कानपुर (ब्यूरो)। इंडस्ट्रियल सिटी कानपुर का पौराणिक महत्व भी कम नहीं है। सावन के महीने में भोले की भक्ति में सारा देश रमा है तो इस शहर में भी नजारे काशी से कम नहीं हैं। शहर में भगवान भोलेनाथ के कई मंदिर हैं। इनमें अधिकांश मंदिर तो ऐसे हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तरह कल्याणपुर थाने के पीछे भी सोमनाथ मंदिर है। इस मंदिर को कुछ आक्रमणकारियों ने तोड़ दिया था। एक-दो नहीं, बल्कि तीन बार यह मंदिर तोड़ा गया। मंदिर में टूटी हुई मूर्तियां आज भी इसकी गवाह हैं।

खुदाई में निकले थे शिवलिंग
मंदिर में बीते 45 साल से रहने वाले सुरेश ने बताया कि चरवाहों द्वारा की गई खुदाई में यहां पांच शिवलिंग निकले थे। चार छोटे शिवलिंग मंदिर के चार कोने पर स्थापित हैं, जबकि भगवान सोमनाथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। मंदिर में नीलकंठ और अमरनाथ भगवान के दर्शन भी होते हैं। करीब 800 सौ वर्ष पुराने इस मंदिर के पीछे ऐतिहासिक तालाब है। सोमनाथ भगवान के जलाभिषेक और अभिषेक में जो भी दूध, दही, घृत शहद आदि अर्पित किया जाता है, वह तालाब के जल में मिलता है। भक्तों में विश्वास है कि तालाब में स्नान करने से कुष्ठ रोग समेत कई असाध्य रोग भी ठीक हो जाते थे। हालांकि अब तालाब की सफाई ना होने के चलते उसमें स्नान आदि का कार्य बंद है।

भक्त चढ़ाते थे अन्न
पुराने समय में आसपास के 50 से ज्यादा गांव से किसान आकर अपने खेत से निकले अन्न को सबसे पहले बाबा को चढ़ाते थे। किसानों का मानना था कि इस मंदिर में अन्न को चढ़ाने से उनकी फसल की प्राकृतिक आपदा से बचत होती है और बरक्कत भी होती है। समत बीतने के साथ साथ किसानों ने आना तो बंद कर दिया लेकिन अभी कुछ किसान मंदिर में आकर अन्न को चढ़ाते है।

21 सोमवार के दर्शन से होती है संतान प्राप्ति
मंदिर में इस समय सुबह और शाम भक्तों की भीड़ लगती है। यहां दर्शन करने वालों का मानना है कि 21 सोमवार दर्शन करने से यहां नि:संतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है। मनोकामना पूरी होने पर भक्तों ने बाबा के शिवलिंग को चांदी से मढ़वा दिया है। इसके अलावा कई भक्तों ने अलग अलग काम भी कराए है।

पूजा अर्चना करते हैं
इस मंदिर में यदि आप रुद्राभिषेक या कोई अन्य पूजा आदि कराना चाहते है तो उसका कोई शुल्क नहीं देना होगा। आपको सिर्फ अपना सामान लेकर आना है और पूजा अर्चना करनी है। आस्था से जो भी आप महंत को दे, वह मान्य होगा।
मंदिर में हम 13वीं पीढ़ी है जो कि गद्दी को संभाल रहे है। यहां के शिवलिंग को स्थापित नहीं किया गया है। वह स्वयं खुदाई में निकले है। भक्त जो भी मन से मांगते हं बाबा उनकी मनोकामना को पूरा करते है।
- अंकिता पुरी, महंत