पैगम्बरे इस्लाम की बेटी फात्मा जहरा की याद में हुई महफिल

शायरों ने पेश की नजराने अकीदत, मोमनीन ने दी मुबारकबाद

>BAREILLY: पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की बेटी फात्मा जहरा की विलादत (पैदाइश) की याद में शहर के के किला स्थित छीपीटोला के काले इमामबाड़े में जश्न-ए-इस्मत पर तरही महफिल हुई। कारवाने तहजीब की तरफ से हुई इस दौरान शायरों ने नजराने अकीदत पेश की। वहीं मोमनीन कराम ने इस जश्न की लोगों को मुबारकबाद दी। लोगों ने इस दौरान नज्र का तबर्रुक भ्ाी खाया।

शायरों ने पेश किया तरही कलाम

महफिल की शुरुआत हदीसे किसा की तिलावत से समर अब्बास ने की। इसके बाद महफिल का दौर शुरू हुआ। शुरुआत में स्टूडेंट साकिब हसन ने शेर पढ़ा 'मैं तेरा नाम लेकर घर से जब स्कूल जाता हूं, मुझे देते हैं इज्जत मेरे टीचर फातिमा जहरा' को लोगों ने खूब पसंद किया। इसके अलावा मकतए महफिल अदील बरेली के शेर 'मेरी बिनाई है महदूद वरना देखता मैं भी, सितारों में लिखा है आसमां पर फातिमा जहरा' पर मोमीन की खूब वाहवाही मिली। महफिल में दूसरी डिस्ट्रिक्ट के हाशमी जलालपुरी, सदफ मुरादाबादी, नासिर बदायूंनी, जहीर नौगांवी के अलावा शहर के रिजवान बरेली, डा। अकील, मोहिब के अलावा तमाम शायरों ने नजराने अकीदत पेश की। गौहर रिजवी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

फात्मा जहरा की सीरत है मिसाल

महफिल के अंत में मौलाना समर अब्बास ने हजरत फात्मा जहरा की जिंदगी पर रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि फात्मा जहरा की सीरत दुनिया की तमाम औरतों के लिए मिसाल है। अंत में मोमनीन कराम में तबर्रुक तक्सीम किया गया। इस मौके पर जिया मेहदी, मो। असकरी, कौसर, असकरी जैदी आदि मौजूद रहे।