शाही जोड़े ने सबसे पहले इन तस्वीरों को प्रकाशित करने वाली फ्रांसीसी पत्रिका 'क्लोजर' पर निजता का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ मुकदमा किया है। एक आयरिश अखबार और एक इतालवी पत्रिका भी इन तस्वीरों को प्रकाशित कर चुके हैं।

फ्रांसीसी कानून के अनुसार बिना अनुमति के किसी की तस्वीरें प्रकाशित करना अपराध है, लेकिन क्लोजर के मालिकों की दलील है कि अगर किसी व्यक्ति की तस्वीरें सार्वजनिक स्थल पर ली गई हैं तो उन्हें प्रकाशित करना वैध है और इससे निजता का उल्लंघन नहीं होता है।

राजकुमारी की जासूसी

अगर फ्रांसीसी पत्रिका पर लगे निजता के उल्लंघन के आरोप साबित हो गए तो इस पत्रिका को बंद किया जा सकता है। लेकिन इस पत्रिका के पास ये तस्वीरें आईं कहां से।

दरअसल केट की ये तस्वीरें पिछले दिनों उस वक्त ली गईं जब शाही जोड़ा फ्रांस में एक किले 'शातेयू ऑफ लॉर्ड लिनली' में छुट्टियां मना रहा था। लिनली ब्रितानी महारानी के भतीजे हैं।

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केट अपने पति विलियम के साथ धूप सेंक रहीं थीं कि उन्हें कैमरे में कैद कर लिया गया। यह नक्शा बताता है कि कैसे फोटोग्राफर ने काफी दूर से शाही जोड़े की तस्वीरें उतारीं.

काफी दूर से ली गईं तस्वीरें.

ये तस्वीरें ‘पापारात्सो’ यानी नामचीन हस्तियों की तस्वीरें उतारने वाले किसी स्वतंत्र फोटोग्राफर ने ली हैं। पहली नजर में इन तस्वीरों को लेना असंभव दिखता है। लेकिन इससे ये भी पता चलता है कि ये विशेष आग्रह या दबाव में खींची गई हैं।

कानूनी पेंच

पेरिस में बीबीसी संवाददाता क्रिस्टियन फ्रेज़र का कहना है कि शाही जोड़े की शिकायत में एक फोटोग्राफर का नाम भी दिया गया है। फ्रेज़र का कहना है कि ज्यादातर वकील इस बात से सहमत हैं कि कड़े फ्रांसीसी कानूनों के तहत ये तस्वीरें साफ तौर पर निजता का उल्लंघन करती हैं।

ऐसे में इस मुकदमे में फैसला शाही जोड़े के हक में जा सकता है और फ्रांसीसी पत्रिका को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ये तस्वीरें एक आयरिश अखबार और क्लोजर की सहयोगी इतालवी पत्रिका में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। आयरिश अखबार के संपादक को जहां निलंबित कर दिया गया हैं, वहीं इतालवी पत्रिका ची के संपादक अपने फैसले का बचाव करते हैं।

फैसले का बचाव

संपादक अलफोंसो सिगनोरिनी कहते हैं, “जवाब सीधा है। ये एक अहम खबर है। तस्वीरें प्रकाशित क्यों की जाए? क्योंकि हम ब्रिटेन के भावी शासकों के बारे में बात कर रहे हैं और ये बात हमारे पाठकों में दिलचस्पी पैदा करती है.”

क्लोजर पत्रिका ने भी इन तस्वीरों को प्रकाशित करने के अपने फैसले का ये कहते हुए बचाव किया था कि जिन तस्वीरों को प्रकाशन के लिए चुना गया, वो किसी तरह से खराब नहीं हैं।

लेकिन शाही परिवार के अधिकारियों ने कहा था कि ये फ्रांसीसी अभियोजकों को तय करना है कि क्लोजर पत्रिका के खिलाफ दीवानी या फौजदारी किस मामले में कार्यवाही करनी है। कैम्ब्रिज के ड्यूक और डचेस, फिलहाल दक्षिण पूर्वी एशिया और दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में छुट्टियां मना रहे हैं।

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