BAREILLY:

मनचलों से लड़कियां ही नहीं महिलाएं भी परेशान हैं। घर हो या बाहर लड़कियां हर जगह अपने आप को अनसेफ फील करती हैं। घर में रिश्तेदार तो बाहर छिछोरे लड़के छेड़ने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। इतना सब के बावजूद भी लड़कियां अपने साथ हो रहे दु‌र्व्यवहार को बोल नहीं पाती हैं। उन्हें समाज में बदनामी के नाम की पट्टी मुंह पर बांधनी पड़ती है। आई नेक्स्ट ने इज्जत करो कैम्पेन के तहत ट्यूजडे को पैनल डिस्कशन ऑर्गनाइज किया, जिसमें ये बातें निकलकर सामने आयीं। हालांकि, इस बात पर सभी का जोर रहा कि लड़कियों को शर्म का चोला उतार फेंकना होगा और अपनी बात खुलकर रखनी होगी। तभी वह अपने को सेफ रख पाएंगी। डिस्कशन में किसने क्या कहा आइए जानते हैं

सभी को समझनी होगी अपनी िजम्मेदारी

छेड़खानी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी को आगे आना होगा। सबसे पहले पेरेंट्स को चाहिए की वह अपने बेटों की छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज न करें। माता-पिता दोनों की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें। इसके साथ ही स्कूल को भी बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा देनी चाहिए। कभी-कभी पेरेंट्स सोसाइटी में अपनी हनक दिखाने के लिए बच्चों को आवश्यक्ता से अधिक सुविधाएं देने लगते हैं, जो उनके बच्चों के लिए ही खतरनाक साबित होने लगते हैं। पेरेंट्स को ऐसे दिखावे से बचना चाहिए। इसके साथ ही समाज की दोहरी मानसिकता को बदलने की जरूरत है। वहीं कुछ महिलाओं का कहना है कि यदि पुलिस शोहदों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करते तो काफी हद तक ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

ग‌र्ल्स कहीं भी सेफ नहीं

ईवटीजिंग को रोकने के लिए लड़कियों को ही आगे आना होगा। उन्हें अपने आपको और मजबूत बनाना होगा। लड़कियों को अत्याचार चुपचाप सहना नहीं करना चाहिए। इसके लिए पेरेंट्स को भी चाहिए की वह बेटों के साथ-साथ बेटियों को भी बोल्ड बनाएं। संस्कार क ो लेकर उनका कहना था कि अक्सर हम लड़कियों को संस्कार सिखाते हैं, लेकिन लड़कों को संस्कार देना भूल जाते हैं। ऐसे में जरूरत है कि लड़कों को भी अच्छे संस्कार ि1दये जाएं।

मोनिका भाटिया, याेगा टीचर

कानून का रोल सिर्फ दिखाने के लिए

ईवटीजिंग जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। स्कूल, बाजार और सड़क, लड़कियां कहीं भी सेफ नहीं हैं। शहर के किसी पार्क में लड़कियां अकेले नहीं जा सकती हैं। लड़कियों को शोहदों का डर हमेशा सताता रहता है। ईवटीजिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सबसे पहले लोगों में अवेयरनेस लाने की जरूरत है। कानून का रोल सिर्फ दिखाने के लिए रह गया है। वीमेन सेफ्टी के लिए वीमेन पॉवर लाइन क्090 शुरू किया गया, जिसका कोई फायदा नहीं है। पेरेंट्स को चाहिए को वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें मजबूत बनाएं।

ज्योति भाटिया, टीचर

अच्छे संस्कार की जरूरत

ईवटीजिंग जैसी घटनाओं के लिए सिर्फ लड़कों को दोषी ठहराना सही नहीं होगा। इसके लिए लड़के और लड़कियां बराबर की दोषी हैं। लड़कियों को शालीन कपड़े पहनना चाहिए। आधुनिकता का असर सभी पर पड़ा है। इसके लिए हमें अच्छे संस्कार की जरूरत है। वहीं शिक्षण संस्थाओं के आस-पास पान-सिगरेट की दुकानों को हटा देना चाहिए। यहीं पर बैठकर शोहदे कॉलेज आती-जाती लड़कियों के साथ छेड़खानी करते हैं। पुलिस को ऐसे अड्डों पर छापा मारकर मनचलों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

अतुल भारद्वाज, पीएची स्कॉलर

अपनी ताकत का अहसास दिलाएं

छेड़खानी जैसी घटनाओं को सिर्फ अवेयरनेस से दूर किया जा सकता है। लड़कियां यदि छेड़खानी जैसी घटना को अपने फैमिली मेंबर्स से छिपाएंगी तो शोहदों के हौसले और बुलंद होंगे। ऐसे में उन्हें अपनी ताकत का अहसास दिलाना चाहिए। लोगों की मानसिकता दूषित हो चुकी है, जिसे कानून और डर से दूर नहीं किया जा सकता है। इसके लिए हमें अच्छे संस्कार की जरूरत है। लड़कियों को कॉलेज जाते समय अपने कपड़ों का विशेष ध्यान देना चाहिए। उनकी ड्रेस डीसेंट होनी चाहिए।

डॉ.विजय सिंह सॉइक्रेट्रिस्ट डिस्ट्रिक्टॉस्पिटल

जन जागरण्ा की जरूरत

समय बदल रहा है। लोगों को अपनी सोच बदलने की जरूरत है, जो बच्चे रास्ते से भटक गए हैं उन्हें अच्छे रास्ते पर लाने की जरूरत है। इसके लिए अच्छे संस्कार वाली पढ़ाई होनी चाहिए। समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए जनजागरण की जरूरत है। तभी हम एक अच्छे समाज की कल्पना कर सकते हैं। हम अपने रीति-रिवाज और धर्मग्रंथों का अध्ययन करें, जिससे हमारे अंदर एक अच्छा इंसान पैदा हो सके। इसके साथ ही लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना चाहिए।

महेश राठौर, संगठन मंत्री एबीवीपी

अधेड़ उम्र के लोग भी करते हैं छेड़खानी

मनचलों के अंदर से पुलिस का खौफ पूरी तरह से खत्म हो गया है। जब तक कानून का डर नहीं होगा, तब तक ईवटीजिंग जैसी घटनाओं को रोका नहीं जा सकता है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ लड़के ही छेड़खानी करते हैं, अधेड़ उम्र के लोग भी छेड़खानी करने से बाज नहीं आते हैं। इसके साथ ही कहीं ऐसी घटना हो रही है तो हमें चुप नहीं रहना चाहिए। हमें अपनी आवाज उठानी चाहिए। हमें तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए।

अवनीश चौबे, स्टूडेंट्स लीडर

लड़कियों को आवाज उठानी होगी

कॉलेज आते-जाते ईवटीजिंग आम बात हो गई है। लड़कियों को अकेले बाजार जाने से भी डर लगता है। लड़कियां कहीं भी सेफ नहीं हैं। हर फैमिली में लड़कियों के साथ दोहरा व्यवहार होता है। पुलिस भी शोहदों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करती है, जिसकी वजह से मनचले छेड़खानी करने से बाज नहीं आते हैं। बदनामी के डर से लड़कियां अपनी आवाज उठा नहीं पाती हैं। शोहदों की शिकायत लेकर लड़कियां थाने जाती हैं तो पुलिस कार्रवाई की बजाय लड़की को ही बदनामी का डर दिखाने लगती है।

प्रीती, स्टूडेंट

लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना होगा

कानून में बदलाव की जरूरत है। बिना पुलिस की मदद के ईवटीजिंग जैसी घटनाओं को रोक पाना नामुमकिन है। लेकिन पुलिस सिस्टम से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। ऐसे में लोगों को खुद अवेयर रहने की जरूरत है.अच्छे संस्कार के अभाव में बच्च गलत रास्ते पर चले जा रहे हैं। पेरेंट्स को चाहिए की वह लड़के और लड़कियों में कोई अंतर समझे। दोनों को एक तरह संस्कार दे।

सुमित गुर्जर, छात्र नेता

लोग मोबाइल में ही उलझ कर रह गए हैं। फैमिली की मीनिंग बदल गई है। आज लोग साथ-साथ खाना नहीं खाते हैं। लोगों के इमोशन खत्म होते जा रहे हैं। यह सब बाते कहीं न कहीं हमारे समाज पर गलत असर डाल रही हैं। जब हम कुछ सोचेंगे तभी कुछ होगा। सिस्टम की बेहतरी के लिए सभी के सहयोग की जरूरत होती है। लड़कियों को आवाज उठाने की जरूरत है। उन्हें समाज या बदनामी से नहीं डरना चाहिए। सच के साथ रहो कोई बदनामी नहीं होगी। लोगों की सोच गंदी हो गई है। सड़क पर आते ही लोग मर्द बन जाते हैं। लोगों को दोहरी मानसिकता बदलनी होगी। पुलिस हमेशा लोगों के मदद के लिए तैयार रहती है। सिटी में लड़कियों की सेफ्टी के लिए शक्ति मोबाइल की शुरुआत की गई है, जिससे ईवटीजिंग जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगी है।

राजीव मल्होत्रा, एसपी सिटी