सीन-1 : समय 2.45 बजे. पटना जंक्शन गोलंबर से एंट्री प्वाइंट : यहां 'मे आई हेल्प यू' के केबिन में दो पुलिस बैठकर आपस में गप कर रहे हैं. केबिन के बाहर चार-पांच पुलिस गोलाकार में खड़े हैं. वे भी एक-दूसरे का सुख-दुख जानने में लगे हैं. यहां आने-जाने वाले लोगों से उन्हें कोई मतलब नहीं है. यदि यहां कोई घटना होती है, तो मे आई हेल्प यू को ही हेल्प की जरूरत होती.

सीन -2 : समय 2.13 बजे. पटना जंक्शन पार्किंग प्लेस : यहां आठ-दस पुलिस वाले मेटल डिटेक्टर लेकर खड़े हैं. पहले तो वे ऐसे ही गाडिय़ों को जाने देते हैं, पर जैसे ही मीडिया वालों को देखते हैं और जांच करना शुरू कर देते हैं. जांच के दौरान कई वीआईपी गाडिय़ां आती हैं, पुलिस वाले उसे हाथ तक नहीं लगाते. 5-10 गाडिय़ों के बाद यह सिलसिला भी खत्म हो जाता है.

सीन -3 : समय 2.21 बजे. प्लेटफॉर्म नंबर-1 : सुबह 10 बजे एंट्री गेट पर कुछ भी नहीं है. करीब 1 बजे के बाद यहां दो गेट पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए. उसके बाद भी दो गेट खाली थे. यहां दर्जन भर पुलिस वाले थे. पुलिस वाले दो पार्ट में थे. एक पार्ट के पुलिसकर्मी खड़े होकर गप कर रहे थे, तो दूसरे वाले वहीं बैठकर आराम फरमा रहे थे. इतने पुलिस वालों के होने के बाद हर कोई आराम से आ-जा रहा था.

सीन -4 : समय 2.43 बजे. महावीर मंदिर : यहां पूरे मंदिर की सिक्योरिटी एक जवान के भरोसे है. वह जवान कुछ लोगों के साथ बैठकर खैनी खाने में मशगूल है. उसे इस बात से कोई लेना-देना नहीं कि आतंकवादियों ने मंदिर को उड़ाने की धमकी दी है. साथ ही संडे को बोध गया में सीरियल ब्लास्ट हुआ और हाई अलर्ट जारी किया गया है. सवाल यह उठता है कि हाई अलर्ट में ऐसे सुस्त रहते हैं जवान?

सीन -5 : समय 3.05 बजे. बुद्धा स्मृति पार्क : पार्क के पास सुबह 10 बजे तक पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं थी. यहां भी दोपहर एक बजे के बाद पुलिस की तैनाती की गई. पुलिस एक टवेरा गाड़ी गेट के बाहर खड़ी है. बुद्धा स्मृति पार्क के रेगुलर सिक्योरिटी गार्ड पुलिस को देखकर मुस्तैद हो जाते हैं, लेकिन यहां भी पुरानी कहानी सभी पुलिस गोलाकार घेरा बनाकर बात करने में मशगूल हैं.

हाई अलर्ट नहीं, हाल पूछने का मौका

पटना जंक्शन का प्लेटफॉर्म हो या गोलंबर से एंट्री प्वाइंट सभी जगह पुलिस पूरी तरह से सुस्त दिखी. उन्हें देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि स्टेट में आतंकवादी हमला हुआ है. उन्हें तो जैसे बिछड़े हुए दोस्तों से मिलने का मौका दिया था इस अलर्ट ने. वे सिक्योरिटी पर ध्यान देने की बजाय आपस में गप करने में लगे थे. वे एक-दूसरे का हाल पूछ रहे थे. यदि वाकई में उस टाइम इन जगहों पर कोई अटैक होता, तो पुलिस वाले खुद तो जान गंवाते ही साथ में कई और की जान जाती.

Voices of Patna

जंक्शन की सिक्योरिटी राम भरोसे है. हमारी पुलिस सिर्फ बाइक वाले को पकड़ सकती है, क्योंकि उनसे जेब गर्म होती है. दूसरे शहरों में जंक्शन के एंटी डिटेक्टर पहले से लगे होते हैं, जबकि यहां घटना घटने के बाद लगाया जाता है.

अभिमन्यु, कंकड़बाग

हाय-तौबा मचाने से कुछ नहीं होने वाला है. जिन्हें जो करना है वे कर रहे हैं. हम आप सिर्फ बात कर सकते हैं. सिक्योरिटी की व्यवस्था तो की जाती है, लेकिन उसमें हमारे-आपके जैसे लोग होते हैं, जो लापरवाही बरतते हैं तो उनका क्या किया जा सकता है?

अजीत कुमार, पटना साइंस कॉलेज

मैं यहां मंदिर में दर्शन के लिए आया हूं. मुझे तो ऐसा नहीं लगा किया हाई अलर्ट जारी किया गया है. यदि ऐसा तो पुलिस इतनी सुस्त क्यों है? महावीर मंदिर में सिर्फ एक गार्ड ही क्यों है? ऐसे में कुछ हुआ तो भगवान खुद के साथ हमें भी बचाए.

विकास कुमार, बाजार समिति

आतंकवादियों ने दिखा दिया है कि वे जो चाहे कर सकते हैं. पेंटागन से हमारे संसद तक पर वे हमला कर चुके हैं. वैसे मोस्ट सिक्योरिटी जोन वाले एरिया को बचान नहीं पाए, तो इस टुटपुजिए पुलिस से पटना जंक्शन व महावीर मंदिर को बचा लेंगे क्या?

संतन कुमार, बाजार समिति