बरेली (ब्यूरो)। अभी समय है, अगर हम नहीं जागे तो भविष्य में एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना होगा। जिले में ग्राउंड वाटर की वर्तमान स्थिति इसका संकेत दे रही है। इस संकेत को समझने और उचित कदम उठाने में देर हो गई तो सभी को पछताना पड़ेगा। शहर में ग्राउंड वाटर का बेहताशा दोहन होने से यहां की स्थिति तो चिंताजनक है। इसके अलावा कुछ तहसील क्षेत्रों में भी वाटर लेवल तेजी से गिर रहा है। इसके बाद भी जिले में ग्राउंड वाटर रिचार्ज की व्यवस्था पर किसी का फोकस नहीं है। एक्सपट्र्स का कहना है कि अगर समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो जिले को कैंपटाउन या फिर चेन्नई बनने में देर नहीं लगेगी।

कंक्रीटिंग मेन कारण
इस बार बारिश न होने से भीषण गर्मी ही नहीं पानी की क्राइसिस भी परेशान करेगी। यह ही नहीं इसका असर अंडरग्राउंड वाटर पर सबसे अधिक पड़ेगा। कई ट््यूबवेलों का डिस्चार्ज लगातार गिर रहा है। शहर की बात करें तो यहां भी लगातार अति दोहन से अंडरग्राउंड वाटर नीचे खिसक रहा है। औसतन 60 सेमी प्रतिवर्ष भूगर्भ जल स्तर लगातार गिर रहा है। इसका मेन रीजन कंक्रीटिंग है। एक्सपर्ट का कहना है कि कंक्रीट के जंगल में पानी रिचार्जिंग नहीं हो पा रहा है, जिससे वाटर लेबल लगातार घट रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी नहीं बचेगा तो जिंदगी बचाना मुश्किल है। इस पर अभी से गंभीर प्रयास होने चाहिए।

ये हैं मुख्य कारण
- बढ़ता अर्बनाइजेशन
- इलीगल बोरिंग
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं
- पेड़ों का कटान
- खत्म होती खेती
-तेजी से बढ़ती पापुलेशन
-एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रीज में पानी का एक्सेस यूज
-जरूरत से कम बारिश होना
-तालाबों की कमी या सही से देख-रेख नहीं हो पाना
-पानी का अत्याधिक दोहन होना
-हर घर में सबमर्सिबल होना
-सरकारी सिस्टम की उदासीनता
-तालाबों पर हो रहे कब्जे

5 साल में 250 सेमी खिसका
पिछले 5 साल की बात करें तो बरेली में अंडरग्राउंड वाटर 250 मीटर तक नीचे खिसक गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में हालात बेकाबू हो जाएंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलता मौसम चक्र और कम बारिश भी इसके लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार है, लेकिन रिचार्जिंग के वैज्ञानिक तौर-तरीके बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए।

ट्यूबवेल से सप्लाई
सिंचाई के अलावा शहर की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ट्यूबवेल पर आधारित है। 80 परसेंट ट्यूबवेल और 20 परसेंट ग्रेविटी से वाटर सप्लाई हो रहा है। जलापूर्ति होती है। जल संस्थान के अफसरों के अनुसार डिमांड ज्यादा होती है।

अर्बनाइजेशन भी वजह
वैज्ञानिक लगातार नीचे खिसक रहे वाटर लेवल के लिए अर्बनाइजेशन को सबसे बड़ा कारण मान रहे हैं। कंक्रीट के जंगल में तब्दील होती जमीन और सडक़ व अन्य विकास कार्यों के नाम पर हजारों पेड़ों का कटान मुख्य कारण बताया जा रहा है। वैज्ञानिक बताते हैं कि बरसात का पानी नालियों के जरिए सीधे नदियों में जा रहा है। जब पानी जमीन के अंदर ठहरेगा ही नहीं, तो जमीन रिचार्ज कैसे होगी। इससे वाटर रिसोर्सेज घट रहे हैं।

सूख रहीं परतें
वैज्ञानिकों का कहना है कि जहां कल तक खेती थी वहां या तो बड़े-बड़े अपार्टमेंट, हॉस्पिटल, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए हैं या फिर बंजर हो चुकी है। मिट्टी में नमी न होने से ग्राउंड वाटर रिचार्ज नहीं हो रहा है। बरसात का पानी सीधे नालों व नदियों में बह रहा है। जिससे ग्राउंड वाटर पर दबाव बढ़ रहा है।

पानी का हो रहा दुरुपयोग
शहर की आबादी तकरीबन 15 लाख के पार पहुंंच गई है। डब्ल्यूएचओ के मानकों के हिसाब से 135 लीटर पानी प्रति व्यक्ति रोजाना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर 100 लीटर से कम हो रहा है। जल संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक शहर के कई इलाकों में तेजी से बसावट हो रही है, जिससे पानी पर निर्भरता भी बढ़ रही है। पानी का दुरुपयोग भी बढ़ रहा है। लोग पीने के पानी को कार वाशिंग, सिंचाई आदि में इस्तेमाल कर रहे हैं, इसको लेकर पब्लिक को भी अवेयर होना चाहिए।

भूगर्भ जल विकास खंडवार जलस्तर औसत मीटर
ब्लॉक प्री मानसून प्री मानसून
बिथरी चैनपुर 5.84 4.64
क्यारा 4.99 3.12
भुता 5.00 3.32
फतेहगंज पश्चिमी 6.06 4.04
फरीदपुर 9.43 8.03
आलमपुरा जाफराबाद 14.33 13.30
नवाबगंज 4.10 2.86
बहेड़ी 3.30 2.38
भदपुरा 5.05 3.79
भोजीपुरा 5.52 3.83
मझगवां 9.70 7.82
मीरगंज 7.00 4.01
रामनगर 15.06 13.79
रिछा 4.54 2.93
शेरगढ़ 6.04 3.72

वाटर रिचार्ज के लिए प्रयास
सभी सरकारी परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कंपलसरी
300 वर्ग मीटर के प्लॉट के नक्शे में रेन वाटर हर्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी
सभी पार्को में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएं
हर घर में बोरिंग करवाने पर नियंत्रण हो
गाडिय़ों की धुलाई व अन्य कामों में पानी की बर्बादी को रोका जाए

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं
बारिश के पानी का संचय करना इसका बेहतर उपाय है। इसके साथ ही ग्राउंड वाटर को यूज करें बर्बाद न करें। बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रयास करें ताकि वह बारिश का पानी फिजूल में बर्बाद न होने पाए। शहरी एरिया में अधिकतर घरों में कच्ची एरिया नहीं है। कुछ कच्ची एरिया रखें ताकि छत से जो बारिश का पानी नाली में बहता है, वह ग्राउंड में जा सके। कोशिश करें कि लोग अपने आप ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं।
-गणेश नेगी, सीनियर हाइड्रोजियोलॉजिस्ट, भूगर्भ जल विभाग