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एक क्लिक पर सामने होगी हाईस्कूल व इंटर के परीक्षार्थी की पूरी डिटेल

40 सालों का रिकॉर्ड अपलोड करने के लिए बोर्ड को चाहिए शासन की मंजूरी

prakashmani.tripathi@inext.co.in

ALLAHABAD: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में अब यूपी बोर्ड भी जुट गया है. बोर्ड 50 साल पुराने रिकार्ड को डिजिटल फॉर्म में ले जाकर उसे अपनी वेबसाइट पर डालने की तैयारी में है. सत्तर के दशक से लेकर 2000 तक की मार्कशीट और सर्टिफिकेट को ऑनलाइन करने के लिए बोर्ड की कवायद शुरू हो गई है. बोर्ड ने इस कार्य को पूरा करने के लिए शासन को प्रस्ताव व बजट दोनों ही भेज रहा है. मंजूरी मिलने के बाद बजट सेक्शन होते ही बोर्ड काम शुरू करा देगा.

दो फेज में पूरा होगा काम

माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से डिजिटलाइजेशन की तैयारी के लिए चल रही कवायद में 1960 से सन 2000 तक के सभी परीक्षार्थियों के सर्टिफिकेट और मॉर्कशीट डिजिटल फॉर्म में ऑनलाइन करने की तैयारी है. इसके लिए बोर्ड दो फेज में वर्क को पूरा करेगा. पहले फ्रेज में वर्क 1960 से लेकर 1980 तक के रिकार्ड को डिजिटल फार्म में ऑनलाइन करेगा. इसके बाद दूसरे फेज का वर्क शुरू होगा. इसमें 1980 से लेकर सन 2000 तक के सभी स्टूडेंट्स के सर्टिफिकेट और मार्कशीट को अपलोड किया जाएगा.

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स्कैनिंग के जरिए वर्क करेगा बोर्ड

सर्टिफिकेट और मार्कशीट को डिजिटल फॉम में ऑनलाइन किए जाने के बारे में बताते हुए सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद शैल यादव ने बताया कि प्रस्ताव के अनुसार इस काम को पूरा करने के लिए बोर्ड प्रोफेशनल्स का सहारा लेगा. 1960 से लेकर सन 2000 तक के सभी स्टूडेंट्स की मार्कशीट और सर्टिफिकेट को पहले स्कैन किया जाएगा. स्कैनिंग का काम पूरा होने के साथ ही उसे बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा. इसमें सबसे पहले टीआर यानी टेबूलेशन रजिस्टर को अपलोड किया जाएगा. उसके बाद सर्टिफिकेट के अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू होगी. इसके लिए सभी प्रकार की सावधानियां बरती जाएंगी. जिससे किसी भी प्रकार की समस्या खड़ी ना हो. सन् 2000 से अभी तक का रिकार्ड पहले ही बोर्ड ने अपलोड कर दिया है.

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सत्यापन में होगी सुविधा

एशिया में सबसे बड़ी बोर्ड परीक्षा का आयोजन करने वाले यूपी बोर्ड द्वारा स्टूडेंट्स के सर्टिफिकेट और मार्कशीट को डिजिटल फॉर्म में अपलोड किए जाने का सबसे बड़ा फायदा फर्जीवाड़े को रोकने में होगा. बीते कुछ सालों में सर्टिफिकेट और मार्कशीट में फर्जीवाड़ा करके जॉब हासिल करने की कई घटनाएं प्रकाश में आ चुकी हैं. रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन के बाद समस्या भी खत्म हो जाएगी. हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की मार्कशीट व सर्टिफिकेट के वेरीफिकेशन के लिए छात्रों को भटकना भी नहीं पड़ेगा. बोर्ड की वेबसाइट से एक क्लिक पर स्टूडेंट्स के डाक्यूमेंट का सत्यापन हो जाएगा.

बोर्ड के अभिलेख डिजिटल फॉर्म में होने से तमाम सुविधाएं बढ़ेंगी. इसीलिए प्रस्ताव पर विचार किया गया. शासन से ओके होने और बजट आवंटित होते ही डाक्यूमेंट के डिजिटलाइजेशन का कार्य शुरू हो जाएगा.

-शैल यादव

सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद