मेले में पहली बार हो रहा है व्हीकल माउंटेड मशीन का प्रयोग

PRAYAGRAJ: कुंभ मेले में श्रद्धालुओं को मच्छर-मक्खी से बचाने के लिए पहली नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. मेला प्रशासन ने ऐसी फॉगिंग मशीनों को इंट्रोड्यूस किया है जिससे निकलने वाला धुआं लंबे समय तक कोहरे की तरह ठहरा रहेगा. खासकर यह निचली सरफेस पर अधिक देर रहेगा. ऐसे में मच्छर-मक्खी अधिक संख्या में मरेंगे और लोगों को वेक्टर बांड डिजीज से बचाया जा सकेगा.

ऐसे काम करेगी नई तकनीक

अभी तक फॉगिंग की मशीनों में दवा के साथ डीजल-पेट्रोल डाला जाता था, जिससे निकलने वाला धुआं पलक झपकते ही गायब हो जाता था. ऐसे में मक्खी-मच्छर का ठीक से खात्मा नहीं होता था. इस बार ऐसी मशीनें लाई गई हैं जिनमें डीजल-पेट्रेाल में पानी मिलाने का सिस्टम है. ऐसे में पानी से निकलने वाली भाप धुएं के साथ मिलकर लंबे समय तक बना रहेगी. यह जमीन की निचली सतह पर ठहरी रहेगी. बता दें कि भाप का वजन अधिक होता है. इसलिए इसके साथ दवा का धुआं अधिक समय तक काम करेगा. स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी लैटेस्ट तीन मशीनें मेले में मंगाई है और सफल प्रयोग होने पर नई मशीनों का ऑर्डर भी दिया है.

कुंभ में वेक्टर बांड डिजीज प्रबंधन

20 हैं कुल सेक्टर

06 मलेरिया अधिकारियों की संख्या

17 एचईओ की संख्या

36 वेक्टर कंट्रोल इंस्पेक्टर्स की संख्या

30 पल्स फॉग मशीनों की संख्या

03 व्हीकल माउंटेड मशीनों की संख्या

22 दवा छिड़काव के पंपों की कुल संख्या

15 प्रति सेक्टर दवा छिड़काव स्टाफ की संख्या

एक नजर

मेले में कुल 12 से 15 करोड़ लोगों के आने की संभावना है.

संक्रामक बीमारियों से लड़ने के हॉस्पिटल बनाए गए हैं दो 20-20 बेड के दो

मक्खी-मच्छर से डायरिया, मलेरिया, फाइलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने का अंदेशा रहता है.

प्रत्येक सेक्टर में गंदगी से बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है.

वर्जन..

नई मशीनों को पहली बार मेले में इंट्रोड्यूस किया गया है. इनमें मौजूद पानी से बनी भाप भारी होने की वजह से निचली सतह पर रहेगी. ऐसे में मक्खी-मच्छरों को आसानी से मारा जा सकेगा.

-डॉ. एके पालीवाल, अपर निदेशक स्वास्थ्य प्रयागराज