वाराणसी (ब्यूरो)बेहतरीन और लाजवाब खाने-पीने के मामले में बनारस का कोई जोड़ नहीं हैखासकर स्ट्रीट फूड के मामले मेंयहां करीब-करीब हर एरिया में सड़क से लेकर गली-मुहल्ले तक में ठेला, खोमचे, गुमटी में चाट, समोसे, छोले-भटूरे, कचौड़ी, जलेबी जैसे तमाम व्यंजन बिकता हुआ दिख जाएगाइन्हें जिसने भी एक बार चख लिया वो हमेशा के लिए इसका मुरीद हो जाता हैमगर, क्या आप यह जानते हैं कि जिस चीज को आप खा रहे हैं वो आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैअगर नहीं तो जान लीजिएखाद्य सुरक्षा के मानकों को दरकिनार कर खुले में बिकने वाले ये खाद्य पदार्थ खाने में जितने स्वादिष्ट होते हैं, स्वास्थ्य के लिए उतने ज्यादा हानिकारक भीडॉक्टर्स की मानें तो अगर कोई लगातार इसका सेवन कर ले तो उसका लीवर भी डैमेज हो सकता है.

लापरवाही के साथ बांट रहे बीमारी

फैशन के दौर में होटल, रेस्टोरेंट या फिर स्ट्रीट फूड हमारी पहली पंसद बन गई हैचिकित्सकों की मानें तो आजकल 60 फीसदी बीमारी दूषित खानपान से हो रही हैफिर भी सड़कों पर लगे ठेले पर खाने के सामान को सुरक्षित रखने के नाम पर लापरवाही जारी हैबिना ढके खुले में बेची जा रही तमाम खाद्य पदार्थ बीमारी को खुला दावत दे रही हैंसिगरा, रथयात्रा, लक्सा, गोदौलिया, बांसफाटक, नई सड़क, मैदागिन, कैंट समेत कई मुख्य चौराहों पर लापरवाही का खुला मंजर दिखाई दे रहा है.

कैंट रेलवे स्टेशन

कैंट रेलवे स्टेशन के बाहर ठेला-पटरी वाले खाद्य पदार्थ बेचते दिख जाएंगेयहां चाय से लेकर नाश्ता-खाना आदि की दर्जनों दुकानें खुले में चल रही हैंसड़क के किनारे लगे इन दुकानों पर रखे सामान पर उड़ते धूल के कण बैठते रहते हैं और इसी खाने को ग्राहकों को परोसा जाता हैकुछ दुकानें तो नाली के पास ही हैइसमें भिनभिनाती मक्खियां उन्हीं खाद्य पदार्थों पर आकर बैठती हैं, जिसे लोग वहां खड़े होकर खाते हैं.

लक्सा-गोदौलिया

लक्सा से लेकर गोदौलिया चौराहे तक सड़क किनारे दर्जनों खान-पान की दुकानें हैंखास बात तो यह है कि दुकानदार खाद्य सामग्री खुले में बेचकर ग्राहकों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैंयहां इडली-डोसा, चाट-पकौड़ी, समोसा आदि की जमकर बिक्री होती है, लेकिन एक भी ठेला ऐसा नहीं दिखाई देता जहां खाने के इन सामानों को सुरक्षित तरीके से रखा गया हो.

गंगा घाट के पास

दशाश्वमेध व सीतला घाट के अलावा अस्सी क्षेत्र में भी इस तरह के ठेले-खोमचे वाले दुकानदार दुकान सजाए रहते हैंइन जगहों पर हर समय धूल के गुबार उड़ते रहते हैं, जो खाद्य सामग्री तक आसानी से पहुंचते हैंलेकिन दुकानदार इनकी देखभाल करना तो दूर, उस खाने-पीने की चीजों को ढकते तक नहीं.

फास्ट फूड भी खुले में

शहर में सड़क और नालों के किनारों पर रेहड़ी व ठेले लगाकर बेचे जा रहे दूषित साउथ इंडियन डिश व बर्गर, पिज्जा, मोमोस समेत अन्य फास्टफूड की बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है.

ऐस समझें स्वास्थ खराब होने के गणित

बाजार में खुली खाद्य समाग्री पर धूल-मिट्टी के कण तो जमा होते ही हैं, साथ ही मक्खियां भी इन पदार्थों को दूषित बनाती हैंमक्खियां जो लारवा इन सामग्रियों पर छोड़ती हैं, वह उसे खाने पर इंसान के पेट में पहुंच जाता हैजिसके बाद वह शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचाता हैचिकित्सकों की मानें तो कुछ दुकानदार कचौड़ी-पकौड़ी और चाट में कई दिनों पुराना और जले हुए तेल का इस्तेमाल करते हैंखाली पेट बाहर के इन तैलीय चीजों का इस्तेमाल करने से दूषित सामग्री आंतों में चिपक जाती हैतैलीय पदार्थ को बनाने के लिए सामग्री भी मिलावट की इस्तेमाल होती हैजिससे शरीर में गैस, अपच, पथरी, एसिडिटी, दस्त जैसी बीमारियों का जन्म होता है

हो सकती है ये बीमारी

खुले में बिकने वाले दूषित खाद्य पदार्थ खाने से किडनी, लीवर, आंत व फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर सकते हैंडायरिया, रक्त अल्पता, गर्भवती महिलाओं को गर्भपात तथा कैंसर तक हो सकता है.

खुले बाजार में क्या है हार्मफुल

-खुले बाजार में बिकने वाला फास्टफूड व जंक फूड

-सड़े-गले व कटे-फटे फल

-मिलावटी खोए से बनी मिठाई व लस्सी

-मिलावटी तेल से तैयार खान-पान की वस्तुएं

-बासी भोजन, व फ्रिज में कई दिनों तक रखा भोजन

ठेले व दुकानों पर मिलावटी सामग्री का उपयोग किया जाता हैऐसे में पेट संबंधी बीमारी होने की आशंका रहती हैस्ट्रीट फूड का सेवन करने वालों को खुद ही जागरूक होना पड़ेगा.

डॉपीके गुप्ता, फिजीशियन, मंडलीय अस्पताल

रेहड़ी-ठेलों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थ धूल-मिट्टी मिक्स होते हैंइसमें मक्खी-मच्छर भी बैठते रहते हैंइससे बैक्टीरिया पनप जाते हैंइस लिहाज से ये फूड आईटम सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैंऐसे पदार्थ खाने से किडनी व लीवर तक खराब हो सकते हैं.

डॉएसके विश्वकर्मा, गैस्ट्रोलॉजिस्ट

समय-समय पर स्ट्रीट वेंडर्स को जागरूक किया जाता रहता है कि वह खाने की चीजों पर विशेष रुप से ध्यान रखेंइन वेंडर्स के कुछ नाम्र्स हैं जिसे ज्यादातर लोग पूरा करते हैंखामियां मिलने पर कार्रवाई भी की जाती हैसमय-समय पर जागरूकता के लिए अभियान चलाया जा रहा है.

अमित कुमार, फूड एंड सेफ्टी ऑफिसर