--सबसे पहले कानपुर में और फिर वाराणसी में लगेंगे क्रिट्सनम सिस्टम

-- 2021 तक गंगा और यमुना में करीब 20 सिस्टम लगाए जाएंगे

KANPUR:

नार्थ इंडिया की प्रमुख नदियों की सेहत का हाल अब क्रिट्सनम टेक्नोलॉजी बताएगी। पहले चरण में तीन साल के अंदर गंगा व यमुना में क्रिट्सनम टेक्नोलॉजी के 20 सिस्टम लगाए जाएंगे। सिस्टम की मदद से गंगा में आक्सीजन का लेवल, किस रीजन में गंदी है, गंगा में पीएच का लेवल क्या है और गंगा की कंडक्टिविटी जैसी तमाम इंफर्मेशन मोबाइल पर मिल जाएगी। इसे ट्विटर हैंडल से भी कनेक्ट किया जा सकेगा। इण्डो यूएस के साथ गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का डिपार्टमेंट साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ा है।

मोबाइल पर हर पल का डेटा

आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सीनियर प्रो। डॉ। विशाख भट्टाचार्य ने बताया कि क्रिट्सनम टेक्नोलॉजी से लैस सिस्टम उत्तर भारत की प्रमुख नदियों में लगाकर उनकी सेहत का पता लगाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया है। देव प्रयाग में यह सिस्टम लगा दिया गया है। क्रिट्सनम टेक्नोलॉजी को जीएसएम बेस्ड मोबाइल से कनेक्ट कर दिया जाएगा। जो कि हर टाइम गंगा की सेहत की रिपोर्ट देगा। यही नहीं क्रिट्सनम टेक्नोलॉजी सिस्टम में जो भी डेटा मोबाइल पर जाएगा, वह स्टोर भी रहेगा।

पांच साल में सभी नदियों में लगेगा

वुडशील ओसानोग्राफिक यूनिवर्सिटी यूएसए भी इस प्रोजेक्ट में काम कर रही है। गंगा व यमुना नदी में इयर 2021 तक 20 सिस्टम लगा दिए जाएंगे। इसकी शुरूआत कानपुर से होगी। इसके बाद वाराणसी के अलावा गोमती, शारदा। काली नदी, पांडव नदी समेत प्रदेश की प्रमुख नदियों में एक से दो सिस्टम लगाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट पर 2022 तक काम किया जाएगा।

'गंगा सहित नार्थ इंडिया की नदियों के पानी की सेहत को चेक करने के लिए इण्डो यूएस प्रोजेक्ट के तहत क्रिट्सनम टेक्नोलॉजी से लैस सिस्टम लगाए जाएंगे। सबसे पहले कानपुर और वाराणसी में गंगा और प्रयागराज में यमुना नदी में इस सिस्टम को लगाया जाएगा। आईआईटी कानपुर इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहा है।

- प्रो आशुतोष शर्मा, सेक्रेट्री डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया