कानपुर(ब्यूरो)। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने प्रतिबंधित संगठन पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) के सक्रिय सदस्य मुनीर आलम को मंगलवार को मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन से पकड़ा था, जिसे बुधवार को लखनऊ स्थित विशेष कोर्ट में पेश किया गया। एटीएस के प्रार्थनापत्र पर कोर्ट ने छह जुलाई से मुनीर की दस दिनों की पुलिस रिमांड स्वीकृत की है। पहले दिन की पूछताछ में मुनीर ने कानपुर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। मुनीर ने एटीएस के रिमांड रूम में बताया कि उसके संपर्क में कानपुर का हयात जफर हाशमी था। हयात जफर हाशमी के नंबर भी एटीएस को मुनीर के मोबाइल में मिले हैं। दोनों ही पीएफआई के सक्रिय सदस्य हैं। मुनीर ने एटीएस को बताया कि तीन जून 2020 के उपद्रव की तैयारी हयात जफर हाशमी ने पहले से कर रखी थी। चकेरी के एक होटल में मुनीर ने इस सभी को रोका था। उपद्रव के दो घंटे पहले ही वह सभी को लेकर यतीमखाना आया था।

पथराव में मुंह बांध कर आगे आई थी टीम

एटीएस सूत्रों की माने तो चंद्रेश्वर हाते में पथराव के दौरान कुछ सीसीटीवी फुटेज सामने आई थीं। इन फुटेज में मुंह बांधे जिन लोगों की पहचान नहीं हो पाई थी, उनमें मुनीर और उसके साथी थे। इनकी तलाश कानपुर कमिश्नरेट पुलिस को काफी दिन से थी। एटीएस की इंट्रोगेशन में मुनीर के ये बयान हयात जफर हाशमी की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। हालांकि बयानों को आधार बना कर कानपुर कमिश्नरेट पुलिस इसकी जांच कर सकती है। मुनीर से मिले इनपुट के मुताबिक 2024 के चुनाव की तैयारी जहां पॉलीटिकल पॉर्टीज कर रही हैं वहीं इस मौके का पूरा फायदा आतंकी संगठन भी उठाना चाहते हैं। जानकारी मिली है कि फेस्टिवल सीजन में इसका ताना बाना बुना जाना शुरू कर दिया जाएगा।

22 दिसंबर 2022 से थी मुनीर की तलाश

एटीएस अधिकारियों के अनुसार मेरठ से 22 दिसंबर, 2022 को पीएफआई के सक्रिय सदस्य मौलाना शादाब अजीज काशमी, मौलाना साजिद, मौलाना इस्लाम कासमी व मुफ्ती शहजाद को गिरफ्तार किया गया था। इनके विरुद्ध मेरठ के खरखौदा थाने में विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम समेत अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसकी विवेचना एटीएस कर रही है। चारों आरोपियों ने पूछताछ में अपने सक्रिय साथी मुजफ्फरनगर के दधेड़ूकला गांव निवासी मुनीर आलम का नाम उगला था। मुनीर पीएफआई पर प्रतिबंध लगने के बाद भी उसकी गतिविधियों के संचालन में जुटा था और गोपनीय योजनाओं पर काम कर रहा था। उसे उत्तर प्रदेश में पीएफआई की गतिविधियों को बढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया था। जिन जिलों में मुनीर के साथी मौजूद हैं, उनमें कानपुर भी है।

2012 में पास की थी इंटर की परीक्षा

एटीएस अधिकारियों का कहना है कि मुनीर ने वर्ष 2012 में मुजफ्फरनगर के इस्लामिया इंटर कॉलेज से इंटर पास किया था और इसके बाद तीन साल तक घर पर ही रहा। फिर उसने मेरठ के चौधरी चरण ङ्क्षसह विश्श्वविद्यालय में एलएलबी में प्रवेश लिया था। वहीं पर मौलाना शादाब के संपर्क में आने के बाद वह पीएफआई से जुड़ गया था। शादाब का मुनीर के गांव में भी आना-जाना था। मुनीर ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह कई बार दिल्ली के शाहीनबाग स्थित पीएफआई मुख्यालय जा चुका है। यही उसकी मुलाकात हयात जफर हाशमी से हुई थी। 2017 में उसे पीएफआई उत्तर प्रदेश एडहाक कमेटी का सदस्य बनाया गया था। उसे पीएफआई से रकम भी मिलती थी।

जानिए क्या है पीएफआई

पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को एक चरमपंथी इस्लामी संगठन माना जाता है। पीएफआई का गठन 2006 में एनडीएफ यानी नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट के मुख्य संगठन के तौर पर किया गया था। इसका मुख्यालय दिल्ली में है.एनडीएफ के अलावा पीएफआई ने कई राज्यों के संगठनों के साथ मिलकर अपनी पकड़ मजबूत की है। पीएफआई का विवादों से पुराना नाता है। 2012 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने पीएफआई की गतिविधियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। एनआईए ने पीएफआई को कई मामलों में नामजद किया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यूपी में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, आजमगढ, कानपुर और सीतापुर क्षेत्रों में सक्रिय रहा है।

&& मुनीर के कानपुर कनेक्शन की जानकारी उसके बयानों में मिली है। जल्द ही टीम उसे लेकर कानपुर जाकर बयानों की जांच करेगी, जिसकी जानकारी कानपुर कमिश्नरेट पुलिस को भी दी जाएगी.&य&य

सुशील कुमार, एएसपी एटीएस