कानुपर(ब्यूरो)। किभी भी व्यक्ति को पद, प्रतिष्ठा और इज्जत कमाने में सालों लग जाते हैं। फिर वह टीचर हो, डॉक्टर, पुलिस ऑफिसर या कोई भी उच्च पद पर आसीन व्यक्ति। लेकिन, आपके घर, ऑफिस या आसपास की कोई भी महिला मिनटों में सालों में कमाई गई आपकी प्रतिष्ठा को मिट्टी मिला सकती है। यानि सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप। इसके बाद आप पुलिस और कचहरी के चक्कर काटते हुए खुद को निर्दोष साबित करें। जांच में आरोप झूठे भी निकले तो गई हुई इज्जत वापस नहीं मिलती है। इस तरह के मामले लगातार आ रहे हैं। हालात को देखते हुए शासन स्तर से एक निर्णय लिया गया है जो लोगों को इस तरह की बदनामी और गिरफ्तारी से बचाएगा।


निजी मुचलके पर
अगर आपकी महिला कुलीग या आपकी फीमेल स्टूडेंट या आपसे शिकायत करने वाली महिला आप पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाकर आपके खिलाफ थाने में केस दर्ज करा देती है। और आपको लगता है कि आरोप झूठे हैं तो बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। पुलिस कानून के मुताबिक आपकी अरेस्टिंग दिखाने के बाद आपको थाने से ही निजी मुचलके पर जमानत दे देगी। इसके बाद जिले के सीनियर ऑफिसर्स और आपके संस्थान के लोगों की सहमति से एक कमेटी गठित की जाएगी। ये कमेटी मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच करेगी। इस जांच रिपोर्ट में जो तत्थ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक ही कार्रवाई आगे बढ़ेगी। जल्द ही इसका शासनादेश भी जारी किया जाएगा।

कई मामले आ चुके हैैं सामने
सीनियर आईपीएस पर सेक्सुअल हैरसमेेंट के तीन मामले सामने आ चुके हैैं। पीपीएस स्तर के अधिकारियों पर भी इस तरह के आरोप लग चुके हैैं। इसके अलावा इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाहियों पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप आम बात हो गई है। कुछ महीने पहले ही एक संस्थान के प्रोफेसर पर भी इस तरह के आरोप लगाए गए थे। डॉक्टर और मेडिकल लाइन से जुड़े लोगों पर इस तरह के आरोप लगना भी आम बात हो गई है। पॉश इलाकों के घरों में काम करने वाली मेट्स भी रुपये की मांग पूरी न होने पर हैरेसमेंट के आरोप लगाने के मामले सामने आए हैैं। एक बड़ा वर्ग इस हैरेसमेंट का शिकार हो रहा है।

छात्रा ने प्रोफेसर पर लगाए आरोप
अपनी और परिवार की इज्जत बचाने के लिए लोग चुपचाप इनकी मांग पूरी कर देते हैैं और मुक्ति पा लेते हैैं। वहीं कुछ लोग अपनी ऐंठ में सोसाइटी में अपनी हंसी और हानि दोनों करा लेते हैैं। स्कूल, कोचिंग और बड़े संस्थानों में इस तरह के मामले सामने आते हैैं। एक सप्ताह पहले ही एक स्कूल की शिक्षिका ने संचालक पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। मामला थाने की चौखट पर आते आते रफा दफा हो गया। इसी तरह का ताजा मामला शहर की एक यूनिवर्सिटी में भी सामने आया। जिसमें प्रोफेसर पर छात्रा ने बेहद संगीन आरोप लगाए हैं।

मिलेगी राहत
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के मुताबिक, सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायतें अक्सर सामने आती हैैं। जिसकी वजह से विभागीय जांच के साथ साथ पीडि़त को समाज की बातेें भी बर्दाश्त करनी पड़ती हैैं। कभी कभी ऐसा भी हो जाता है कि पीडि़त मजबूरी में सुसाइड कर लेता है। इस शासनादेश से उन लोगों को राहत मिलेगी, जिन पर गलत तरीके से आरोप लगाए जाते हैैं और स्वयं को निर्दोष साबित करने का कोई तरीका इनके पास नहीं होता है।
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सेक्सुअल हैरेसमेंट को लेकर शासन ने कुछ निर्णय लिए हैैं। जल्द ही शासनादेश जारी किया जाएगा। इससे लोगों को लाभ मिलेगा।
प्रशांत कुमार, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर