देहरादून (ब्यूरो) : अब इसको पोस्टर, बैनर के जरिए अपना प्रचार-प्रसार करना कहें या महानविभूतियों का अपमान या फिर नियम कानूनों का माखौल उड़ाना। लेकिन ये सच है कि राजधानी दून में दीवारों, पोल, चौक-चौराहों पर मौजूद प्रतिमाएं बैनर, पोस्टरों से पटे पड़े हुए हैं। कोई पूछने वाला नहीं है। हद तो तब हो गई है कि जब देश के लिए मर मिटने वाले रियल हीरोज के स्मृति द्वार व महापुरुषों की प्रतिमाओं को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। उन पर भी पोस्टर चस्पा कर दिया। जबकि, कईयों ने मंदिर तक नहीं छोड़े हैं।


- धर्मपुर क्षेत्र में जम्मू कश्मीर में तैनाती के दौरान शहीद हुए मेजर चित्रेश बिष्ट की याद में स्मृति द्वार बनाया गया है। जिसका लोकार्पण सीएम ने किया था। लेकिन इस पर भी पोस्टर-बैनर लगाने वालों ने नहीं छोड़ा।


- डीएवी इंटर कॉलेज दून के पीछे की दीवार पर बनाई गई पेंटिंग्स पर भी पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। दीवार पर क्वांटम मैकेनिक्स और मैथेमेटिकल फिजिक्स के क्षेत्र उल्लेखनीय योगदान देने वाले एनएस बोस, इंटरनेशलन लेवल पर भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के फाउंडर विक्रम साराभाई और विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले एशिया के पहले साइंटिस् सर चंद्रशेखर वैंकट रमन जैसे महान विभूतियों की पेंटिंग्स बनाई गई हैं। लेकिन, पोस्टर चस्पा करने वालों ने इनकी प्रतिमाओं को भी नहीं छोड़ा है।


- पोस्टर लगाने वालों ने महाराजा अग्रसेन की मूर्ति को भी नहीं छोड़ा। प्रिंस चौक पर लगाई गई वैश्य समाज के संस्थापक महाराजा अग्रसेन की मूर्ति के नीचे भी पोस्टर लगे दिखे। हालांकि, कुछ पोस्टर को वहां से हटाने की किस ने कोशिश की है। लेकिन, पोस्टर के निशान अभी भी यथावत हैं।


- दून मेडिकल कॉलेज के पास भी कुछ ऐसा ही हाल दिखा। पोस्टर चस्पा करने वालों ने लोगों को जानकारी देने के लिए लगाए गए साइन बोर्ड को नहीं बख्शा। पूरे साइन बोर्ड पर पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। पता ही नहीं चल रहा है कि आखिर ये किस चीज के लिए बोर्ड लगाया गया था।

कहां-कहां लगे हैं पोस्टर

-एटीम
-दूकानों के शटर पर
-स्मृति द्वारों पर
-महानविभूतियों के प्रतिमाओं पर
-घरों की दीवारों
-सरकारी भवनों पर
-सरकारी कॉलेज गेट
-पब्लिक टॉयलेट

दीवार पर पेंटिंग करते दिखे स्टूडेंट्स

जब हमारी टीम धर्मपुर की तरफ पहुंची तो वहां दीवार पर कुछ स्टूडेंट्स पेंटिंग करते हुए नजर आए। इस दौरान इन स्टूडेंट्स का दर्द छलक पड़ा। बताया, वे बड़ी मेहनत और लगन से दीवारों पर पेंटिंग्स बनते हैं। मकसद है कि शहर का सौंदर्यीकरण हो, सुंदर लगे। लेकिन, कुछ लोग सिर्फ अपने फायदे के लिए पूरे शहर को पोस्टर्स, स्टीकरों और बैनर्स से गंदा कर देते हैं। इसका असर ये होता है कि बाहर से आने वाले टूरिस्ट्स पर सिटी की निगेटिव इमेज पहुंचती है। स्टूडेंट्स का कहना था कि पोस्टर के अलावा लोग दीवारों पर पान-गुटखा खाकर गंदा कर देते हैं।

नगर निगम के गेट को भी नहीं छोड़ा

पोस्टर और पंफलेट लगाने वालों की हिम्मत को अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इन्होंने नगर निगम के गेट तक को नहीं छोड़ा। वहां भी पोस्टर चस्पा कर दिए। हालांकि, नगर निगम कार्मिकों की ओर से इन्हें हटाने की कोशिश की गई। लेकिन, अवशेष बाकी रह गए।


राजनीतिक दल और छात्र संगठन अपने प्रचार करने के लिए दीवारों पर पोस्टर्स या स्टीकर्स चस्पा कर देते हैं। इससे निजी घरों और सरकार इमारतों की दीवारें गंदी हो जाती हैं। वहीं, ये धन की भी बर्बादी है। हैं।
-अंजलि ऐरी

हम दीवारों पर बड़ी मेहनत से पेंटिंग्स बनते हैं, उन्हें सजाते हैं। लेकिन, पोस्टर और बैनर लगाने वाले आकर उन पर पोस्टर चस्पा कर देते हैं। इससे न केवल हमारी मेहनत तो बेकार जाती है, बल्कि शहर में भी गंदगी महसूस होती है।
- अनुष्का आर्टिस्ट

मैं सभी राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और कोचिंग संस्थानों से आग्रह करता हूं कि प्लीज हमारी सूंदर सिटी को गंदा न करें। जहां-तहां पोस्टर और बैनर चस्पा न करें। अपने शहर को खूबसूरत बनाए रखें।
-सार्थक टंडन

हमारा शहर अब स्मार्ट सिटी बनने जा रहा है। ऐसे दीवारों, बिजली के पोल साइन बोड्र्स पर स्टीकर, पोस्टर या पंफलेट्स लगाना सरासर गलत है। नगर निगम प्रशासन को इस पर कड़ाई से कार्रवाई करनी चाहिए।
-सुहानी गौतम

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने जिस मुहिम की ये शुरुआत की है। वह काबिलेतारीफ है। नगर निगम प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे लोगों पर जुर्माना वसूल जाना चाहिए। हम इस प्रकार से बैनर और पोस्टरों से परेशान हैं।
-कुलदीप कुमार

नगर निगम की ओर से अलॉट किए गए स्थान पर ही बैनर व पोस्टर लगाए जाने चाहिए। इस तरह से जगह-जगह पोस्टर लगाने से शहर पोस्टर, बैनर वाला नजर आता है। यही वजह है कि दून की स्वच्छता रेंकिंग भी पिछड़ रही है। जिस पर निगम को सोचने की जरूरत है।
- गौतम ओडवल

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