कानपुर(ब्यूरो)। शहर का बिगड़ा ट्रैफिक सिस्टम और कदम पर कदम पर लगने वाला जाम स्मार्ट सिटी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसा नहीं है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए कमिश्नरेट पुलिस प्रयास नहीं कर रही है, लेकिन इसके बावजूद हालात सुधर नहीं रहे हैं। ट्रैफिक अराजकता में सबसे बड़ा हाथ है बेकाबू रफ्तार से बढ़ते ई रिक्शा। यही वजह कि बीते पांच सालों में चार गुना से अधिक ई-रिक्शे कानपुर में हो गए हैं। यह संख्या 50 हजार को भी पार कर चुकी है। इन कोई नियम, न गाइडलाइन न निर्धारित रूट। हर गली, सडक़, चौराहा और हाईवे तक इनका कब्जा है। इनकी अराजकता पर लगाम लगाने में प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस भी लाचार है। ऐसे अगर इन पर कंट्रोल नहीं किया गया तो स्थित विकराल होती जाएगी।

नहीं है कोई रूट निर्धारित
सिटी के ट्रैफिक को दुरुस्त करने के लिए रोड सेफ्टी समिति के पदाधिकारियों ने इन पर अंकुश लगाने के लिए कई नियम बनाए। जोकि फाइलों में ही दम तोड़ गए। इन नियमों कों लागू ही नहीं किया गया। डेढ़ वर्ष पूर्व तत्कालीन एडीसीपी ट्रैफिक राहुल मिठास ने सिटी में ई-रिक्शों के रूट निर्धारित करने की प्लानिंग बनाई थी। जिसके ट्रांसफर होने के बाद यह योजना भी फाइलों में अन्य योजनाओं की तरह दम तोड़ गई।

सीएम का आदेश भी फॉलो नहीं
प्रदेश के ट्रैफिक सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए सात महीने पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ई-रिक्शों का संचालन हाईवे पर न करने के आदेश दिए थे। यह भी कहा था कि ई रिक्शों को सिर्फ लिंक रोड पर चलाया जाए। लेकिन ये नियम आज तक लागू नहीं हो पाया है। वहीं रिक्शों की लगातार बढ़ती संख्या ट्रैफिक सिस्टम के लिए मुसीबत बनती जा रही है। कानपुराइट्स को डेली चौराहों पर इनकी वजह से जाम की समस्या से रूबरू होना पड़ रहा है।

5 साल में 12 से 40 हजार
आरटीओ आंकड़ों के मुताबिक, पांच साल पूर्व 2018 में सिटी में 12 हजार के लगभग ई-रिक्शा रजिस्टर्ड थे। जिसकी संख्या वर्तमान में 40 हजार के लगभग पहुंच गई है। यह तो उन ई-रिक्शों का आंकड़ा है। जो आरटीओ में रजिस्टर्ड है। सिटी में बिना रजिस्टर्ड भी हजारों की संख्या में ई-रिक्शा अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। अगर बिना रजिस्ट्रेशन दौड़ रहे ई रिक्शों को भी जोड़ लिया जाए तो इनकी संख्या करीब 70 हजार के आसपास है।

ई-रिक्शों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार आरटीओ प्रवर्तन टीम व ट्रैफिक विभाग अभियान चला कार्रवाई करता है। रूट निर्धारित करने के लिए रोड सेफ्टी कमेटी निर्णय लेंगी। विभिन्न डिपार्टमेंट के समन्वय से फैसला लिया जाएगा।
राजेश सिंह, आरटीओ, प्रशासन