- सुबह तड़के ही प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा पहुंच गए डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल

- बोले- व्यवस्थाएं सुधारो, 15 दिन बाद फिर आकर देखूंगा

बरेली : यह अस्पताल है कोई सराय नहीं है. व्यवस्थाओं में सुधार करो, 15 दिन बाद फिर आकर देखूंगा. यह हिदायत जिले के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने थर्सडे को अस्पताल का निरीक्षण करने के दौरान अस्पताल के अफसरों को दी. वहीं हॉस्पिटल के बच्चा वार्ड में बिना एप्रेन पहने डॉक्टर को देखा तो बिफर पड़े, अफसरों को डॉक्टर का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए. करीब 50 मिनट तक वह डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में रुके. इस दौरान इमरजेंसी, बच्चा वार्ड, ओपीडी में जाकर मरीजों और तीमारदारों से हॉस्पिटल में इलाज और व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली.

टूटा डस्टबिन देख बिफरे

जिले के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा थर्सडे सुबह आठ बजे डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल पहुंचे. इमरजेंसी के बाहर टूटा कूड़ादान और उससे नीचे बिखरा कूड़ा देखकर बिगड़ गए. नाराजगी जताते हुए उसे तुरंत हटाने के निर्देश दिए. इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर को की जाने वाली कॉल के बारे में पूछा. मरीजों का हाल जाना और उन्हें फल वितरित किए. इमरजेंसी के बाहर गंदा पानी बहता देख उसे ठीक करवाने को कहा. ब्लड बैंक को सरसरी निगाह से देखकर आगे बढ़ गए.

आरओ से पीया पानी

ओपीडी में पहुंचकर मरीजों के पर्चे देखकर उनसे हाल पूछा. रजिस्ट्रेशन काउंटर के बारे में जानकारी ली. रजिस्ट्रेशन काउंटर के बराबर में लगे आरओ प्लांट को देखा. उसमें लगी दो टंकियों से खुद पानी पीकर पूछा इनमें ठंडा कौन सा है. पता चला कि पानी ठंडा करने की मशीन ठीक नहीं है. प्रभारी मंत्री ने पानी की गुणवत्ता खराब बताई. प्लांट की मरम्मत के बारे में पूछा तो एडीएसआइसी डॉ. टीएस आर्या ने 15 दिन पहले आरओ की मरम्मत कराई गई थी. प्रभारी मंत्री ने डीएम, सीएमओ को जांच कराने के निर्देश दिए. निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री के साथ मेयर उमेश गौतम, विधायक डीसी वर्मा, बहोरन लाल मौर्य, डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह, सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला, एडीएसआइसी डॉ. टीएस आर्या समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे.

पूछे वार्ड में जाने के मानक

बच्चा वार्ड के बाहर खराब सड़क व सीवर के डिप ठीक नहीं होने पर भी नाराज हुए. सड़क कब बनाई गई यह भी चेक कराने को बोले. बच्चा वार्ड के बाहर रुककर नर्स से अंदर आने के मानक पूछे. भर्ती बच्चों को इंफेक्शन से बचाने को मानक सख्ती से लागू करने को कहा. भर्ती बच्चों की संख्या पूछी तो सिस्टर इंचार्ज ने 16 बताया. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्मेद्र के एप्रेन नहीं पहने होने पर नाराज हुए. इस पर डीएम ने उनका स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए. अस्पताल में हर जगह वाहन खड़े होने पर भी नाराज हुए. अफसरों से बोले, यह कोई सराय नहीं व्यवस्था सुधारे. उन्होंने 15 दिन बाद दोबारा आकर निरीक्षण करने की बात कही.

वर्क कल्चर बदलने की है मंशा

इस दौरान प्रभारी मंत्री ने कहा फिलहाल मंशा अस्पताल को व्यवस्थित करना, वर्क कल्चर बदलना और सोच को बदलना है.

मरीजों से अच्छा व्यवहार करें डॉक्टर

बच्चा वार्ड में एडमिट 10 माह के करन के पिता छत्रपाल ने बताया कि बेटे को दवा का रिएक्शन हो गया है. रात को भर्ती कराने के बाद भी इलाज नहीं मिल रहा. प्रभारी मंत्री ने पूछा तो डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में स्किन स्पेशिलिस्ट तीन दिन बैठते हैं, आज उन्हें दिखाया जाएगा. इस पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि डॉक्टर मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करें. लोग डॉक्टर को भगवान मानते हैं. उनकी अच्छी बात से ही मरीज आधे ठीक हो जाते हैं.

सुरक्षा गार्ड की जरूरत बताई

बच्चा वार्ड की इंचार्ज डेजी लाल ने प्रभारी मंत्री के आगे सुरक्षा गार्ड नहीं होने की बात उठाई. उन्होंने कहा कि दरवाजा बंद रखना पड़ता है. इस पर प्रभारी मंत्री ने डीएम से समीक्षा करने को कहा.

एनआरसी में बोले, ईनाम दिलवाऊंगा

प्रभारी मंत्री ने पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) का भी निरीक्षण किया. वहां की व्यवस्थाएं देखकर वह काफी खुश हुए. डाइटीशियन डॉ. रोजी व अन्य स्टाफ से बच्चों के इलाज की जानकारी ली. सही होकर गए अति कुपोषित बच्चों की एलबम भी देखी. इस पर उन्होने कहा कि एनआरसी को प्रदेश स्तर पर ईनाम दिलवाऊंगा.

पहली बार कराई माइकिंग

प्रभारी मंत्री के निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल में पहली बार माइकिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता मिला. रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगे सिस्टम से लोगों को परिसर में गंदगी नहीं फैलाने की अपील होती सुनाई दी.