सेटेलाइट से शहर पर नजर

2018-08-30T06:00:26Z

-मैप से क्लीयर होगा कि शहर में कहां-कहां है सीवर लाइन, नाला और पार्क

-किस एरिया में कितने मकान बने हैं, कहां भूखंड खाली है, इसकी जानकारी भी तुरंत मिल जाएगी

balaji.kesharwani@inext.co.in

ALLAHABAD: संगम नगरी इलाहाबाद स्मार्ट सिटी बनने जा रहा है। शहर कहां तक फैला है? कहां-कहां सीवर लाइन बिछी है? कहां वाटर पाइपलाइन है और कहां नहीं? रोड कटिंग की क्या स्थिति है? शहर में पार्क कहां-कहां हैं? कितने मकान बने हैं और कहां-कहां भूखंड खाली है? इन कई सवालों का जवाब नगर निगम के अधिकारियों के साथ ही संबंधित विभागों के पास नहीं है। इसका जवाब ढूंढने और पूरे शहर का भौगोलिक मैप तैयार कराने के लिए नगर निगम एडमिनिस्ट्रेशन पूरे शहर का जियोग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम के जरिये सर्वे यानी जीआईएस सर्वे कराने जा रहा है।

सैटेलाइट से सामने होगी तस्वीर

सैटेलाइट के द्वारा कराए जाने वाले जीआईएस सर्वे के जरिये शहर की एक-एक गली, एक-एक मोहल्ला, एक-एक रोड की अंडरग्राउण्ड और ओवरग्राउण्ड मैपिंग होगी। इससे पूरी तस्वीर सामने होगी कि किस एरिया में क्या-क्या सुविधाएं हैं? किस एरिया में कौन-कौन सी सुविधाएं नहीं हैं? कौन-कौन सी सुविधाएं डिस्टर्ब हैं।

एक क्लिक पर मिलेगा नक्शा

-अंडर ग्राउण्ड और ओवर ग्राउण्ड मैपिंग के जरिये जमीन के उपर और जमीन के अंदर का पूरा नक्शा क्लीयर हो जाएगा।

-पाइपलाइनों का जाल कहां-कहां और किस तरह से बिछा है

-सीवर लाइन कहां-कहां से गुजरी है।

-स्ट्रीट लाइट कहां-कहां लगी है।

-सड़कों का नेटवर्क कहां से कहां तक है

-पार्क-कहां हैं? शहर में कहां-कहां मंदिर-मस्जिद आदि हैं?

-इन सभी सवालों का जवाब ढूंढने के लिए फाइल नहीं पलटनी होगी

-बस एक क्लिक पर पूरी स्थिति साफ होगी।

मोबाइल पर भी दख सकेंगे

नगर निगम के रिकार्ड में शहर में भवनों की संख्या दो लाख के करीब दर्ज है

हकीकत में भवनों की संख्या दो लाख से कहीं ज्यादा है

हजारों भवन ऐसे हैं, जिनके भवन स्वामी हाउस टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं

कुछ भवन ऐसे हैं, जिनका टैक्स भवनों के एरिया के हिसाब से काफी कम है

शहर में कौन से भूखंड खाली हैं। किस वार्ड और एरिया में मौजूद हैं। उनका क्षेत्रफल क्या है। वर्तमान स्थिति क्या है। ये सब कुछ अब नए सिरे से और पूरे वास्तविक आंकड़ों के साथ सामने होगा।

जीआईएस मैपिंग के बाद शहर जीआईएस सिस्टम से जुड़ जाएगा।

इसे कहीं से भी आपरेट किया जा सकेगा।

वेबसाइट के जरिये कम्प्यूटर पर व मोबाइल पर भी इसे देखा जा सकेगा।

जीआईएस मैपिंग का फायदा

जमीन की खरीद फरोख्त में धोखाधड़ी नहीं हो सकेगी

डेवलपमेंट वर्क में संबंधित विभाग व ठेकेदार मनमानी नहीं कर सकेंगे।

किसी भी व्यक्ति के मकान का गलत टैक्स नहीं लगेगा।

शहर को स्मार्ट बनाने के लिए जीआईएस मैपिंग बहुत जरूरी है। शहर का भौगोलिक मैप सामने होगा, तो डेवलपमेंट वर्क आसानी से कराया जा सकेगा। धोखाधड़ी का कोई चांस नहीं होगा। जीआईएस सर्वे से केवल हाउस टैक्स बढ़ेगा ऐसा बिल्कुल नहीं है। सर्वे का प्लान किया जा रहा है।

-पीके मिश्रा

मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, नगर निगम


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