-एसआरएन हॉस्पिटल के निरीक्षण के दौरान कमियां देख भड़के प्रमुख सचिव

-कहा, स्टोर में मौजूद दवाएं ही पर्चे में लिखी जाएं

PRAYAGRAJ: जो दवा स्टोर में मौजूद है डॉक्टर्स उसका सब्स्टीट्यूट क्यों लिख रहे हैं? आखिर इसके पीछे की मंशा क्या है? यह सवाल चिकित्सा शिक्षा प्रमुख सचिव और जिले के नोडल अधिकारी डॉ। रजनीश दुबे ने गुरुवार को एसआरएन हॉस्पिटल के निरीक्षण के दौरान पूछा। उन्होंने हास्पिटल प्रशासन को हिदायत देते हुए कहा कि ऐसा घालमेल कतई नहीं चलेगा। मरीजों को परेशान करने की जरूरत नहीं है। दरअसल, परचे पर गठिया की दवा फेबुस्टेट लिखी थी, जो बाहर मिलती है। जबकि गठिया की दवा हॉस्पिटल स्टोर में मौजूद था। यह देखकर प्रमुख सचिव का पारा चढ़ गया था। मौके पर प्रमुख सचिव के साथ डीएम भानुचंद्र गोस्वामी और प्रिंसिपल प्रो। एसपी सिंह उपस्थित रहे। हर हफ्ते देना होगा दवाओं का हिसाब

दौरे पर पहुंचे प्रमुख सचिव ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने हॉस्पिटल फार्मेसी इंचार्ज आरएन सिंह को हर हफ्ते दवा स्टॉक की जानकारी प्रिंसिपल और डीएम को उपलब्ध कराने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि अगली बार ऐसी शिकायत मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह भी कहा कि जल्द ही ई-फार्मेसी शुरू किया जा रही है। इकसे जरिए आम व्यक्ति भी हॉस्पिटल स्टोर में मौजूद दवाओं की जानकारी ले सकेगा। इसी तरह आयुष्मान के मरीजों की दवाएं केवल पीताम्बरा फार्मेसी में मिलने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सभी दवाएं प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर भी उपलब्ध होनी चाहिए।

चेतावनी पर भी थूक रहे लोग

हॉस्पिटल में गंदगी देखकर प्रमुख सचिव काफी नाराज हुए। उन्होंने कहा कि चारों ओर गुटखा थूकने वालों पर लगाम क्यों नही लगाई जा रही। जबकि सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। उन्होंने कहा कि दो सौ रुपए जुर्माना होने के बावजूद लोगों की रसीद क्यों नहीं काटी जा रही है। प्रमुख सचिव ने सीसीटीवी कैमरे की मॉनीटरिंग के लिए तीन शिफ्टों में कर्मचारी लगाने के आदेश दिए। कहा कि कैमरे में अगर कोई गंदगी फैलाता नजर आए तो तत्काल उससे दंडित किया जाए।

लिफ्ट और खाने को लेकर बिफरे

-हॉस्पिटल में लगी दो लिफ्ट बंद होने पर प्रमुख सचिव ने एसआईसी को सीधे फटकार लगाई। कहा कि अगली बार लिफ्ट खराब मिली तो आपके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा।

-हॉस्पिटल के किचन इंचार्ज को खाना बनने के बाद सबसे पहले टेस्ट करने के आदेश दिए।

-आयुष्मान कार्ड बनाने के काउंटर बढ़ाने के साथ, सीसी स्कैन मशीन में एक की जगह तीन टेक्निशियन नियुक्त करने के आदेश दिए। इससे एक दिन में 64 मरीजों की जांच हो सकेगी।

-कहाकि जिले के 6 हॉस्पिटल में महज 14 सिक्योरिटी पर्सन हैं। इनकी संख्या बढ़ाकर 36 की जानी चाहिए। सभी जगह एक्स आर्मी मैन को अपाइंट किया जाए।