लखनऊ (ब्यूरो)। भविष्य में देवदार के पेड़ों की संख्या कम हो सकती है। क्लाइमेट चेंज के कारण देवदार के पेड़ों की ग्रोथ पर असर पड़ेगा। शहर के बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के वैज्ञानिकों ने शोध के जरिए देवदार के पेड़ों पर जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव का पता लगाया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शोध इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि देवदार कॉमर्शियल पेड़ है। भविष्य में इसकी संख्या घटने पर आर्थिक नुकसान होगा, दूसरा इससे जंगल कम होने से जैव विविधता पर असर पड़ेगा।

लगातार मौसम बदलने से घट रही संख्या

बीएसआईपी के साइंटिस्ट डॉ। मयंक शेखर ने बताया कि देवदार या हिमालयन सेडार हिमालय रीजन का एक बहुत महत्वपूर्ण पेड़ है। यह हायर, मिडिल व लोअर रीजन में मिलता है। ग्लोबल वार्मिंग से मिडिल व लोअर रीजन में इसकी ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। डॉ। शेखर बताते हैं कि हमने तीनों रीजन से पेड़ों पर का सैम्पल लिया है। इस स्टडी में पता चला है कि हिमालय के मिडिल व लोअर जैसे हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में मिलने वाले देवदार के पेड़ों को ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्ट्रेस होता है। तापमान का बढऩा, बारिश में कमी के कारण उनको बढऩे के लिए पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में उनकी ग्रोथ अनुकूल नहीं है। इनकी संख्या में कमी आ सकती है।

पश्चिमी विक्षोभ का मिल रहा फायदा

डॉ। मयंक शेखर ने बताया कि हायर हिमालय रीजन के देवदार के पेड़ों पर इसका सकारात्मक असर दिख रहा है। उनका कहना है कि लगातार पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमालय रीजन में हो रहे स्नो फॉल के कारण पेड़ों को पर्याप्त नमी मिल रही है। ऐसे में हायर रीजन के देवदार के पेड़ों की ग्रोथ बढ़ेगी।

क्या पड़ेगा असर

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर देवदार के पेड़ों की संख्या कम हुई तो टिम्बर के कारोबार पर असर पड़ेगा। ये कॉमर्शियल पेड़ हैं, जो लकड़ी के घर वगैरह बनाने से लेकर फर्नीचर के काम में आते हैं। ऐसे में वहां पर आर्थिक समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा देवदार के पेड़ हिमालय रीजन की बायोडायवर्सिटी को बनाए रखने में भी अहम रोल प्ले करते हैं ऐसे में इनकी संख्या कम होने से बायोडायवर्सिटी पर प्रभाव पड़ेगा।

कहां होगा फायदा

शोध से सरकार को जैव विविधता बनाए रखने में आसानी होगी। वह इस शोध के जरिए जगह चिन्हित कर सकते हैं कि कहां कौन से पौधों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। यह शोध एल्सवेयर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस टीम में डॉ। मयंक शेखर के अलावा राजेश जोशी, रुपेश ध्यानी, अमालावा भट्टाचार्य, परमिंदर सिंह रनहोत्रा शामिल रहे।