महर्षि यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. बंसल के विवाद पर वीसी ने की आईनेक्स्ट से विशेष बातचीत

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ALLAHABAD: डॉ. एके बंसल हत्याकांड का कारण तलाशने में जुटी पुलिस उनके महर्षि यूनिवर्सिटी के साथ चल रहे विवाद के एंगिल पर भी काम कर रही है. यूनिवर्सिटी से विवाद को लेकर आ रही खबरों के बीच महर्षि यूनिवर्सिटी लखनऊ के वीसी पीके भारती ने दो टूक कहा है कि डॉ बंसल मर्डर केस को यूनिवर्सिटी विवाद से जोड़ना गलत है. उन्होंने पूरे प्रकरण को आईनेक्स्ट के साथ शेयर करते हुए डॉ. बंसल की मौत पर संवेदना जतायी.

डेढ़ साल पहले हटाए गए बंसल

वीसी ने बताया कि फिलहाल यूनिवर्सिटी का डॉ. बंसल से कोई लेना देना नहीं है. वह एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के तहत यूनिवर्सिटी से जुड़े थे, लेकिन वह मेमोरेंडम करीब डेढ़ साल पहले ही खत्म हो गया था. मेमोरेंडम के तहत जिन बातों पर करार हुआ था. डॉ. बंसल उस पर अमल न करते हुए कुछ गलत कार्य करने लगे थे. इस बात को जानने के बाद एमओयू में शामिल अन्य मेंबर्स ने एकमत से उन्हें बाहर कर कोर्ट में दस्तावेज पेश कर दिया था. इस पर कोर्ट से यूनिवर्सिटी के पक्ष में डिग्री मिल गयी थी.

अंधेरे में रखकर की मुलाकात

वीसी ने बताया कि डॉक्टर बंसल गलत दस्तावेजों के जरिए यूनिवर्सिटी में अपना हक जताने का प्रयत्‍‌न कर रहे थे. वह घटना से दो दिन पूर्व लखनऊ आए थे. मुझे अंधेरे में रखकर थाने पर बुलवाया गया. पुलिस ने बताया था कि एसएसपी मिलना चाहते हैं. लेकिन थाने पहुंचने पर डॉ बंसल मौजूद मिले. उनके साथ एक पूर्व आईपीएस अफसर भी थे जो यूनिवर्सिटी विवाद पर काफी कुछ बोल रहे थे.

17 फरवरी को कोर्ट की तारीख

वीसी पीके भारती का कहना है कि डॉ. एके बंसल का विवाद यूनिवर्सिटी नहीं बल्कि सोसाइटी को लेकर चल रहा है. कोर्ट में भी मामला विचाराधीन है. उनके पक्ष में कोई डिग्री नहीं हुई थी, पहले से ही स्टे लगा है. युनिवर्सिटी से जुड़े सारे दस्तावेज पुलिस के समक्ष पेश किए जा चुके हैं. डॉ. बंसल के पक्ष में कुछ नहीं है. वह कोर्ट के आदेश की बात करते थे लेकिन दस्तावेज मांगने पर हीलाहवाली करते थे. अगर कोई आदेश उनके पक्ष में होता तो प्रदेश सरकार उनकी क्यों न मदद करती. विवाद की जांच एक आईएस अधिकारी को सौंपी गयी है. डॉ बंसल जिस बैंक के कागजात की बात करते थे उसे कभी उन्होंने जमा नहीं किया. जबकि यूनिवर्सिटी ने सारे दस्तावेज जमा कर दिए हैं.