प्रयाग घाट से अल्लापुर का रास्ता बंद होने पर नाले पर बनाया रैंप

पांच किमी की दूरी से बचने के लिए जान

हथेली पर रख रैंप पार करते हैं बच्चे

महज डेढ़ फिट चौड़े रैंप पर कभी भी हो सकता है हादसा

ALLAHABAD: जुगाड़ बनाने में माहिर पब्लिक ने प्रयाग घाट रेलवे स्टेशन की लाइन छह से सात फीट ऊंची होने के बाद भी चक्कर लगाए बगैर अल्लापुर पहुंचने के लिए जुगाड़ बना लिया है। जगह-जगह नाले पर एक-एक फीट का रैम्प बना दिया है। जिसका इस्तेमाल बड़ों के साथ ही केजी से कक्षा आठ तक में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे भी कर रहे हैं। छह फीट चौड़े और करीब दस फीट गहरे नाले को पार कर स्कूल जाते हैं और स्कूल से घर आते हैं। बच्चों का यह डेली रूटीन बेहद खतरनाक है, जो कभी भी अनहोनी में बदल सकता है।

डर-डर कर पार कर रहे थे नाला

आईनेक्स्ट रिपोर्टर ने खतरों के इस खेल को कैमरे में कैद किया। छोटे-छोटे बच्चे डरते हुए नाले पर बने रैंप को पार कर रहे थे। नाला पार कर करीब तीन से चार फीट ऊंची रेलवे लाइन की दीवार को चढ़ने के लिए मशक्कत कर रहे थे। अस्थायी रूप से ईट रख कर बनाई गई सीढ़ी पर पैर रखकर रेलवे लाइन की तरफ जाने का प्रयास कर रहे थे। रिपोर्टर के साथ मौजूद पार्षद ने जब बच्चों को सतर्क करते हुए आवाज लगाई तो स्कूल का एक कर्मचारी सीढ़ी लेकर दौड़ा। उसने रैंप के पास सीढ़ी लगाई जिसे पार कर बच्चे रेलवे लाइन पर पहुंच गए।

बच्चों का है डेली रूटीन

दारागंज में रहने वाले और अल्लापुर कैलाशपुरी में स्थित एक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का यह डेली रूटीन है। बच्चे प्रयाग घाट रेलवे स्टेशन की रेलवे लाइन को पार कर नीचे उतरते हैं और फिर दारागंज व अल्लापुर के बीच से गुजरे करीब छह फीट चौड़े और दस फीट गहरे बड़े नाले को पार कर स्कूल पहुंचते हैं।

ताकि न लगाना पड़े पांच किमी का चक्कर

लोगों का कहना है कि पब्लिक के साथ ही स्कूल द्वारा नाले पर रैंप बनाया गया है, ताकि बच्चों को पांच किमी। का चक्कर न लगाना पड़े। क्योंकि प्रयाग घाट रेलवे स्टेशन की लाइन ऊंची होने के बाद अब बक्शी बांध होकर, बाघम्बरी रोड व कुंदन गेस्ट हाउस होकर ही अल्लापुर व कैलाशपुरी पहुंचने का एक मात्र रास्ता बचा है, जो चार से पांच किमी का है।

डिस्ट्रिक व रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन को इस समस्या का परमानेंट इलाज निकालना चाहिए। या तो प्रयाग घाट से अल्लापुर की तरफ जाने के लिए रास्ता बना दिया जाए। या फिर नाले पर बने एक फीट चौड़े स्लैब को तोड़ते हुए लोगों को व बच्चों को चार-से पांच किलोमीटर का चक्कर लगाते हुए ही कैलाशपुरी व अल्लापुर जाने दिया जाए। अगर रेलवे लाइन पार कर फिर नीचे उतर कर नाला पार करते हुए लोग व स्कूली बच्चे जाएंगे तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

विनय मिश्रा

पार्षद, बाघम्बरी रोड