24 जिलों में सामने आई गड़बडि़यां

97 स्कूलों के जियो मैपिंग ही गलत भेज दी

06 स्कूलों के नामों में ही पाई गड़बड़ी

- 35 हजार स्टूडेंट्स लगभग हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में हैं पंजीकृत

- बोर्ड परीक्षा का सेंटर बनाने के लिए अपनाये जा रहे हैं हथकंडे

- कई जिलों में डीआईओएस लेवल पर सामने आई खामियां

- निर्धारित स्कूलों की संख्या से कम स्कूलों की सूची भेजी

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LUCKNOW :

एक ओर जहां प्रदेश सरकार नकल माफिया पर अंकुश लगाने की पूरी कवायद कर रही है, लेकिन विभाग के अधिकारी इस पर पलीता लगा रहे हैं. जिसके चलते यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड एग्जाम को सेंटर बनाने के लिए चल रही ऑनलाइन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बडि़या सामने आ रही हैं. ताजा मामले नकल के लिए कुख्यात दो दर्जन से अधिक जिलों में सामने आये हैं. जहां पर करीब सौ स्कूलों की जानकारी ऑनलाइन सेंटर प्रक्रिया बनाने में भेजी ही नहीं गई. आशंका जताई जा रही है कि यह पूरा खेल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मिलीभगत से किया गया है. माध्यमिक शिक्षक संघ का कहना है कि नकल माफिया और शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी सांठगांठ कर पसंदीदा स्कूलों में सेंटर बनाने के लिए यह खेल किया है. माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इन सभी जिलों को दोबारा से स्कूलों की पूरी डिटेल और जियो मैपिंग करके भेजने को कहा है.

97 स्कूलों की नहीं भेजी जियो मैपिंग रिपोर्ट

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के विभिन्न जिलों को भेजे गए ऑर्डर में इन स्कूलों का दोबारा से जियो मैपिंग मांगी है. इन जिलों में नकल के लिए कुख्यात कौशाम्बी, हरदोई, बलिया, बाराबंकी और सीतापुर जैसे जिले शामिल हैं. यहां के डीआईओएस ने 97 स्कूलों के जियो मैपिंग ही गलत भेज दी. वहीं आधा दर्जन स्कूलों के नामों में ही गड़बड़ी पाई गई है. इन सभी स्कूलों में करीब 35 हजार के आसपास स्टूडेंट्स हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड एग्जाम देने के लिए पंजीकृत हैं. परिषद के सूत्रों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बोर्ड जल्दबाजी में इन स्कूलों का सेंटर पते के आधार पर उसी क्षेत्र के किसी भी स्कूलों में बना दें. जिससे नकल माफिया अपने मंसूबों में कामयाब हो सकें.

सेंटर प्रक्रिया पर लगाई रोक

मामले खुलने पर बोर्ड की ओर से इन दो दर्जन जिलों में बोर्ड एग्जाम के लिए सेंटर बनाने की प्रक्रिया को रोक दिया है. इससे पहले बोर्ड ने राजधानी में सेंटर बनाने की प्रक्रिया को भी रोक दिया था. राजधानी में सेंटर बनाने के लिए कई स्कूलों के जियो मैंपिंग में खेल किया गया था. स्कूलों की दूर निर्धारित दूरी से अधिक बता दिया गया था. जिसका खुलासा होने के बाद बोर्ड ने राजधानी में सेंटर बनाने की प्रक्रिया को रोक दिया था.

डीआईओएस को माना दोषी

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस खेल में इन जिलों के डीआईओएस को पूरी तरह से दोषी ठहराया है. बोर्ड का कहना है कि ऑनलाइन डाटा भेजने के लिए जियो लोकेशन जरूरी था. इसके बाद भी डीआईओएस ने बिना जांच किए ऐसे स्कूलों की लिस्ट क्यों अपलोड कर दी, जिनकी जियो लोकेशन तक नहीं भरी गई थी.

यह सभी जिले नकल कराने के लिए कुख्यात हैं. इन जिलों के हर स्कूल पर बोर्ड की विशेष नजर है. डीआईओएस लेवल पर यह गड़बड़ी की गई हैं. सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, साथ ही इन स्कूलों के जियो लोकेशन दोबारा से देने को कहा गया है.

- नीना श्रीवास्तव, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद