प्रयागराज (ब्यूरो)। रेलमंत्री ने गुरुवार को दिन में घोषणा की और शाम को रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया. इसका फायदा ट्रेन एक्सीडेंट में नुकसान उठाने वाले पैसेंजर्स से लेकर ट्रेन में माल डैमेज या गायब होने के बाद लखनऊ और गोरखपुर का चक्कर लगाने पर मजबूर पैसेंजर्स को होगा. रेलवे के अफसरों और कर्मचारियों को भी इन शहरों का चक्कर लगाने से मुक्ति मिल जाएगी.

तीन बड़े मंडलों का मुख्यालय है इलाहाबाद

बता दें कि उत्तर मध्य रेलवे का मुख्यालय इलाहाबाद में है. इसकी टेरेटरी में तीन बड़े मंडल भी आते हैं. एनसीआर की टेरेटरी राजधानी दिल्ली की सरहद तक है. इस एरिया से प्रतिदिन हजारों ट्रेनें पास होती हैं. इसके बाद भी इसकी टेरेटरी में कोई क्लेम ट्रिब्यूनल नहीं था. इसके चलते अक्सर अधिकारियों को लखनऊ और गोरखपुर तक जाना पड़ जाता था. एनसीआर की टेरेटरी में होने वाले एक्सीडेंट के शिकार पैसेंजर्स के आश्रितों को भी चक्कर लगाना पड़ता था. इससे दोनों का काफी टाइम वेस्ट होता था. इसी के चलते इलाहाबाद में क्लेम ट्रिब्यूनल की बेंच स्थापित करने की मांग लम्बे समय से की जा रही थी.

जीएन ने रेलवे बोर्ड तक पहुंचायी थी बात

इस मुद्दे को लेकर जीएम एनसीआर राजीव चौधरी सीरियस थे. उन्होंने रेलवे बोर्ड की मिटिंग तक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था. गत माह एनसीआर के प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक महेंद्र नाथ ओझा ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष जस्टिस अहलूवालिया से दिल्ली में भेंट कर एनसीआर के प्रस्ताव पर चर्चा की थी. इसे सीरियसली लेते हुए रेलवे मिनिस्टर ने गुरुवार को मुंबई में इलाहाबाद में क्लेम ट्रिब्यूनल के स्थापना की घोषणा की थी. देर शाम इसका नोटिफिकेशन भी जारी हो गया.

क्या है बेंच बनाने की प्रक्रिया

- सबंधित जोन की ओर से कारण के साथ प्रस्ताव रेलवे मिनिस्ट्री को भेजा जाता है

- नई बेंच की स्थापना का अधिकार रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के चेयरमैन को होता है

- चेयरमैन के ओके करने के बाद रेल मंत्रालय नोटिफिकेशन जारी करता है

- पब्लिक को क्या होगा फायदा

- क्लेम बेंच खुल जाने से एनसीआर की टेरेटरी के सभी मामले इलाहाबाद में सुने जाएंगे

- रेल दुर्घटनाओं के शिकार पैसेंजर्स के परिजनों को लखनऊ एवं गोरखपुर नहीं जाना होगा

- गुड्स क्लेम के मामलों में व्यापारियों को होगा फायदा, बचेगा समय

- रेलवे के अफसर-कर्मचारियों की भी कम हो जाएगी भाग दौड़

'तीन बड़े मंडल और बड़ा रेलवे जोन होने के बावजूद एनसीआर के क्षेत्राधिकार में कोई क्लेम ट्रिब्यूनल की बेंच नहीं थी. यहां के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अक्सर लखनऊ, गोरखपुर जाना पड़ता था. उससे भी ज्यादा परेशानी उन गरीब प्रार्थियों को होती थी जो प्रयागराज एवं आस-पास के निवासी हैं.'

- अमित मालवीय, पीआरओ, एनसीआर

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