गोरखपुर (ब्यूरो)। वहीं कोल्ड डायरिया भी इसके साथ उनकी मुसीबतें बढ़ा रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 500 बेड बेड के बाल चिकित्सा संस्थान में उनका इलाज चल रहा हे। नेहरू अस्पताल का 350 बेड के बाल रोग विभाग 200 से अधिक बच्चे भर्ती हो चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा निमोनिया, बुखार और कोल्ड डायरिया से पीडि़त हैं। इतना ही नहीं दमा के पेशेंट्स की भी संख्या बढ़ रही है। 15 निमोनिया, 10 तेज बुखार और 20 कोल्ड डायरिया से पीडि़त बच्चे भी भर्ती किए गए हैं। विशेषज्ञ बच्चों को ठंड से बचाने की सलाह दे रहे हैं।

डबल बीमारियों से गंभीर

बदल रहे मौसम में बच्चे निमोनिया के साथ डायरिया का शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह से बच्चों की बीमारी की गंभीरता बढ़ती जा रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज का बाल रोग संस्थान में 200 से अधिक बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें निमोनिया के साथ ही कोल्ड डायरिया ने अपनी चपेट में ले रखा है। ऐसे में कई बच्चों को बीमारी की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर को उन्हें पीआईसीयू और वेंटीलेटर पर रखना पड़ रहा है। यह गंभीरता शून्य से तीन साल के बच्चों में ज्यादा देखने को मिल रही है।

बदलता मौसम खतरनाक

बीआरडी मेडिकल कालेज बाल रोग विशेषज्ञ डॉ। भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि बदल रहा मौसम बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है। इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। बीआरडी में हर दिन 30 से 40 बच्चे बाल रोग संस्थान में इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें 15 से 20 बच्चों को निमोनिया और कोल्ड डायरिया की वजह से भर्ती करना पड़ रहा है। बताया कि निमोनिया में जकडऩ की वजह से बच्चे ठीक तरीके से दूध नहीं पी पा रहे हैं और न ही कुछ खाते ही बन रहा है। अगर मां जबरदस्ती दूध या खाना खिलाने की कोशिश करती है। इस दौरान बच्चों को खांसी आती है तो दूध या खाना सरक कर फेफड़ों में चला जाता है। फेफड़ों पर जाने पर बच्चे की मुश्किल बढ़ जाती है। ऐसे बच्चों को एनआईसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है।

गाय-भैंस का दूध पीने वालों को खतरा ज्यादा

डॉ। भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि अगर बच्चा मां का दूध पी रहा है तो उसे निमोनिया का खतरा बेहद कम होता है। लेकिन, अगर मां का दूध नहीं पीता है तो उसे निमोनिया का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। क्योंकि, ओपीडी में आने वाली 40 परसेंट महिलाओं में यह देखने को मिल रहा है, उन्हें दूध न होने की समस्या है। इसकी वजह वह गाय या भैंस का दूध का पिला रही है। इसकी वजह से ऐसे बच्चों को निमोनिया तेजी से हो रहा है।

निमोनिया के लक्षण -

बुखार, पसीना आना

ठंड लगना

सीने में दर्द

सांस लेने में तकलीफ

कफ और खांसी के साथ पीला बलगम आना।

बचाव

फ्लू का टीका जरूर लगवाएं।

नियमित टीकाकरण में निमोकॉकल वैक्सीन

पीसीवी 13

हीमोफिलिस इन्फलुएंजा वैक्सीन लगवाएं।

निमोनिया के मरीज अधिक है। पांच से सात परसेंट बच्चों में ही निमोनिया के साथ डायरिया की समस्या है। लेकिन, कुल मरीजों की बात करें तो 50 परसेंट मरीज इस वक्त निमोनिया के आ रहे हैं। निमोनिया फेफड़े में होने वाला संक्रमण है, जो वायरस, बैक्टीरिया और फंगस तीनों से होता है। पीडि़तों में शून्य से तीन साल के बच्चे ज्यादा हैं।

- डॉ। भूपेंद्र शर्मा, पीडियाट्रिशियन