ब्रिज का फुटपाथ जर्जर

आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने मौके पर पहुंचकर देखा तो ब्रिज का फुटपाथ दो जगह करीब दो-दो मीटर गिर चुका है। हाल ये है कि फुटपाथ का बाकी जर्जर हिस्सा भी धीरे-धीरे गिर रहा है। वहां पास में रहने वाले विक्रम गुप्ता ने आई नेक्स्ट रिपोर्टर को बताया कि दो दिन पहले भी फुटपाथ का एक हिस्सा गिर गया था। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि ब्रिज पूरी तरह खस्ताहाल चुका है।

टूट कर गिर रहे टुकड़े

दादा नगर रेलवे ओवरब्रिज करीब तीन बार पहले भी धंस चुका है। जिसकी वजह से ब्रिज की दो स्लैब तोडक़र नई डाली गई थीं। शायद इसके बाद किसी ने ब्रिज की सुध नहीं ली। इसी वजह से ब्रिज का फुटपाथ कई जगह से जगह से टूट गया है। रेलवे ऑफिसर्स ने फुटपाथ बनाने की बजाए दीवार बनाकर रास्ता जरूर बन्द कर दिया है। फुटपाथ व ब्रिज रोड में लगे गार्डर का आयरन भी काफी हिस्से तक गायब हो चुका है। जिससे गार्डर और ब्रिज रोड के किनारों की सडक़ दोनों साइड टूटती जा रही हैं। इससे भी कहीं भयावह स्थिति ब्रिज के निचले हिस्से की है। तीन साल पहले ब्रिज धंसने के कारण डाली गई दो नई स्लैब के अगल-बगल की स्लैब टूटती जा रही हैं। लटक रहे स्लैब के टुकड़े इसकी गवाही भी दे रहें हैं। इसकी वजह से स्लैब में लगीं आयरन रॉड साफ नजर आने लगी हैं। जिन पर जंग लगती जा रही है। जबकि इस ब्रिज की अहमियत का अन्दाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि गोविन्द नगर, रतनलाल, बर्रा, मनोहर नगर के लोग ही नहीं गुजरते हैैं।

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पहले भी धंस चुके हैं ब्रिज

दादा नगर-2010

गोविन्दपुरी-2009

घंटाघर-2008

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क्या कहती है नियमावली?

रेलवे की ब्रिज नियमावली के मुताबिक अगर ब्रिज में कहीं जंग भी लगी हो तो उसको तुरंत रिपेयर करना चाहिए। पर अगर दादानगर ब्रिज के रेलवे वाले हिस्से की बात करें तो स्थिति जंग से काफी आगे पहुंच चुकी है। नियमावली के मुताबिक ब्रिज में एक भी क्रैक नहीं होने चाहिए। इस ब्रिज में तो क्रैक क्या पूरा हिस्सा ही गिर गया है। पर फिर भी किसी को नहीं दिख रहा है। ब्रिज का समय-समय पर इंस्पेक्शन होना चाहिए। पर इसको देखकर तो नहीं लगता है कि अधिकारी ने इंस्पेक्शन कर इसकी स्थिति से किसी को अवगत कराया होगा। अगर कराया होता तो स्थिति इतनी खतरनाक नहीं होती।

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पता नहीं कब बना है?

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि किसी के पास इसकी कोई डिटेल नहीं है। एक रेलवे के ब्रिज डिपार्टमेंट के एक ऑफिसर्स ने बताया कि ये ब्रिज कब बना है इसकी जानकारी डिपार्टमेंट के पास नहीं है। उनके मुताबिक इस ब्रिज की हालत को देखते हुए इसको तत्काल बंद करने के लिए ऑफिसर्स को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है लेकिन फिर भी पता नहीं इसको क्यों बंद नहीं किया गया?

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इन सवालों का उत्तर कौन देगा?

1. अगर ब्रिज की मियाद पूरी हो गई है तो इसको बंद क्यों नहीं किया जा रहा है?

2. क्या इसको बंद करने के बाद किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर डिपार्टमेंट ने विचार किया है?

3. अगर ब्रिज की मरम्मत का काम किया जा रहा है तो इस पर से आवागमन क्यों नहीं रोका जा रहा है?

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