क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रिम्स इन दिन मधुमक्खियों का डेरा बना हुआ है. हॉस्पिटल के कई वार्ड की खिड़कियों पर मधुमक्खियों का छत्ता बन चुका है. ऐसे में यहां इलाज करा रहे मरीज खौफ के साये में हैं. इन्हें डर इस बात का है कि कहीं छत्ते से निकलकर मधुमक्खियों ने हमला किया तो जान बचानी भी मुश्किल पड़ जाएगी. ऐसे में अपने इलाज को लेकर जितना सतर्क हैं, उतनी ही पैनी नजर मधुमक्खियों के छत्ते पर भी रख रहे हैं, ताकि किसी तरह की अनहोनी नहीं हो.

नहीं खोलते हैं खिड़की

जिन वार्ड की खिड़कियों पर मधुमक्खियों का बसेरा है, उसे खोलने की जहमत मरीज नहीं उठा पा रहे हैं. ऐसे में वार्ड की खिड़कियां अक्सर बंद रहती है. ऐसा नहीं है कि मरीज अथवा उनके परिजनों ने मधुमक्खियों के छत्ते के होने की जानकारी रिम्स एडमिनिस्ट्रेशन को नहीं दी है, लेकिन उसे सुरक्षित हटाने के लिए अबतक कोई पहल नहीं की गई है.

अटका है बिल्डिंग मेंटनेंस का काम

मधुमक्खियों के छत्ते हर वार्ड की खिड़कियों के बाहर है. हॉस्पिटल में शायद ही ऐसी खिड़की नहीं है, जहां मधुमक्खियों का डेरा नहीं है. इस वजह से मरीज खौफ में रह रहे हैं. इस वजह से हास्पिटल में मेंटेनेंस का काम भी इस अटका पड़ा है. कोई भी मधुमक्खियों के छत्ते में हाथ डालना नहीं चाह रहा है. ऐसे में कई जगह बिल्डिंग के छज्जे भी गिर रहे हैं. अगर ये छज्जे मधुमक्खियों के छत्ते पर गिरता है तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है.

पेस्ट कंट्रोल पर खर्च करने से बच रहा हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन

हॉस्पिटल में मच्छर, कॉकरोच और चूहों से निपटने के लिए लाखों रुपए खर्च किए जाते है. वहीं मधुमक्खियों को हटाने के लिए भी अधिकारियों ने पेस्ट कंट्रोल डिपार्टमेंट से बात की थी, लेकिन उन्होंने इसके लिए स्पेशल सूट की व्यवस्था करने को कहा. ऐसे में प्रबंधन ने खर्च करने से अपने हाथ खींच लिए. ऐसे में मधुमक्खियों के छत्ते नहीं हटाए जा सके हैं.