- आज से यूपी बोर्ड की शुरू होनी हैं ऑनलाइन क्लासेस, ज्यादातर बच्चों के मोबाइल नंबर स्विच ऑफ

- डीआईओएस को भेजी गई रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, हजारों बच्चों को पिछड़ेगा सिलेबस

KANPUR (14 July) : शहर के माध्यमिक स्कूलों में टीचर्स का आना शुरू हो गया है, वेडनेसडे से ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने को लेकर स्कूलों में मीटिंग चल रही है। शहर में करीब 690 के करीब स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 80 हजार स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो स्मार्ट फोन यूज ही नहीं करते हैं। न ही इनके घरों में इनके पेरेंट्स और परिवार के किसी सदस्य के पास स्मार्टफोन है। ऐसे में इन स्टूडेंट्स को पढ़ाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्कूलों में प्रिंसिपल और टीचर के बीच इसी चीज को लेकर मंथन चल रहा हैं। ज्ञात हो कि माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी स्कूलों में 15 जुलाई से ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने का आदेश जारी किया है। शहर में क्लास एक से 12 तक करीब ढाई लाख स्टूडेंट्स शिक्षा ले रहे हैं।

स्मार्ट फोन नहीं होने के कारण

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अप्रैल में ही हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के स्टूडेंट्स को छोड़कर सभी क्लास के स्टूडेंट्स को प्रमोट कर दिया था। इसके बाद परिषद ने सभी स्कूलों में टीचर्स को ऑनलाइन क्लासेस शुरू कराने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर पेरेंट्स व स्टूडेंट्स को जोड़ने को कहा था। इसमें से करीब 50 परसेंट पेरेंट्स तो स्मार्ट फोन नहीं होने के कारण ग्रुप से नहीं जुड़ सके हैं। स्कूलों ने खानीपूर्ति करने के लिए उनसे उनके किसी दोस्त या रिश्तेदारों के नंबर लेकर उनको ग्रुप में जोड़ दिया है। ऐसे में ऑनलाइन क्लासेस में क्या पढ़ाया गया यह स्टूडेंट्स को कैसे पता चलेगा यह एक बड़ा सवाल बन गया हैं।

मोबाइल नंबर ही गलत निकले

गवर्नमेंट स्कूलों के रिकार्ड में जो नंबर दर्ज है उनको व्हाट्सएप में जोड़ा जाएगा। जब यह कवायद शुरू की गई तो कई बच्चों के पेरेंट्स के नंबर ही गलत निकले, या फिर उन्होंने नंबर ही चेंज कर लिया है। कई पेरेंट्स तो मोबाइल इंटरनेट नहीं होने की बात कह रहे है। आर्य कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या चंद्रकांता गेरा ने बताया कि व्हॉट्सएप स्कूल के टीचर्स जब ऑनलाइन पढ़ाई कराने के लिए नंबरों पर फोन कर पेरेंट्स से सम्पर्क कर रहे है तो ज्यादातर पेरेंट्स स्मार्ट फोन न होने या फिर इतना इंटरनेट न होने की बात कह रहे हैं। प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष और आर्यनगर इंटर कॉलेज के पि्रंसिपल डॉ। गिरीश कुमार मिश्र का कहना है कि पेरेंट्स बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए ही नहीं तैयार है। कई पेरेंट्स का कहना है जब स्कूल खुलेगा बच्चों को भेजना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि कई पेरेंट्स स्मार्ट फोन के साथ इंटरनेट का खर्च तक उठाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में काफी बच्चों को ऑनलाइन स्टडी में शामिल कराना एक चुनौती बन गया है।

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'' यह एक बड़ी प्रॉब्लम है इसके लिए बोर्ड ने पूरे सिलेबस को चार भागों में बांटा हैं, एक भाग की पढ़ाई स्वयं प्रभा और दूरदर्शन के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। दूसरा स्टूडेंट्स स्वयं पढ़ेंगे, तीसरा प्रोजेक्ट वर्क है और चौथे में स्टूडेंट्स को ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं है.''

सतीश तिवारी, डीआईओएस