लखनऊ (ब्यूरो)। सभी गाडिय़ों में एचएसआरपी लगाना जरूरी हो गया है। इसके लिए वाहन स्वामी को ऑनलाइन अप्लाई करना पड़ता है। कई वेंडर्स इसमें भी खेल कर रहे हैं। सीतापुर, बस्ती जैसे जनपदों से इसकी अधिक शिकायतें आ रही हैं। कुछ स्थानीय दुकानों और फुटपाथों पर लगी दुकानों में भी एचएसआरपी वाहनों में लगाई जा रही है।

सजग रहने का निर्देश
अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन वीके सोनकिया के मुताबिक इन जिलों में जिस तरह हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेटें वाहनों पर लगायी जा रही हैं, वो पूरी तरह अनाधिकृत है। ऐसे में उन्होंने शुक्रवार को परिवहन विभाग मुख्यालय से सभी प्रवर्तन व प्रशासन के आरटीओ व एआरटीओ अधिकारियों को लेटर लिखते हुए अलर्ट रहने का निर्देश दिया है कि वो ऐसे फर्जी नंबर प्लेटों को लेकर सजग रहें। क्योंकि इन फर्जी एचएसआरपी प्लेटों का प्रयोग करते हुए अराजक तत्वों द्वारा अपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जा सकता है।

चालन होने पर खुलता है खेल
ई-चालान होने के बाद वाहन स्वामी को इनके फर्जी होने का पता चलता है। इसे रोकने के लिए जांच और एमवी एक्ट के तहत कार्रवाई करने की बात की गई है। साथ ही पुलिस की मदद लेते हुए मुकदमा दर्ज कराते हुए इसकी जानकारी मुख्यालय को प्रेषित की जाएगी।

सिर्फ ऑनलाइन व्यवस्था
आरटीओ प्रवर्तन लखनऊ संदीप पंकज ने बताया कि एचएसआरपी केवल ऑनलाइन अप्लाई करने पर ही मिलती है। जिसपर यूपी गर्वनमेंट का होलोग्राम और स्पेशल बार कोड लिखा होता है। जिसे कोई और जनरेट नहीं कर सकता है। इसे अधिकृत डीलर के ही यहां ही लगवाया जा सकता है। अगर कोई ऑनलाइन होम डिलीवरी करवाता है तो उसे एक्स्ट्रा चार्ज देना होता है। लेकिन, जो व्यक्ति प्लेट लेकर आता है वही उसे आपके सामने लगाता है। जिसके बाद उसे गूगल लोकेशन लोड की जाती है। जिससे पता चल सके कि सही वाहन पर एचएसआरपी लगाई गई है।

असली-नकली की पहचान मुश्किल
संदीप पंकज ने बताया कि कई लोग फर्जी तरीके से होलोग्राम और कोड नंबर की नकल उतारकर इसे असली एचएसआरपी की तरह बेच देते हैं। जिससे असली-नकली में फर्क करने में दिक्कत आती है। अभी ऐसी कोई डिवाइस नहीं आई है जिसे स्कैन कर पता लगाया जा सके कि एचएसआरपी असली है या नकली।

इस तरह चलता है पता
गाड़ी में लगी एचएसआरपी असली है या नकली इसकी जांच के लिए वाहन का नंबर विभागीय पोर्टल पर डाला जाता है। पोर्टल पर नंबर डालते ही पता चल जाता है कि संबंधित वाहन के लिए एचएसआरपी जनरेट हुआ है कि नहीं। अगर नंबर प्लेट नकली मिलती है तो उसी के आधार पर एक्शन लिया जाता है। इस तरह के खेल से बचने के लिए ऑनलाइन आर्डर करके ही गाड़ी में एचएसआरपी लगवाएं।

टोल प्लाजा से मिली शिकायतों के आधार पर स्पष्ट है कि अवैध वेंडरों की ओर से फर्जी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाई जा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया है।
- वीके सोनकिया, अपर परिवहन आयुक्त, प्रवर्तन