- अपने जन्मदिन पर मायावती ने तीन राज्यों में किसानों की कर्ज माफी को लेकर कांग्रेस को घेरा

- कहा, मतभेद और स्वार्थ को दरकिनार कर गठबंधन प्रत्याशी को जिताएं

- आरएसएस के बहाने खेला मुस्लिम कार्ड, मांगा अलग आरक्षण

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LUCKNOW : लोकसभा चुनाव की आहट के बीच मंगलवार को बसपा सुप्रीमो मायावती अपने 63वें जन्मदिन पर आत्मविश्वास और उत्साह से लबरेज दिखीं. उन्होंने राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में किसानों की कर्ज माफी के मुद्दे पर कांगे्रस पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए नसीहत दी कि उसे बीजेपी की तरह जुमलेबाजी से बचना चाहिए वरना ज्यादा दिनों तक दाल नहीं गलने वाली है. कार्यकर्ताओं को नसीहत दी कि सारे पुराने मतभेद और निजी स्वार्थ को भुलाकर गठबंधन के प्रत्याशियों को जिताने में जुट जाएं. जुमे की नमाज का जिक्र कर मुस्लिम कार्ड खेलते हुए कहा कि गरीब मुसलमानों को अलग से आरक्षण दिया जाना चाहिए. साथ ही रक्षा सौदों के लिए दीर्घ कालिक नीति बनाने को जरूरी बताते हुए राफेल और बोफोर्स घोटाले पर भाजपा-कांग्रेस पर तंज भी कसा. इस अवसर पर मायावती ने अपनी किताब 'ब्लू बुक-मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा' का विमोचन भी किया.

किसानों को फायदा नहीं
मायावती ने कहा कि तीन राज्यों में बनी कांग्रेस सरकारों की कर्जमाफी योजना पर उंगलियां उठ रही हैं. उन्होंने सवाल किया कि कर्जमाफी सीमा 31 मार्च 2018 क्यों निर्धारित की जबकि सरकार 17 दिसंबर 2018 को चुनी गयी. सिर्फ दो लाख रुपये के कर्ज माफ करने की घोषणा हुई है. इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा. वहीं किसानों को लुभाने के नजरिए से कहा कि देश के सारे किसानों का पूरा कर्जमाफ किया जाना चाहिए और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को पूरी ईमानदारी से लागू किया जाए. किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए वरना आत्महत्याएं होती रहेंगी. किसान 70 फीसद कर्ज साहूकारों से ही लेते हैं और इसे माफ करने की अभी कोई नीति नहीं है. उन्होंने भूमिहीन किसानों व मजदूरों के कर्ज माफ करने की पैरोकारी भी की.

बीजेपी की नींद उड़ी
मायावती ने कहा कि यूपी में हमारी पार्टी ने सपा के साथ गठबंधन करके यह चुनाव लड़ने का फैसला लिया है जिससे अब विशेषकर बीजेपी व अन्य विरोधी पार्टियों की भी नींद उड़ी हुई है. यूपी तय करता है कि केंद्र में किसकी सरकार बनेगी व कौन देश का प्रधानमंत्री बनेगा. गठबंधन को कामयाब बनाने के लिए उन्होंने बीएसपी व सपा के लोगों से अपील करी कि वे इस चुनाव में अपने पुराने सभी गिले-शिकवे भुलाकर और अपने निजी स्वार्थो को भी किनारे करके गठबंधन के सभी प्रत्याशियों को जिताएं तो यह मेरे जन्मदिन का कीमती तोहफा होगा. आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग अपने विरोधियों के विरुद्ध सीबीआई व अन्य जांच एजेंसियों एवं संस्थानों आदि का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिसका ताजा उदाहरण सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का है जो निंदनीय होने के साथ दुर्भाग्यपूर्ण भी है.

गरीब मुस्लिमों को मिले अलग आरक्षण
लोकसभा चुनाव निकट है तो मायावती ने मुस्लिमों को रिझाने का मौका भी न छोड़ा. गरीब सवर्णो को दस प्रतिशत आरक्षण देने का स्वागत करने के साथ ही मुस्लिमों को आर्थिक आधार पर अलग से आरक्षण की वकालत भी की. उन्होंने कहा कि आजादी के समय सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों की संख्या 33 फीसद थी जो अब केवल दो-तीन फीसदी ही रह गयी है. देश में पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दलित व मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा पीडि़त है और इनका हित कांग्रेस और भाजपा की सरकारों में न पहले सुरक्षित रहा है और न आगे रहने वाला है. मुसलमानों को जुमे की नमाज पढ़ने से रोकने को अनुचित बताते हुए कहा कि भाजपा के लोग अब देवी-देवताओं की जाति भी बताने लगे हैं.