आगरा(ब्यूरो)। सामान्य तौर पर कोई भी गूगल वेब पेज के जरिए कुछ सर्च करता है तो उसके सामने कई अलग-अलग पेज की वेबसाइट खुल कर आती हैं। अब ये आपके विवेक पर होता है उनमें से कौन सी वेबसाइट पर आप विजिट करेंगे। साइबर ठगों ने नामी कंपनियों की अलग-अलग फर्जी वेबसाइट बना दी हैं। जैसे ही आप किसी अच्छी कम्पनी की वेबसाइट पर जाते हैं। उस कम्पनी की वेबसाइट आपको सीरियल में गूगल के वेब पेज पर नीचे दिखाई देगी। ये शातिर अपराधी अपनी फर्जी वेबसाइट को गूगल सर्च इंजन ऑप्टमाइज़ के जरिए गूगल के सर्च बार में ऊपर शिफ्ट कर देते हैं। लोगों को लगता है यही साइट सही है और इस तरह वे नकली और फर्जी साइट पर पहुंच जाते हैं और इस तरह ये साइबर ठग अपना काम आसान कर लेते हैं।

-चाइनीज और वियतनाम के सर्वर पर होती हैं वेबसाइट
गूगल सर्च हिस्ट्री पर किसी भी वेबसाइट को टॉप एक से फोर तक लाया जा सकता है। गूगल के इसी टूल का इस्तेमाल ये शातिर करते हैं। इसके लिए पहले ये साइबर ठग किसी भी नामी कम्पनी से मिलता जुलता एक डोमेन नेम खरीदते हैं। इसके बाद चाइना और वियतनाम का सर्वर जो अधिक तेजी से सर्च बार पर काम करता है। खरीदते हैं इसके बाद इसी सर्वर पर फर्जी वेबसाइट बना कर उसको गूगल के सर्च इंजन ऑप्टमाइज़ टूल से गुज़ारते हैं। इसके लिए ये ठग अलग अलग कीवर्ड्स और हैशटैग यूज करके अलग अलग सर्वर से फर्जी वेबसाइट को सर्च कर उसको विजिट करते हैं। इसके बाद गूगल असली वेबसाइट के साथ ही इन वेबसाइट को इन पर मिले हिट और ट्रैफिक कीवर्ड्स आदि के आधार पर सर्च पेज पर टॉप पर ले आता है।

-सेफ इंटरनेट ब्राउजिंग से कर सकते हैं पहचान
- फेक और असली वेबसाइट देखने में बिल्कुल एक जैसी होती हैं इनसे बचाव के लिए कुछ तरीके हैं जिनसे आप इस तरह की ठगी से बचाव कर सकते हैं।
- बिना डोमेन के कोई भी वेबसाइट नहीं बनाई जा सकती है। इसके लिए ये लोग नामी कंपनियों से मिलता जुलता डोमेन बुक करते हैं लेकिन गूगल एक ही शब्द के डोमेन की एक ही वेबसाइट बनाता है।
-अगर आप किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर जाते हैं तो जो सामान आप खरीदना चाहते हैं उसका रिव्यू, उसकी रिटर्न पॉलिसी, कस्टमर सपोर्ट, कॉन्टैक्ट डीटेल्स, ऑफिस का पता आदि जानकारी हासिल करें।
-अबाउट अस और कॉन्टेक्ट अस किसी भी वेबसाइट को विजिट करते समय जरूर चेक करें इनमें से जुड़ी कोई भी जानकारी अगर वेबसाइट पर नहीं है या आदि अधूरी है तो समझ जाइए वेबसाइट फर्जी है।
-वेबसाइट के एड्रेस बार को ठीक से पढ़ लें क्योंकि फर्जी वेबसाइट के एड्रेस बार में कोई न कोई गलती जरूर होती है।
-किसी भी वेबसाइट पर विजिट करते समय उसकी पॉलिसी, कंटेंट, गूगल लिस्टिंग आदि को चेक करें। अगर किसी वेबसाइट में इस तरह की महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं दी गई है तो समझो ये फर्जी है।

ये हैं हेल्पलाइन नंबर
अगर आप के साथ भी ऑनलाइन ठगी हुई है तो केंद्रीय ग्रह मंत्रालय द्वारा जारी टोल फ्र हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा आप 112 या संबंधित जिले के साइबर थाने पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

केस 1
फतेहाबाद के रहने वाले व्यापारी राजीव पालीवाल को जूट के बैग की आवश्यकता थी। उन्होंने इसको गूगल पर सर्च किया तो कई वेबसाइट सामने वेब पेज पर आईं एक वेबसाइट पर सौदा तय हुआ। पैसे दिए लेकिन माल नहीं आया बाद में पता चला कि वेबसाइट फर्जी थी थाना हरीपर्वत में मुकदमा पंजीकृत हुआ।

केस 2
- खेरागढ़ निवासी विपिन के बजाज कम्पनी के इंडक्शन में कुछ दिक्कत हुई तो उन्होंने कस्टूमर केयर का नंबर गूगल पर सर्च किया सर्च हिस्ट्री में वेब पेज पर जो पहला नम्बर था ओटीपी मांगा इसके बाद खाते से 15000 रुपए निकल गए। जब शिकायत हुई तो पता चला कि वह फर्जी वेबसाइट थी।

इस तरह की हैं फर्जी वेबसाइट.
-ई कॉमर्स वेबसाइट
-ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट।
-ऑनलाइन ट्रेडिंग वेबसाइट।
-रिटेलर ई कॉमर्स वेबसाइट।
-ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट।
-इलेक्ट्रिक एप्लाइंस की वेबसाइट।
-अलग अलग कॉल सेंटर की वेबसाइट।
-इस तरह काम करता है गूगल वेब पेज।

-ये हैं आंकड़े.
-9000 लोगों से साइबर फ्र ाड हुआ साल 2022 में।
-1600 लोगों से साइबर फ्र ॉड हुआ साल 2023 में।
-35 केस अब तक दर्ज हुए हैं


साइबर ठगी के मामलों को लेकर लोगों को अवेयर करने का काम किया जाता है, अगर आप गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर सर्च कर रहे हैं तो अलर्ट हो जांए, अकाउंट खाली हो सकता है।
पुष्पेन्द्र चौधरी, जिला साइबर प्रभारी