- कुसम्ही जंगल से तस्करी कर ले जा रहे लकड़ी

- मुकदमा दर्ज करके भूला विभाग, नहीं हुई कार्रवाई

GORAKHPUR: तिनकोनिया रेंज के कुसम्ही जंगल में अवैध ढंग से कटने वाले पेड़ों की लकड़ी देवरिया में खप रही है। देवरिया जिले के वन माफिया कुसम्ही जंगल के साखू ओर सागौन की लकड़ी खपा रहे हैं। जंगल में आधा दर्जन से अधिक मुठभेड़ में देवरिया के तस्करों का नाम सामने के बावजूद वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा सका। तस्करों के खिलाफ कार्रवाई में वन कर्मचारियों के पसीने छूट गए।

दिन में काट रहे पेड़

कुसम्ही जंगल से लकड़ी तस्करी खूब होती है। वन कर्मचारियों की आंखों में धूल झोंककर तस्कर दिन में पेड़ काट देते हैं। रात में मौका देखकर पेड़ों के बोटे ढोए जाते हैं। शुक्रवार की रात रजहीं बीट से दो पेड़ काटकर ले जा रहे तस्करों की वन विभाग से मुठभेड़ हो गई। पिकअप को रोकने में चक्कर में वन कर्मचारियों को गोली चलानी पड़ी। वन कर्मचारियों की जांच में देवरिया जिले के रुद्रपुर के रामलक्षन निवासी रमाशंकर और शेषमणि का नाम सामने आया। इसके पहले भी तस्करों से मुठभेड़ के चलते जंगल में बंदूकें गरज चुकी हैं।

पहले भी आया था नाम

वन माफिया के रूप में चर्चित रमाशंकर कुसम्ही जंगल में एक्टिव है। लोकल मजदूरों की मदद से वह पेड़ कटवाता है। शुक्रवार की घटना की जांच में लगे पुलिस कर्मचारियों ने कहा कि इसके पहले भी रमाशंकर का नाम तस्करी में आ चुका है। वर्ष 2014 के दिसंबर माह में वन कर्मचारियों से मुठभेड़ में रमाशंकर और उसके सहयोगी धीरू का नाम आया था। वर्ष 2015 में रमाशंकर के अलावा सात नए तस्करों का सामने आया। वन कर्मचारियों का कहना है कि एक दर्जन से मुठभेड़ में देवरिया के तस्कर चिन्हित किए गए। सख्त कार्रवाई के अभाव में उनको तस्करी करने से रोका नहीं जा सका।

पास्ट हिस्ट्री

14 जनवरी 16: जंगल में मुठभेड़, लकड़ी छोड़कर तस्कर भागे, देवरिया निवासी तस्करों के इशारे पर मजदूरों ने पेड़ काटे।

28 अगस्त 2015: कुसम्ही जंगल में मुठभेड़, लकड़ी बरामद, देवरिया के तस्करों का नाम सामने आया।

28 सितंबर 2015. जंगल में पेड़ काटने की सूचना पर वन कर्मचारियों से मुठभेड़, फायरिंग में देवरिया की ओर तस्कर भागे।

27 नवंबर 2015: जंगल में मुठभेड़, तस्कर घायल, वन कर्मचारी को चोट लगी।

03 दिसंबर 2014: जंगल में वन कर्मचारियों से मुठभेड़ से रामलक्षन निवासी रमाशंकर, घटैला निवासी धीरू पकड़े गए।

जंगल में लकड़ी तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। वन विभाग अपने रिकार्ड में मामला दर्ज करता है। तस्करों के खिलाफ थानों में एफआईआर दर्ज कराई जाती है। वन माफियाओं की सूची बनाकर उन पर शिकंजा कसा जाएगा।

डॉक्टर जनार्दन शर्मा, डीएफओ गोरखपुर