लखनऊ (ब्यूरो)।
केस 1
जून 2021 में लखनऊ के मेडिसिन मार्केट में दो करोड़ की नकली दवाएं पकड़ी गई थीं। यह कार्रवाई कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच टीम द्वारा की गई थी। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया था।

केस 2
जुलाई 2021 में एसटीएफ, अमीनाबाद पुलिस और ड्रग विभाग द्वारा संयुक्त छापेमारी में नकली सीरप बरामद किया था। करीब पांच लाख का माल था। नकली सीरप रुड़की से बनकर आया था।

केस 3
वर्ष 2015 में राजधानी के अलीगंज में एक मेडिकल स्टोर पर नकली एंटिबायटिक जिफी पकड़ी गई थी। ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा इस मेडिकल स्टोर पर छापा मारा गया था।

यह चंद केस यह बताने के लिए काफी हैं कि लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में नकली दवाओं का गोरखधंधा तमाम सख्तियों के बावजूद बदस्तूर जारी है। जिसका खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ता है। क्योंकि सस्ते के चक्कर में मरीज दवा किसी भी दुकान से खरीद लेता है। जो बाद में नकली दवा निकलती है। जिससे उसके शरीर में कई साइड इफेक्ट तक होने लगते है।

ज्यादा छूट के नाम पर खेल
लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता विकास रस्तोगी के मुताबिक नकली दवा के कारण बिजनेस को काफी नुकसान होता है। खासतौर पर नकली दवा के कारोबारी इसका ध्यान रखते हैं कि कौन सी दवा की डिमांड ज्यादा है। उसी दवा को लेकर नकली दवा को सस्ते दरों पर बेचते है। जैसे अगर कोई दवा 50 रुपये की है तो उसे 30-35 रुपये में बेच देते है। खासतौर पर ऐसी नकली दवाओं पर 20 पर्सेंट से अधिक तक की छूट दी जाती है। मरीज सस्ते के बहकावे में आकर शिकार बन जाते हंै। आजकल ऑनलाइन दवा मंगवाने का भी ट्रेंड चल निकला है। जिसमें कई ऐसी दवा दुकानें शामिल हैं जो इस तरह के खेल मेें शामिल रहती हैं। खासतौर पर छोटे-छोटे मेडिकल स्टोर नकली दवा के कारोबारियों से मिले रहते हंै।

असली खिलाड़ी पकड़ से दूर
दवा व्यापारियों के मुताबिक प्रदेश में नकली दवाओं के कारोबार के बढऩे का बड़ा कारण यह है कि नकली दवाएं तो पकड़ी जाती हैं लेकिन इसका कारोबार करने वाले गिरफ्त में नहीं आते हैं। यही कारण है कि यह गंदा कारोबार बंद नहीं हो रहा है।

ऐसे पहुंचाते हैं नकली दवा
एसटीएफ और एफएसडीए की पूछताछ में पकड़े गये लोगों के मुताबिक नकली दवाएं हिमाचल, राजस्थान से विभिन्न शहरों से होते हुए लखनऊ, वाराणसी, बरेली व मेरठ आदि शहरों में भेजी जाती हंै। इन्हें ट्रेन, बस या प्राइवेट टैक्सी से भेजा जाता है। दवा ले जाने वालों से उनके असली नाम से बात भी नहीं की जाती है। मोबाइल पर ये दूसरे नाम से बात करते हैं। इसमें उन्हें बड़ा कमीशन दिया जाता है। यूपी होते हुए नकली दवाएं पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और तमिलनाडु तक पहुंचाई जाती हैं।

लगातार हो रही पड़ताल
ड्रग इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव के अनुसार नकली दवाओं के सिंडिकेट के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। कभी सूत्रों के सूचना तो कभी कंपनियों की शिकायत पर एक्शन लिया जा रहा है। नकली दवाएं पकड़ी भी जा रही हैं। नकली दवा की अगर किसी को जानकारी या सूचना मिले तो उसे विभाग तक पहुंचाने का काम करें।

अधिक छूट के लालच में नकली दवाएं बेची जा रही हैं। ऑनलाइन दवा के नाम पर भी कुछ लोग यह काम कर रहे हैं। इसपर अधिकारियों को निगाह रखनी चाहिए।
- विकास रस्तोगी, प्रवक्ता, लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन