- बारिश के दौरान टैप नाले खोले जाने से नालों के जरिए गंगा में सीवेज भी सीधे गंगा में जा रहा

- 37 करोड़ रुपए से 6 करोड़ लीटर सीवेज नालों में गिरने से रोका जाना था, 7 महीने से लटका है प्रोजेक्ट

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KANPUR : बारिश के बहाने टैप नालों के जरिए 6 करोड़ लीटर सीवेज सीधे गंगा में बहाया जा रहा है. शहर में रोक के बाद भी बारिश में जब टैप नालों मुंह खोल दिए जाते हैं जो इनके जरिए सीवेज भी सीधे गंगा में चला जाता है. जबकि एनजीटी के सख्त निर्देश हैं कि गंगा में सीवेज किसी भी हाल में नहीं गिरना चाहिए. इसको देखते हुए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने नालों में सीवेज को रोकने के लिए 37 करोड़ की योजना बनाई थी. लेकिन 7 महीने बाद भी यह प्रोजेक्ट शासन में लटका है.

12 किमी. सीवेज लाइ बिछाई जानी

गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर घनश्याम द्विवेदी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में 12 किमी. सीवेज लाइन बिछाई जानी थी, इसमें 43 एमएलडी का एसटीपी भी जाजमऊ में प्रस्तावित है. लाइनों के जरिए सीवेज सीधे एसटीपी तक पहुंच कर ट्रीट किया जाएगा. इससे नालों में गिरने वाले सीवेज को रोक दिया जाएगा. फिलहाल प्रोजेक्ट अभी शासन में पेंडिंग है. इस योजना के पूरा होने के बाद नालों में ओवरफ्लो की समस्या खत्म हो जाएगी. सीसामऊ, परमट, म्योरमिल नाला में ओवरफ्लो की प्राब्लम ज्यादा है. कार्य पूरा होने के बाद टैप नालों में 6 करोड़ लीटर सीवेज का फ्लो बंद हो जाएगा.

ट्रीट पानी का सिंचाई में प्रयोग होगा

नालों में सीवेज के पानी को गिरने से रोकने के लिए वाजिदपुर में एक पंपिंग स्टेशन का कंस्ट्रक्शन भी प्रपोज्ड है. गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर के मुताबिक एसटीपी में ट्रीट पानी का सिंचाई में प्रयोग होगा. शासन से इस प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है, लेकिन अभी बजट पर मुहर नहीं लगी है.

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केडीए कॉलोनीज के संपवेल ठप

केडीए द्वारा बनाई गई कॉलोनीज में सीवेज को डायवर्ट करने के लिए संपवेल बनाए गए थे. लेकिन मेंटेनेंस न होने से सभी संपवेल बंद पड़े हैं. बर्रा, गुजैनी, हलुवाखेड़ा, विनायकपुर, हितकारी नगर सहित अन्य इलाकों में सीवेज सीधे नालों में जोड़ दिए गए हैं.

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प्रोजेक्ट : एक नजर में

- 37 करोड़ रुपए होगी पूरे प्रोजेक्ट की लागत.

-6 करोड़ लीटर सीवेज नालों में गिरने से रुकेगा.

-12 किलोमीटर सीवर लाइन डाली जाएगी.

-43 एमएलडी का पंपिंग स्टेशन जाजमऊ में बनाया जाएगा.

-एक साल में प्रोजेक्ट पूरा करने का था टारगेट.

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योजना बनाकर शासन में भेज दिया गया है. प्रोजेक्ट फाइनल है, बस बजट मिलना बाकी है. कमेटी की हरी झंडी मिलने के बाद टेंडर कॉल किए जाएंगे.

-घनश्याम द्विवेदी, प्रोजेक्ट मैनेजर, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, जल निगम.