-दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में अल्ट्रासाउंड के पूरे इंतजाम, डॉक्टर बाहर करवा रहे अल्ट्रासाउंड
-कॉलेज प्रशासन कार्रवाई के लिए तैयार, कौन बाहर के लिए लिख रहा है, अब की जाएगी जांच


केस स्टडी--1
लोकेशन--दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल गायनी ओपीडी, ग्राउंड फ्लोर
दिन - वेडनसडे
वक्त- 11:30 बजे
पेशेंट - मैडम पेट में दर्द है।
डॉक्टर - कौन-सा मंथ है।
पेशेंट- पांचवां।
डॉक्टर - बच्चे की धड़कन तो ठीक है। अल्ट्रासउंड और टेस्ट लिख रही हूं। उसे करवा कर दिखाना।
पेशेंट- जी मैम, अभी यहीं करवाकर आपको चैक कराऊं।
डॉक्टर -नहीं, यहां तो 15-15 दिनों की वेटिंग चल रही है। बाहर से करवा लीजिए।
पेशेंट- मैम, कहां से करवाएं।
डॉक्टर -(एक कार्ड पकड़ाते हुए) यहां करा सकती हो।

केस स्टडी--2
लोकेशन--दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल गायनी ओपीडी फस्र्ट फ्लोर।
दिन- वेेडनसडे।
वक्त-12:15 बजे।
पेशेंट-मैम, पेट के निचले हिस्से में दो दिन से दर्द है।
डॉक्टर-चैक करते हुए। ठीक है अल्ट्रासाउंड करवाइए।
पेशेंट-ठीक है मैम।
डॉक्टर-लेकिन, (एक सेंटर का नाम लेते हुए) अल्ट्रासाउंड सेंटर को छोड़कर किसी के पास भी चले जाना। उसकी रिपोर्ट ठीक नहीं है।
पेशेंट- जी मैम।

केस स्टडी--3
दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल गायनी ओपीडी
दिन -फ्राइडे
वक्त- 11:10 बजे।
पेशेंट अटेंडेंट-मैम, रुटीन चैकअप के लिए आए हैं।
डॉक्टर-कोई प्रॉब्लम।
पेशेंट-नहीं मैम, वेट कम हो गया है।
डॉक्टर- खाना जरूरी है। कौन-सा मंथ चल रहा हैं।
पेशेंट अटेंडेंट- 5वां शुरू हुआ है।
डॉक्टर-ठीक है। अल्ट्रासाउंड कराना होगा, जो बाहर से करना होगा। यहां के मशीन में क्लैरिटी नहीं है।
पेशेंट अटेंडेंट- मैम, वैसे अभी कोई प्रॉब्लम नहीं है इनको।
डॉक्टर- 5वेें महीने में कराना ही पड़ता है।
परिजन-मैम, पहले तो नहीं होता था।
डॉक्टर-अब जरूरी है। करवा लीजिए।

देहरादून, 31 मार्च (ब्यूरो)।
स्टेट के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के ये उदाहरण आपके सामने समझने के लिए काफी हैं। क्या वीआईपी, क्या आम। हर कोई अपने बेहतर इलाज के लिए दून मेडिकल कॉलेज मेंं पहुंचता है। सरकार इसी मेडिकल कॉलेज को सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए रोल मॉडल बताती है। पेशेंट्स को हर सुविधाएं मुहैया कराए जाने के साथ स्ट्रांग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी दावा किया जाता है। लेकिन, सच्चाई ये है कि सारी फैसिलिटी होने के बावजूद मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा जाता है। मरीज के सवाल के जवाब में डॉक्टर्स मेडिकल कॉलेज के अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट को सही न बताते हुए बाहर के लिए सुझाव देते हैं। बाकायदा, अल्ट्रासाउंड के नाम या फिर पर्ची देकर वहां तक भेजा जाता है।

निर्देश के बाद भी असर नहीं
सरकार की ओर से राज्यवासियों को बेहतर मेडिकल फैसिलिटी देने के लिए दून मेडिकल कॉलेज में कई सुविधाएं दी जा रही हैं। यहां तक कि सरकारी अस्पतालों में तो कई जांचें तक फ्री की गई हैं। प्रेगनेंट महिलाओं की सामान्य जांच के अलावा अलावा अल्ट्रासाउंड जांच तक निशुल्क है। लेकिन, इसके बाद भी प्रेगनेंट महिलाओं को रिपोर्ट साफ न आने के नाम पर डॉक्टर्स पेशेंट को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए बाहर भेज रहे हैं। नतीजतन, पेशेंट्स को बाहर 3 से लेकर साढ़े तीन हजार रुपए में अल्ट्रासाउंड करना पड़ रहा है।

बाहर से भी पहुंचते हैं पेशेंट
दून से ही नहीं राज्य के सुदूरवर्ती इलाकों के अलावा बॉर्डर स्टेट के इलाकों से दून मेडिकल कॉलेज की एक खास पहचान को देखते हुए इलाज के लिए लोग दून पहुंचते हैं। इनमें बिहारीगढ़, सहारनपुर, रुड़की, उत्तरकाशी, टिहरी, मसूरी, चमोली, रुद्रप्रयाग जैसे इलाके व डिस्ट्रिक्ट शामिल हैं। खास बात ये है कि दून मेडिकल कॉलेज में रोजाना की ओपीडी करीब ढाई हजार तक है। जबकि, आईपीडी अलग है।

दिए जाते हैं ऐसे-ऐसे तर्क
-प्रेगनेंट महिलाओं को बताई जाती है करीब 15 दिनों की वेटिंग।
-5 माह की प्रेगनेंसी की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट साफ न होने का हवाला।
-बाहर से जल्द रिपोर्ट आएगी, तब जल्द ट्रीटमेंट शुरू हो पाएगा।
-दून हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट व अन्य स्टाफ का न होना।


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मैं अपनी बहू को रुटीन चैकअप के लिए लाई हूं। यहां अब कुछ जांच व अल्ट्रासाउंड बाहर के लिए लिख दिया है। अब हमने अल्ट्रासाउंड हमने बाहर से कराया। जिसका साढ़े तीन हजार भुगतान भी किया। डॉक्टर ने हमें अल्ट्रासाउंड सेंटर का कार्ड भी दिया था।
चरणजीत, पेशेंट अटेंडेंट।

चन्द्रबनी से यहां जांच के लिए आती हूं। मुझे यहां डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा था। उन्होंने बाकायदा, एक पैथोलॉजी सेंटर का पर्चा भी दिया था। वहीं से जांच व अल्ट्रासाउंड के लिए कहा है। जहां से जांच कराने को कहा था। लेकिन, हमने घर के पास से ही डायग्नोस्टिक सेंटर से 3 हजार में जांच कराई।
रेशमा, पेशेंट।

मैं मेडिसिन वार्ड में जांच कराने के लिए आया था। पेट में कई दिनों से दर्द की शिकायत है। यहां डॉक्टर ने मुझे अल्ट्रासाउंड समेत कुछ जांचें कराने के लिए लिखा है। जांच तो यहां पर ही हो जाने की बात कही गई है। लेकिन, अल्ट्रासाउंड की 1 माह की वेटिंग बताई गई है। इसके लिए बाहर से जांच कराने के लिए कहा है।
प्रमोद, पेशेंट।

ये किस-किस डिपार्टमेंट का मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर ऐसा है तो इस पर विशेष निगरानी रखने के लिए कहा जाएगा। जिससे किसी भी पेशेंट को इसका खामियाजा न भुगतना पड़े।
डॉ। आशुतोष सयाना, डायरेक्टर, मेडिकल एजुकेशन व प्रिंसिपल दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल।