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एसबीआई, मेन ब्रांच समय 11:45 बजे

नोटबंदी भले ही लोगों को परेशान कर रहा हो, लेकिन जिंदगी का एक ऐसा कोना भी है जिसे इस नोटबंदी से खुशियां नसीब हुई। उजाले भरे कमरे में अंधेराभरा जीवन जी रहे बुजुर्गो के लिए शनिवार का दिन पुरानी यादों में खोने का बहाना लेकर आया। नाम और पहचान नहीं उजागर करने की शर्त पर बैंकों की कतार में लगे बुजुर्गो ने दर्द-ए-दिल जाहिर किया। जिसे सुनकर आप भी रो पड़ेंगे।

एक-एक पैसा जोड़कर बेटे को इंजीनियर बनाया था, बुढ़ापे के सहारे के लिए। उजाले भरे दिन के लिए। लेकिन बदलती दुनिया ने सब तबाह कर दिया। पैसा है। आराम है। पर परिवार नहीं है। पैसे की अंधी दौड़ ने सब छीन लिया। एक छत के नीचे रहते हुए भी अकेला हूं। आज मोदी जी की मेहरबानी से बहुत दिन बाद संवाद हुआ है। घर का मालिक बना हूं। थैंक्स मोदी जी।

एसबीआई, बीआरडी ब्रांच 12:25 बजे

बाबू मोदी जी अच्छा कइले। एही बहाने मलिकाइन बन गइनी। आज त पतोह भोरे-भोरे नाश्ता दे देहली ह और पइसा भी। बस एतने त कमी बा, भगवान के दया से। ये उनके शब्द है जो बेटे की एक पुकार के लिए तरस रहे हैं। बात करते-करते आंखों से आंसू छलक जाते हैं, लेकिन वो अपने बेटा की पहचान को छिपाने की गुहार लगाती रहती हैं। बुजुर्ग की दर्द भरी दास्तां ऐसी है कि आप सुनेंगे तो अपने-आपको आप भी नहीं रोक पाएंगे। बेटा को पेट काटकर, जमीन बेचकर डॉक्टर बना दिया। और उसी बेटे ने ओल्ड एज होम में भी भेज दिया। लोगों के समझाने पर कुछ महीने पहले फिर वापस घर बुला लिया।

नोट: हम बुजुर्गो के आग्रह पर उनकी पहचान उजागर नहीं कर रहे हैं। क्योंकि उनके बेटे के शो काल्ड इमेज को धक्का पहुंच सकता है।