1. राइटर सत्यजीत रे का जन्म 2 मई साल 1921 में कोलकाता में हुआ। सत्यजीत रे को बचपन से ही अपने आसपास का माहौल लेखकों वाला मिला। उनके पिता सुकुमार रे एक लेखक थे जबकि दादा उपेंद्र रे एक वैज्ञानिक थे।

2. सत्यजीत रे ने अपनी ग्रैजुएशन तक की पढा़ई कोलकाता के एक कॉलेज से पूरी की। इसके बाद सत्यजीत अपनी मां के कहने पर रवींद्र नाथ टैगोर के शांति निकेतन में जाने लगे। यहां सत्यजीत ने करीब दो साल बिताने के बाद वापस कोलकाता जाने का मन बना लिया।

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सत्यजीत रे ने अपने जीवन की पहली नौकरी साल 1943 में ब्रिटिश एडवरटाइजमेंट कंपनी में की जहां उन्हें 18 रुपये प्रति महीना वेतन मिलता था। इस दौरान मौका लगते ही सत्यजीत एक पब्लिशिंग हाऊस सिगनेट प्रेस से जुडे़ जिसके मालिक थे डीके गुप्ता और उनके यहां काम करने लगे।

4. सिगनेट पब्लिशिंग हाऊस में बतौर कवर डिजाइनर काम करते-करते सत्यजीत रे ने जवाहर लाल नेहरू की लिखी एक बुक का भी कवर डिजाइन किया जिसका नाम था ङिस्कवरी ऑफ इंडिया। वहां काम करते हुए उनकी मुलाकात एक फ्रांसीसी निर्देशक से हुई जो शूटिंग के लिए लोकेशन ढूंढ रहे थे। सत्यजीत को इस निर्देशक ने फिल्म बनाने का पहला मौका दिया।
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5. कहते हैं इनके साथ काम करते हुए सत्यजीत के को विदेश जाने का मौका मिला जहां उन्होंने 100 से भी ज्यादा इंग्लिश फिल्में देख डालीं पर एक फिल्म ऐसी थी जिसने उन्हें फिल्म मेकर बनने के लिए मोटीवेट किया था जिसका नाम था बाइसाईकिल थीफस।

6. खबरों के मुताबिक फिर जब सत्यजीत रे भारत वापस लौटे तो साहित्यकार विभूति भूषण बंधोपाध्याय के उपन्यास विलडंगसरोमन को उन्होंने काफी पसंद किया और उन्हें ये उपन्यास इतना पसंद आया कि उसी वक्त उन्होंने इस पर फिल्म बनाने का निश्चय कर लिया था। इस फिल्म का नाम था पथेर पांचाली।

7. बता दें कि सत्यजीत की सबसे पहली रंगीन फिल्म महानगर साल 1963 में रिलीज की गई थी। इस फिल्म के बारे में एक बात बहुत कम ही लोग जानते हैं कि इस फिल्म से अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बहादुरी ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी।

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इस फिल्म के बाद दो सत्यजीत रे को आसमान की ऊंचाईयां छूने से कोई भी रोक न सका और एक बाद एक लगातार उन्होंने कई हिट फिल्में दीं। नायक, गूपी गायन बाघा बायन, शतरंज के खिलाडी़ और घरे बाइरे जैसी कई फिल्में दीं। सत्यजीत की इन फिल्मों ने सिनेमाई जगत में एक नई क्रांति ला दी थी।
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9. इस तरह उन्हें एक बाद एक सफलता हासिल होती गई और साल 1985 में उन्हें हिंदी फिल्म जगत का सबसे बडा़ माने जाने वाला अवॉर्ड दादा साहेब फाल्के से नवाजा गया। बाद में उन्हें भारत रत्न की उपाधि भी मिली। उनको साल 1992 में ऑस्कर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। मालूम हो कि उन्होंने अपने फिल्मी करियर में लगभग 37 फिल्में बनाई जिन्होंने हिंदी सिनेमा को आगे बढा़ने में विशेष योगदान दिया है।

10. फिल्म जगत को अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले राइटर सत्यजीत रे ने 23 अप्रैल साल 1992 में कोलकाता में दुनिया को अलविदा कह दिया। आज भले ही वो इस दुनिया में न हों पर उनकी फिल्में उनकी याद हमेशा दिलाती रहेंगी।

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