मेरठ ब्यूरो। सिटी की साफ-सफाई के लिए निगम की ओर से भारी भरकम वेतन खर्च होता है। बावजूद इसके, शहर का सीन कुछ अलग है। हालत यह है कि सुबह हो या शाम शहर की सडक़ों से लेकर नाले नालियों में गंदगी का अंबार आम सी बात है। शहर की इस गंभीर समस्या पर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट छह दिन के कैंपेन की शुरुआत की है। इन छह दिनों में हम सफाई व्यवस्था से जुड़े हर ताने-बाने को समझेंगे। यह भी जानने की कोशिश करेंगे आखिर निगम की प्लानिंग में कहां दिक्कतें आ रही हैं।

रैकिंग तो सुधर रही, सफाई नहीं
गौरतलब है कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में मेरठ को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 15वें स्थान पर रहा। वहीं इस रैंकिंग सूची में 10 लाख से अधिक आबादी वाले प्रदेश सात शहरों में मेरठ नगर निगम को दूसरा स्थान मिला था। जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में 21वीं रैंक हासिल की थी। साथ ही नगर निगम को जीएफसी (गार्बेज फ्र सिटी) वन स्टार और ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) प्लस प्लस प्रमाणपत्र भी हासिल हुआ था। लेकिन इन सब तमगों के बाद भी शहर की सडक़ों पर जगह जगह गंदगी आम सी बात है।

900 मीट्रिक टन कचरे से परेशानी
खास बात यह है कि शहर में 900 मीट्रिक टन कचरा प्रतिदिन उत्सर्जित होता है। जिसको मंगतपुरम, गांवडी के बाद अब लोहियानगर में एकत्र किया जा रहा है। वहीं फ्रेश कूड़े के निस्तारण का प्लांट पिछले साल से दो कंपनियों के चयन के विवाद में अटका हुआ है। वहीं इस साल नगर निगम को 15 वें वित्त आयोग के मद से 72 करोड़ रुपये पहली किस्त में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मिले थे। इसके अलावा कूड़े के निस्तारण के नाम पर गांवड़ी में 15 टन प्रति घंटे व लोहिया नगर में 30 टन प्रति घंटे का कूड़ा निस्तारण प्लांट पहले से है। इसके अलावा भी शहर में जगह जगह अस्थाई कूड़ा स्थलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

नालों में पानी से ज्यादा गंदगी
गार्बेज फ्री का प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी स्थिति यह है कि लोहियानगर और मंगतपुरम में लगे कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई लगातार बढ़ रही है। शहर के अधिकतर सभी मोहल्लों में अस्थाई खत्ते के नाम पर गंदगी का ढेर लगा हुआ है। ओडियन नाले, आबू नाले, मोहनपुरी नाले, कमेला नाला समेत शहर के सभी प्रमुख नालों में गंदगी का ढेर लगा हुआ है।

यह है स्थिति
- नगर निगम के पास कूड़ा निस्तारण प्लांट नहीं है। सिर्फ सेग्रीगेशन हो रहा है।

- शहर में रोजाना 900 मीट्रिक टन निकलता है कूड़ा

- लोहिया नगर में कूड़ा डंप हो रहा है। डंपिंग ग्राउंड भी ओवर फ्लो हो चुका है।

- 300 से अधिक छोटे-बड़े खुले नाले हैं। इनमें कूड़ा, गोबर बहाया जा रहा है।

- गंदगी और सिल्ट में बरसात में नाले शहर को डुबोते हैं।

- शहर के बाजारों में जगह जगह डस्टबिन या तो ओवर फ्लो रहते हें या फिर हैं ही नही।

- कूड़ा एकत्र करने के बजाए जगह जगह ढेर लगाया जा रहा।

- मंगतपुरम, गांवडी के बाद अब लोहियानगर में भी कूड़े का पहाड़ लग चुका है।

स्वच्छता में लगातार सुधार हो रहा है। सफाई कर्मचारियों की टीम को समय से फील्ड में भेजा जाता है और औचक निरीक्षण भी किया जा रहा है।
- हरपाल सिंह, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी

स्वच्छता की हकीकत देखनी है तो शहर की मलिन बस्तियों में जाएं।के नगर निगम में शामिल हैं लेकिन सुविधा एक भी नही है। गंदगी पसरी रहती है।
- प्रदीप

कूड़ा कलेक्शन अगर शत प्रतिशत होता तो गलियों और खुले मैदानों में कूड़े के ढेर क्यों दिखते। बाजार में कूड़े दान ओवर फ्लो हैं आखिर कहां सफाई हो रही।
- अंकित

सिर्फ कागजों में नगर निगम की योजनाएं कूड़ा कलेक्शन और साफ सफाई हो रही है। हकीकत में निगम के अधिकारी अपने एसी कमरों से बाहर निकलकर देखें तो सच्चाई दिखाई दे।
- शशिकांत

गार्बेज फ्री का प्रमाण पत्र कितना सच है इसका उदाहरण शहर की अधिकतर मुख्य सडक़ों पर लगा कूड़े का ढेर दिखा देता है।
- विपिन