-प्रत्येक नदी को अब माना जाएगा एक इकाई, पहले जिला होते थे इकाई

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PATNA: प्रदेश सरकार ने नई बालू खनन नीति को मंजूरी दे दी है. नई नीति के प्रभावी होने पर किसी एक व्यक्ति को अधिकतम दो घाट या फिर दो सौ हेक्टेयर तक बालू निकासी का ठेका दिया जा सकेगा. प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल ने सहमति दे दी है. मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 19 प्रस्ताव मंजूर किए गए. बैठक में सिपाही के पदों पर बहाली के लिए पूर्व के प्रावधानों में कतिपय संशोधन को भी मंजूरी दी गई.

लोगों को मिलेगा रोजगार

बैठक के बाद कैबिनेट के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि नदियों में सही प्रकार से बालू खनन हो इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कुछ दिशा निर्देश दिए थे. जिन्हें प्रभावी बनाने के लिए बिहार बालू खनन नीति 2019 को मंजूरी दी गई है. उन्होंने बताया कि अब तक एक व्यक्ति को कई घाट की बंदोबस्ती दे दी जाती थी. इन घाटों से संबंधित व्यक्ति कितनी बालू की निकासी करेगा इसके कोई नियम नहीं थे. नई नीति के प्रभावी होने पर एक बंदोबस्तधारी को अधिकतम दो घाट या फिर दो सौ हेक्टेयर तक बालू निकासी का ठेका दिया जा सकेगा. पूर्व में प्रावधान था कि जिला को एक इकाई मानकर नदी घाटों की बंदोबस्ती होती थी. नई नीति में प्रत्येक नदी को एक इकाई मान कर उनकी बंदोबस्ती होगी. इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ ही बंदोबस्तधारियों की संख्या में बढ़ोत्तरी भी होगी और उन्हें ढ़ंग से नियोजित भी किया जा सकेगा.

सिपाही बहाली में खिलाडि़यों को आरक्षण

कैबिनेट के प्रधान सचिव ने बताया कि मंत्रिमंडल ने प्रदेश में सिपाही नियुक्ति के पूर्व के नियम में मामूली बदलाव करते हुए सिपाही बहाली में खिलाडि़यों के लिए एक प्रतिशत पद आरक्षित कर दिए हैं.