा, टैया पुल, बाल्दौड़ा, लामबगड़, रड़ांग बैंड और कंचन गंगा में बनी हुई है। इन जगहों पर मलबे के ऊपर से ही यात्रा वाहन रेंगकर चल रहे हैं। ऑलवेदर रोड प्रोजेक्ट कार्य श्ुारू होने के बाद गौचर के समीप कमेड़ा में नया भूस्लखन जोन बन गया है। यहां करीब 200 मीटर पहाड़ी हिस्से से भूस्खलन हो रहा है। हाईवे पर करीब 100 मीटर तक भूधंसाव भी सक्रिय हो यगा है। नंदप्रयाग के पास पर्थाडीप में ऑलवेदर रोड कार्य शुरू होने से पिछले साल से फिर बड़े पैमाने पर भूस्खलन शुरू हो गया है। यही स्थिति छिनका और अन्य डेंजर जोनों की है।

केदारनाथ मार्ग बना जानलेवा
केदारनाथ और केदारघाटी को जोडऩे वाला रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे बरसात से कई जगहों पर खस्ताहाल हो चुका हे। मार्ग पर नए भूस्खलन जोन सक्रिय होने से जानमाल का खतरा बना है। साथ ही भूधंसाव से भी सड़क को क्षति पहुंच रही है। 78 किमी। लंबे हाईवे पर भटवाड़ीसैंण, तिलवाड़ा, गिंवाला, काकड़ागाड, सेमीभैंसारी, विद्याधाम, देवीधार, फाटा-तरसाली, खाट गांव में भूस्खलन और भूधंसाव जोन सक्रिय है। पिछले माह 10 अगस्त को फाटा-तरसाली में पहाड़ी से हुए से एक यात्री वाहन बोल्डर और मलबे से दब गया था। इस हादसे में 5 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई थी। ऑलवेदर रोड निर्माण से हाईवे पर नए भूस्खलन जोन सक्रिय होने से हालात खराब हो रहे हैं।

इस बार बारिश में सड़कों को भारी क्षति पहुंची है। भूस्लखन और भूधंसाव से कई स्थानों पर बाधित होर ही है। सड़कों को खोलने का काम दिन-रात चल रहा है। कुछ जगहों पर बड़े लैंडस्लाइड जोन का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया गया है।
दीपक कुमार यादव, प्रमुख अभियंता एवं एचओडी, पीडब्ल्यूडी
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Posted By: Inextlive