वाराणसी (ब्यूरो)इंसान कड़ी मेहनत से अपनी तकदीर को भी बदल सकता हैकुछ ऐसी ही प्रेरणा के साथ बीएचयू के गोल्ड मेडलिस्ट, फैकल्टी आफ विजुअल आट्र्स सतीश कुमार पटेल आगे बढ़ रहे हैंसतीश हाल ही में 26,129 स्क्वायर इंच की पेंटिंग बनाकर सुर्खियों में हैंकागज के 22 टुकड़ों को जोड़कर बनाई गई इस पेंटिंग में सतीश ने बनारस के घाटों को आकर्षक तरीके से दर्शाया हैयह उनकी दूसरी सबसे बड़ी पेंटिंग हैनेशनल, इंटरनेशनल आर्ट एग्जीबिशन में भाग लेने वाले सतीश इसके पहले बीएचयू पर आधारित सबसे बड़ी पेंटिंग बना चुके हैंआइये आपको बताते हैं सतीश के इंजीनियर बनने के सपने से लेकर आर्टिस्ट बनने तक का सफर.

भाई को देखकर मिली प्रेरणा

सतीश बताते हैं कि उनके पिता एक किसान हैं और जब उन्होंने 12वीं की पढ़ाई पूरी की तो उनका सपना इंजीनियर बनने का थापर उनके घर की फाइनेंशियल स्थिति ठीक न होने के कारण उनका यह सपना तो अधूरा रह गयापर उन्होंने हार नहीं मानीसतीश के बड़े भाई ने भी बीएचयू से आट्र्स से पीएचडी की हैसतीश ने अपने भाई से ही पेंटिंग बनाना सीखा। 2022 में जब वह बीएचयू से मास्टर्स कर रहे थे तो उन्हें उनकी शानदार र्पंटिंग के लिए गोल्ड मेडल दिया गया था

22 घंटे में बनी पेंटिंग

सतीश शाम करीब 7:30 बजे अपनी सबसे बड़ी पेंटिंग बनाने के लिए बैठे थे, जिसे पूरा करते-करते उन्हें सुबह का 10 बज गया थाफिर उन्होंने थोड़ा ब्रेक लेकर तीन बजे तक उस पेटिंग को पूरा कर दिया थासतीश बनारस के मिर्जामुराद के ही रहने वाले हैंसतीश सरकारी टीचर बनना चाहते हैं, जिसके लिए उनकी पूरी तैयारी चल रही हैसतीश के द्वारा बनाई गई पेंटिंग में आपको काशी की आत्मा यानी काशी के अस्सी घाट, पंचगंगा घाट, रीवा घाट, भैदानी घाट, चेतसिंह घाट, हरिशचद्र घाट, करवट काशी, दशाश्वमेध घाट से लेकर आगे तक के घाट भी दिख जाएंगे, जिसे ब्लैक कलर से बनाया गया है

बच्चों को देते हैं कोचिंग

सतीश की घर की स्थिति ठीक नहीं थी, जिसके चलते उन्हें पढ़ाई को लेकर कई परेशाना उठानी पड़ीपर वह चाहते हैं कि ऐसा दूसरे बच्चों के साथ न होइसलिए वह अपने आस-पास के जरूरतमंद बच्चों को फ्र में कोचिंग देते हैं